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हीट स्ट्रोक में क्यों काम नहीं करती पैरासिटामोल? डॉक्टर ने बताया कौन सी गलती पड़ सकती है भारी

Paracetamol for Heatstroke: डॉ. विशाल गबाले ने बताया कि हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक को सामान्य बुखार नहीं है. उन्होंने बताया कि अगर ऐसी स्थिति हो गई तो सबसे पहले क्या करना चाहिए.

हीट स्ट्रोक में क्यों काम नहीं करती पैरासिटामोल? डॉक्टर ने बताया कौन सी गलती पड़ सकती है भारी
अक्सर लोग तेज बुखार या शरीर गर्म होने पर पैरासिटामोल खा लेते हैं. (AI Image)

Can Paracetamol Treat Heatstroke?: भारत इस समय भीषण गर्मी और खतरनाक हीट वेव का सामना कर रहा है. देश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि तटीय इलाकों में उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. गर्मी से होने वाली थकावट (Heat Exhaustion) और लू (Heat Stroke) के मामले सामने आ रहे हैं. अक्सर लोग तेज बुखार या शरीर गर्म होने पर पैरासिटामोल खा लेते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हीट स्ट्रोक में ऐसा करना खतरनाक हो सकता है. डॉक्टर विशाल गबाले ने हाल ही में सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में बताया कि आखिर हीट स्ट्रोक में पैरासिटामोल क्यों काम नहीं करती और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए. उन्होंने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि लू को सामान्य बुखार समझने की गलती जानलेवा साबित हो सकती है.

गर्मी से होने वाली दो बड़ी समस्याएं

डॉ. विशाल गबाले बताते हैं कि इस समय भारत में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. मध्य भारत के कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है, जबकि तटीय क्षेत्रों में 40 डिग्री तापमान के साथ 60% से ज्यादा उमस है. उनका कहना है कि इंसानी शरीर इतने ज्यादा तापमान और नमी को सहने के लिए बना ही नहीं है. इसी वजह से लोगों को गर्मी से जुड़ी दो बड़ी समस्याएं होती हैं थकावट और हीट स्ट्रोक.

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क्या होती है गर्मी से थकावट?

गर्मी से होने वाली थकावट (Heat Exhaustion) तब होती है जब शरीर से बहुत ज्यादा पानी और नमक निकल जाता है. लगातार पसीना आने और तेज गर्मी में लंबे समय तक रहने से शरीर कमजोर पड़ने लगता है. डॉक्टर के अनुसार, ऐसे मरीज थके हुए दिखाई देते हैं लेकिन उन्हें पसीना आता रहता है. ज्यादातर मामलों में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है.

इस स्थिति में मरीज को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाना चाहिए और शरीर में पानी की कमी पूरी करनी चाहिए. ORS और पर्याप्त पानी देना बेहद जरूरी होता है.

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हीट स्ट्रोक क्यों है ज्यादा खतरनाक?

हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है. यह तब होती है जब शरीर का टेंपरेचर कंट्रोल करने वाला सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाता है. डॉक्टर बताते हैं कि इस स्थिति में मरीज को पसीना आना बंद हो जाता है, स्किन ड्राई और गर्म हो जाती है और शरीर अंदर से ओवरहीट होने लगता है.

डॉ. गबाले ने समझाया कि इस दौरान दिमाग ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है जैसे माइक्रोवेव में कुछ पक रहा हो. मरीज बेहोश हो सकता है, उसे दौरे पड़ सकते हैं, कोमा हो सकता है और कई मामलों में मौत भी हो सकती है.

हीट स्ट्रोक में पैरासिटामोल क्यों नहीं करती काम?

डॉक्टर ने साफ कहा कि हीट स्ट्रोक कोई सामान्य बुखार नहीं है. पैरासिटामोल तब काम करती है जब किसी बीमारी की वजह से दिमाग का टेंपरेचर कंट्रोल करने वाला हिस्सा शरीर का तापमान बढ़ा देता है. लेकिन हीट स्ट्रोक में समस्या अलग होती है.

यहां शरीर का कूलिंग सिस्टम ही फेल हो जाता है. बाहर की बहुत ज्यादा गर्मी शरीर पर हावी हो जाती है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता. इसलिए पैरासिटामोल लेने से कोई फायदा नहीं होता.

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ऐसे बचाई जा सकती है जान

डॉ. गबाले सलाह देते हैं कि अगर किसी को हीट स्ट्रोक हो जाए तो उसे तुरंत ठंडा करने की कोशिश करनी चाहिए. मरीज की कांख और शरीर के अन्य हिस्सों पर ठंडा पानी डालना चाहिए ताकि तापमान कम हो सके. इसके बाद बिना देरी किए मरीज को अस्पताल ले जाना जरूरी है.

गर्मी में कैसे रखें खुद को सुरक्षित?

  • ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं.
  • ORS और नींबू पानी लेते रहें.
  • दोपहर की तेज धूप से बचें.
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें.
  • लंबे समय तक बाहर रहने से बचें.
  • शरीर में कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो तुरंत आराम करें.

भीषण गर्मी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. सही जानकारी और समय पर इलाज ही हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचने का सबसे बड़ा तरीका है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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