- महाराष्ट्र पुलिस ने अहिल्यानगर में छापेमारी कर आईएसआई और अंडरवर्ल्ड से जुड़े चार युवकों को हिरासत में लिया है
- ये पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से संपर्क में थे और गुप्त टारगेट्स पर हमले की फिराक में थे
- मॉड्यूल को पाकिस्तान से अंडरवर्ल्ड और आईएसआई के हैंडलर्स द्वारा रिमोटली संचालित किया जा रहा था
महाराष्ट्र पुलिस ने बड़े आईएसआई-अंडरवर्ल्ड टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. अहिल्यानगर में छापेमारी में चार युवकों को हिरासत में लिया गया है, जिनका पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से सीधे संपर्क में होने का खुलासा हुआ है. बांद्रा ईस्ट समेत संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें और वीडियो भी विदेश भेजे गए थे. वहीं हथियारों की डिलीवरी को लेकर जांच जारी है. बताया जाता है कि एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए ब्रेनवॉश कर हुजैफा, तौकीर और साजिद को गुप्त टारगेट सौंपे गए थे.
जांच अधिकारियों को पता चला है कि कथित आईएसआई-अंडरवर्ल्ड मॉड्यूल ने करीब चार महीने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए आतंक के लिए भर्ती करना शुरू किया था.
अधिकारियों की जानकारी के अनुसार, इस मॉड्यूल में भर्ती होने के तुरंत बाद ही तीनों आरोपियों को विशेष टारगेट सौंप दिए गए थे. सूत्रों का दावा है कि इस पूरे ऑपरेशन को पाकिस्तान से अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैंडलर्स और आईएसआई के गुर्गों द्वारा रिमोटली मैनेज किया जा रहा था.

फाइल फोटो
जांचकर्ताओं ने अंडरवर्ल्ड के गुर्गे मुन्ना झिंगाडा और पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी की पहचान मुख्य चेहरों के रूप में की है, जिन्होंने कथित तौर पर आरोपियों की भर्ती और उनका मार्गदर्शन करने में अहम भूमिका निभाई थी. आरोपियों को निर्देश दिए गए थे कि मुंबई में अपने कामों को अंजाम देते समय किसी का ध्यान आकर्षित किए बिना, बेहद गुप्त तरीके से काम कैसे करना है.
जांच से संकेत मिलता है कि बैंकिंग और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए पैसे के लेन-देन की व्यवस्था हवाला नेटवर्क के जरिए की गई थी. आरोप है कि रेकी और ऑपरेशन के खर्चों के लिए पाकिस्तान से करीब 1 लाख रुपये एडवांस के तौर पर भेजे गए थे. खबरों के मुताबिक, आरोपियों के बीच बांटने से पहले इस रकम को अलग-अलग माध्यमों से छोटी-छोटी किश्तों में पहुंचाया गया था.
सूत्रों के अनुसार, ये चारों युवक कथित तौर पर ऑनलाइन कम्युनिकेशन मीडियम के जरिए सीधे शहजाद भट्टी के संपर्क में थे. इस व्यापक आतंकी जांच में पहले हुई गिरफ्तारियों के बाद, कुछ चैट और डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट किए जाने की खबर है. डिलीट की गई बातचीत और डेटा को वापस रिकवर करने के लिए, सुरक्षा एजेंसियों ने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है.
अधिकारी अब यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि इस समूह ने और किन-किन जगहों, वीआईपी रूटों या धार्मिक स्थलों की रेकी की थी. जांच अधिकारी इस बात का भी पता लगा रहे हैं कि इस ग्रुप के लिए हथियारों की व्यवस्था पहले ही कर दी गई थी या उन्हें बाद के चरण में डिलीवर किया जाना था.
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