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कमर दर्द से हैं बेहाल और दिमाग में है भारी तनाव? सिर्फ 5 मिनट का ये एक आसन बदल देगा आपका दिन

आयुष मंत्रालय के अनुसार सेतुबंधासन (Bridge Pose) कमर दर्द, तनाव, नींद की समस्या और रीढ़ की लचीलापन बढ़ाने में मदद कर सकता है. जानें फायदे और सही तरीका.

कमर दर्द से हैं बेहाल और दिमाग में है भारी तनाव? सिर्फ 5 मिनट का ये एक आसन बदल देगा आपका दिन
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आज के समय में घंटों बैठकर काम करने की वजह से कमर दर्द, तनाव और नींद की समस्या आम हो गई है. ऐसे में योग का एक आसान आसन सेतुबंधासन (Bridge Pose) राहत दिलाने में मदद कर सकता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन रीढ़ की लचीलापन बढ़ाने, मानसिक तनाव कम करने और शरीर को रिलैक्स करने में सहायक माना जाता है. आइए जानते हैं सेतुबंधासन के फायदे और इसे करने का सही तरीका.

इस सब भागदौड़ का सबसे पहला और बुरा असर सीधा हमारी पीठ, गर्दन और दिमाग पर पड़ता है. रीढ़ की हड्डी धीरे-धीरे पत्थर जैसी सख्त होने लगती है और शाम होते-होते ऐसा लगता है मानो बदन पूरी तरह टूट चुका हो. ऊपर से सिर में चलने वाले फालतू विचार दिमाग का सुकून छीन लेते हैं.

ऐसे में हर कोई गोलियां और पेनकिलर खाने की सलाह देता है, पर दवाइयां पेट खराब करने के अलावा और क्या करती हैं. अगर आप भी इस रोज-रोज के कमर दर्द और मानसिक चिड़चिड़ेपन से तंग आ चुके हैं, तो यकीन मानिए योग से बेहतर कोई साथी नहीं हो सकता. वैसे तो योग में सैकड़ों आसन हैं, पर आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे आसन की जो करने में बेहद आसान है और इसके फायदे इतने हैं कि आप हैरान रह जाएंगे. इसे हम कहते हैं सेतुबंधासन, जिसे अंग्रेजी में ब्रिज पोज भी कहा जाता है.

सेतुबंधासन आखिर क्या बला है और आयुष मंत्रालय क्या कहता है

आयुष मन्त्रालय की मानें तो सेतुबंधासन दिमागी तनाव और डिप्रेशन को कम करने के लिए सबसे बेहतरीन प्राकृतिक उपायों में से एक है. 'सेतु' का मतलब होता है पुल और 'बंध' का मतलब होता है बांधना यानी अपने शरीर को एक मजबूत पुल की तरह तान देना. जब आप इस मुद्रा में आते हैं, तो आपके फेफड़े, छाती, पेट और रीढ़ की एक-एक नस खिंचती है और उनमें फंसा हुआ सारा तनाव बाहर निकल जाता है.

यह आसन सिर्फ शरीर की कसरत नहीं है, बल्कि यह आपके मन को ठहराव देता है. रोजाना बस पांच से दस मिनट इसे कर लेने से शरीर के अंदर एक नई उर्जा का संचार होने लगता है.

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सेतुबंधासन के वो अनोखे फायदे जो आपको हैरान कर देंगे

रीढ़ की हड्डी में गजब का लचीलापन: दिनभर झुककर बैठने से रीढ़ की नेचुरल बनावट बिगड़ जाती है. यह आसन रीढ़ को पीछे की तरफ मोड़ता है, जिससे पीठ की मांसपेशियों का दर्द और खिंचाव जड़ से खत्म होने लगता है.

तनाव और बेचैनी से तुरंत आजादी: जब आप अपनी छाती और गर्दन को ऊपर उठाते हैं, तो खून का बहाव सिर की तरफ बेहतर होता है. इससे दिमागी थकान छूमन्तर हो जाती है और मन एकदम शांत महसूस करता है.

पेट और पाचन क्रिया के लिए वरदान: कमर ऊपर उठाते वक्त पेट की मांसपेशियों पर अच्छा खिंचाव पड़ता है. इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी दिक्कतों में राहत मिलती है और हाजमा मजबूत होता है.

फेफड़ों को मिले पूरी हवा: छाती पूरी तरह खुलने की वजह से फेफड़े पूरी क्षमता के साथ सांस भर पाते हैं. जिन्हें अक्सर सांस फूलने या घबराहट की शिकायत रहती है, उनके लिए यह आसन अमृत की तरह है.

थायराइड और हार्मोन्स का संतुलन: इस आसन में ठोड़ी छाती से सटती है, जिससे गले की थायराइड ग्रंथि दबती और खुलती है. इससे हार्मोन्स का बिगड़ा हुआ खेल पटरी पर आ जाता है.

गहरी और सुकून भरी नींद: अगर आपको रात में करवटें बदलने की आदत है और नींद बार-बार टूटती है, तो शाम को या सुबह इसका नियमित अभ्यास दिमाग को रिलैक्स करके गहरी नींद लाने में बहुत मदद करता है.

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महिलाओं की सेहत के लिए क्यों है यह सबसे खास

महिलाओं के लिए सेतुबंधासन किसी तोहफे से कम नहीं है. हर महीने आने वाले पीरियड्स के दौरान कमर और पेट के निचले हिस्से में जो असहनीय ऐंठन होती है, यह आसन उस दर्द को काफी हद तक कम कर देता है. इसके अलावा जब महिलाएं मेनोपॉज के दौर से गुजरती हैं, तब शरीर में कई सारे हार्मोनल बदलाव होते हैं.

अचानक गर्मी लगना, बहुत ज्यादा पसीना आना, बात-बात पर गुस्सा या रोना आना (मूड स्विंग्स) - ये सब मेनोपॉज के आम लक्षण हैं. सेतुबंधासन इन सभी दिक्कतों को शांत करने में बहुत असरदार साबित होता है. यह पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करता है जिससे अंदरूनी अंगों को पूरा सहारा मिलता है.

सेतुबंधासन करने का एकदम सही और आसान तरीका

अब सवाल आता है कि इसे करना कैसे है. तरीका बहुत ही सीधा है, बस कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • सबसे पहले फर्श पर एक साफ योगा मैट या मोटी दरी बिछाकर पीठ के बल सीधे लेट जाएं. दोनों हाथों को शरीर के बगल में सीधा रखें.
  • अब अपने दोनों घुटनों को मोड़ लें और तलवों को जमीन पर अच्छे से जमा लें. ध्यान रखें कि आपके पैर हिप्स के जितने करीब आ सकें, उतना अच्छा है.
  • दोनों पैरों के बीच में कूल्हों जितनी दूरी बनाकर रखें.
  • अब गहरी सांस अंदर खींचते हुए अपनी कमर, कूल्हों और पीठ को धीरे-धीरे जमीन से ऊपर उठाएं.
  • अपनी छाती को अपनी ठोड़ी की तरफ लाने की कोशिश करें, लेकिन ध्यान रहे कि ठोड़ी को जबरदस्ती दबाना नहीं है और गर्दन पर कोई फालतू दबाव नहीं पड़ना चाहिए.
  • अपने दोनों हाथों से अपनी एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें. अगर हाथ वहां तक नहीं पहुंचते तो कोई बात नहीं, हाथों को जमीन पर रखकर उंगलियों को आपस में फंसा लें.
  • इस स्थिति में तीस से साठ सेकंड तक रुकें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें.
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे अपनी पीठ को वापस जमीन पर ले आएं. यह एक राउंड हुआ. शुरुआत में ऐसे तीन से चार चक्र करना काफी है.

किन लोगों को इसे करते वक्त बरतनी चाहिए सावधानी

वैसे तो यह बहुत सुरक्षित आसन है, पर हर शरीर की अपनी सीमाएं होती हैं. अगर आपकी गर्दन, कंधे या पीठ में कोई ताजा चोट लगी हो, तो इसे भूलकर भी न करें. अगर किसी को स्लिप डिस्क की बहुत गंभीर बीमारी है या रीढ़ में बहुत ज्यादा जकड़न है, तो बिना किसी अच्छे योग गुरु की देखरेख के इसे करने की गलती न करें. शरीर के साथ कभी भी जोर-जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए, जितना शरीर आसानी से मुड़ सके, सिर्फ उतना ही खिंचाव दें.

अगर आप रोज सुबह अपने लिए सिर्फ दस मिनट निकाल लें और इस आसान से सेतुबंधासन को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो न सिर्फ आपकी कमर का दर्द गायब हो जाएगा बल्कि आप दिनभर खुद को हल्का, ताजा और तनावमुक्त महसूस करेंगे.

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