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गर्मियों में रात को बार‑बार प्यास लगती है? आयुर्वेद से जानें इसका कारण

Gala Sukhne Ke Karan Aur Upay: गर्मियों में रात के समय मुंह सूखता है और बार-बार प्यास लगती है, जिसकी वजह से बार-बार उठकर पानी पीना पड़ता है, लेकिन यह सिर्फ सामान्य समस्या नहीं बल्कि शरीर की आंतरिक गड़बड़ी को दिखाता है.

गर्मियों में रात को बार‑बार प्यास लगती है? आयुर्वेद से जानें इसका कारण
मुझे रात की प्यास की चिंता कब करनी चाहिए?

Gala Sukhne Ke Karan Aur Upay: गर्मियों में शरीर को पानी की मात्रा ज्यादा चाहिए होती है क्योंकि गर्म तापमान शरीर की नमी को कम करता है और बाहरी वातावरण और खान-पान की वजह से भी अधिक प्यास लगती है. गर्मियों में रात के समय मुंह सूखता है और बार-बार प्यास लगती है, जिसकी वजह से बार-बार उठकर पानी पीना पड़ता है, लेकिन यह सिर्फ सामान्य समस्या नहीं बल्कि शरीर की आंतरिक गड़बड़ी को दिखाता है.

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रात में बार‑बार प्यास लगने के मुख्य कारण

रात के समय मुंह सूखता है और बार-बार पानी पीने के बाद भी प्यास भी नहीं बुझती. यह समस्या साधारण नहीं है, बल्कि शरीर के तरल असंतुलन का कारण है. इसके पीछे के कई कारण हो सकते हैं और ये कारण आंतरिक और बाहरी दोनों हो सकते हैं,

  • ज्यादा तनाव लेना
  • देर रात खाना-खाना
  • अधिक तला-भुना खाना
  • शरीर में पानी की कमी होना

वहीं आयुर्वेद इसे शरीर में वात और पित्त का असंतुलन मानता है. वात और पित्त का असंतुलन शरीर में गर्मी और पाचन की समस्या को बढ़ा देता है, जिससे शरीर में जलन होने लगती है. वात को शांत करने के लिए गर्म, तरल और पौष्टिक आहार लें और पित्त को कम करने के लिए शरीर को ठंडक पहुंचाएं.

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Photo Credit: AI

मुंह सूखने और बार‑बार प्यास लगने के आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेद में ऐसी समस्या होने पर मुलेठी खाने की सलाह दी जाती है. मुलेठी के टुकड़े को लगातार चूसने से मुंह में नमी बनी रहती है और लार भी तेजी से बनती है. मुलेठी गले और पाचन दोनों को दुरुस्त करने का काम भी करती है. इसके साथ नारियल पानी का सेवन भी कर सकते हैं. नारियल पानी शरीर को अंदर से शांत करता है और पित्त को संतुलित करने में मदद करता है. शरीर अगर हाइड्रेट रहेगा तो बार-बार प्यास लगने और मुंह सूखने की परेशानी नहीं होगी.

आयुर्वेद में त्रिफला से कुल्ला करने की सलाह भी दी जाती है. त्रिफला का कुल्ला करने से मुंह के अंदर का रूखापन कम होता है और नमी बनी रहती है, इसके साथ ही घी का सेवन भी सीमित मात्रा में कर सकते हैं. घी शरीर की नमी और पाचन को आसान बनाने में मदद करता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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