राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच पुरानी राजनीतिक खींचतान एक बार फिर सतह पर आती दिखाई दे रही है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया "भूल जाओ और माफ कर दो" वाले बयान के बाद सचिन पायलट ने भी बिना नाम लिए जवाब दिया है, जिससे साफ है कि प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से दोनों खेमों में फिर टकराव शुरू हो गया है. लेकिन अब यह टकराव केवल प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहेगी. बल्कि इसके साइड इफेक्ट पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर दिख सकती है और इसका खामियाजा पार्टी को निश्चित रूप से भुगतना हो सकता है.
करौली में आयोजित किसान सम्मेलन में सचिन पायलट ने कहा कि वे 25 साल से राजनीति में हैं और बहुत चालें देख चुके हैं. उन्होंने कहा कि उनका किसी से कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है, लेकिन सच्चाई के साथ खड़ा होना जरूरी है. पायलट ने कहा कि संघर्ष जरूरी है, संयम जरूरी है, संतोष जरूरी है और सम्मान देना भी जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के लोग क्या व्यवहार करेंगे, यह उनके हाथ में नहीं है.
राहुल ने राजस्थान में एकजुटता का दिया था संदेश
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस नेतृत्व राजस्थान में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में राहुल गांधी के पुष्कर दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के कामकाज की खुलकर सराहना की थी. उन्होंने दोनों नेताओं की कार्यशैली को संगठन के लिए सकारात्मक बताया था.
निकाय और पंचायत चुनाव पर होगा असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गहलोत और पायलट के बीच बयानबाजी का असर आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों पर पड़ सकता है. प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. ऐसे में यदि दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती है तो इसका असर संगठनात्मक एकजुटता पर दिखाई दे सकता है.
दोनों निभा रहे राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी
इसका प्रभाव केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रह सकता. सचिन पायलट राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और कई राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं. वहीं अशोक गहलोत पार्टी के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. ऐसे में दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी असहज स्थिति पैदा कर सकती है.
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है, लेकिन गहलोत और पायलट के बीच फिर से बढ़ती तल्खी ने राजस्थान की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है और आने वाले चुनावों से पहले संगठन को कितना एकजुट रख पाता है.
यह भी पढ़ेंः राजस्थान की राजनीति में आखिर क्यों चर्चा में है '25 सितंबर' की घटना? जानिए उस दिन क्या हुआ था
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं