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दिखने में दुबले, अंदर से बीमार, स्किनी फैट बन रहा युवाओं में सबसे खतरनाक बीमारी, जानिए क्या है

Skinny Fat: स्किनी फैट ऐसे लोगों की स्थिति है जिनका बॉडी वेट दिखने में सामान्य है, लेकिन मसल (मांसपेशियां) कम और फैट ज्यादा होता है, खासकर पेट के आसपास. आखिर दुबले दिखने वाले लोग अंदर से बीमार क्यों है? चलिए जानते हैं.

दिखने में दुबले, अंदर से बीमार, स्किनी फैट बन रहा युवाओं में सबसे खतरनाक बीमारी, जानिए क्या है
विसरल फैट हमारे लिवर, किडनी, आंतों और हार्ट जैसे जरूरी अंगों के चारों ओर जमा होता है.

Thin Outside, Sick Inside: आजकल एक अनोखी हेल्थ समस्या तेजी से बढ़ रही है शरीर बाहर से पतला दिखने के बावजूद अंदर से मोटा होना. इसे आमतौर पर साइलेंट फैट या स्किनी फैट (Skinny Fat) कहा जाता है. नाम से लगता है कि कोई हल्का-फुल्का विषय है, लेकिन सच्चाई बहुत गंभीर है. ऐसे लोग वजन माप (BMI) के हिसाब से नॉर्मल या हेल्दी दिखाई देते हैं, लेकिन शरीर में विसरल फैट (आंतों के आसपास जमा होने वाली चर्बी) ज्यादा रहती है और मसल मास कम होती है, जिससे हेल्थ पर गहरा असर पड़ता है.

साइलेंट या विसरल फैट क्या है? | What is Silent Fat?

विसरल फैट हमारे लिवर, किडनी, आंतों और हार्ट जैसे जरूरी अंगों के चारों ओर जमा होता है. यह बाहर से दिखाई नहीं देता, लेकिन शरीर के अंदर गंभीर नुकसान पहुंचाता है. हम अक्सर सोचते हैं कि अगर कोई पतला है, तो वह हेल्दी होगा. लेकिन, ऐसा जरूरी नहीं है. स्किनी फैट ऐसे लोगों की स्थिति है जिनका बॉडी वेट दिखने में सामान्य है, लेकिन मसल (मांसपेशियां) कम और फैट ज्यादा होता है, खासकर पेट के आसपास. अमेरिका या यूरोप में शरीर का मोटापा बाहर से दिखाई देता है, लेकिन भारत में कई लोग अंदर से ही अनहेल्दी होते हैं चाहे वे पतले दिखें या न दिखें.   

क्या कहते हैं फिटनेस कोच और हेल्थ एक्सपर्ट्स?

पतला होने का मतलब हमेशा हेल्दी होना नहीं है. सच्ची फिटनेस दुबली मांसपेशियों, हेल्दी फैट लेवल और अच्छे मेटाबॉलिक हेल्थ बैलेंस से आती है. यह भारत जैसे देश के दृष्टिकोण पर सच है, जहां लोग दिन भर बैठे बातें करते हैं, बाहर का तला-भुना या रिफाइंड कार्ब वाले फ़ूड ज्यादा खाते हैं, लेकिन व्यायाम बहुत कम करते हैं. यानी सिर्फ पतला दिखना स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है. आपका शरीर असल में मसल मास, फैट लेवल और मेटाबॉलिक हेल्थ के संतुलन पर सही-गलत होता है.

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यह बात इंडिया जैसे देश में खासतौर पर सच है, जहां लोग दिन भर बैठे रहते हैं, बाहर का तला-भुना या रिफाइंड कार्ब वाले फ़ूड ज्यादा खाते हैं, लेकिन व्यायाम बहुत कम करते हैं.

स्किनी फैट क्यों बढ़ रहा है? | Why is Skinny Fat Becoming More Common?

1. बैठने वाली लाइफस्टाइल

ज्यादातर लोग दिन भर बैठे रहते हैं ऑफिस वर्क, पढ़ाई, मोबाइल/टीवी समय, जिससे मसल्स कमजोर होती हैं और फैट जमा होता है. कम मसल्स का अर्थ है धीमा मेटाबॉलिज्म ज्यादा फैट.

2. गलत भोजन और पोषण

भारतीय भोजन में रिफाइन्ड कार्बोहाइड्रेट (आटा, चावल), मीठा, तला-भुना खाया जाता है, लेकिन पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स नहीं मिलते. इससे शरीर मसल बनाने में असमर्थ रहता है.

3. कम सोना और स्ट्रेस

अगर आप हर रोज रात में देर से या कम सो रहे हैं और लगातार तनाव रहते हैं तो हार्मोनल असंतुलन होता है, जो विसरल फैट बढ़ाता है. 

स्किनी फैट के खतरे | Dangers of Skinny Fat

यह समस्या सिर्फ दिखने की बात नहीं है इसके असली खतरें हैं:

  • इंसुलिन रेसिस्टेंस और डायबिटीज
  • फैटी लिवर
  • हार्ट डिजीज (Heart Disease)
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम

ये सब तब हो सकते हैं जब शरीर के इंटर्नल फैट ज्यादा और मसल्स कम हों.

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कैसे सुधारें अपनी सेहत?

  • मसल-बिल्डिंग व्यायाम: वेट ट्रेनिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
  • प्रोटीन से भरपूर डाइट: दाल, अंडा, पनीर, लो फैट दूध
  • चलना और हल्की एक्सरसाइज: रोज 30 मिनट
  • पर्याप्त नींद (7-8 घंटे)

पतला दिखना अब हेल्थ का संकेत नहीं रहा. सही फिटनेस का मतलब है कि शरीर के अंदर मसल्स मजबूत और फैट कंट्रोल हों. स्किनी फैट को पहचान कर समय से सुधारें, ताकि लाइफस्टाइल-जैसी बीमारियों से बचा जा सके.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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