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खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न... सिर्फ प्रदूषण का असर है या इंफेक्शन? पल्मोनोलॉजिस्ट ने बताया फर्क

बढ़ते प्रदूषण के बीच अगर गले में खराश, खांसी जैसी परेशानी होने लगे, तो लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं कि ये इंफेक्शन का असर है या प्रदूषण का. अगर आपको भी किसी तरह का कंफ्यूजन रहता है, तो यहां डॉक्टर से इसके बीच के फर्क को समझते हैं-

खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न... सिर्फ प्रदूषण का असर है या इंफेक्शन? पल्मोनोलॉजिस्ट ने बताया फर्क
Pollution vs Infection: प्रदूषण और इंफेक्शन के असर को कैसे समझें?

Air Pollution Symptoms vs Infection: दिल्ली-एनसीआर समेत कई देश के कई शहरों में बढ़ते प्रदूषण के बीच लोगों को काफी ज्यादा खांसी, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो रही हैं. ऐसे में कई लोग समझ नहीं पाते कि उनकी परेशानी खराब हवा की वजह से है या फिर किसी वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से. सीके बिड़ला हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी एंड क्रिटिकल केयर डॉ. कुलदीप कुमार ग्रोवर का कहना है कि कुछ संकेतों की मदद से दोनों स्थितियों के बीच के अंतर को समझा जा सकता है. हालांकि, सही कारण जानने के लिए आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. यहां समझते हैं दोनों के बीच के फर्क को-

प्रदूषण फेफड़ों को कैसे पहुंचाता है नुकसान?

डॉ. ग्रोवर का कहना है कि प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण फेफड़ों तक पहुंचकर रेस्पिरेटरी सिस्टम में जलन और सूजन पैदा कर सकते हैं. इसकी वजह से खांसी, छींक, गले में खराश, आंखों में जलन और सीने में जकड़न महसूस हो सकती है. अक्सर ये लक्षण बाहर निकलने, ट्रैफिक वाले रास्तों से गुजरने या निर्माण स्थलों के आसपास रहने के बाद ज्यादा बढ़ जाते हैं. जिन लोगों को पहले से अस्थमा या COPD जैसी फेफड़ों की बीमारी है, उनमें परेशानी और गंभीर हो सकती है.

किन लक्षणों से समझें कि इन्फेक्शन हो सकता है?

अगर खांसी के साथ बुखार, शरीर दर्द, थकान, नाक बहना या बंद होना जैसी समस्याएं भी हों तो यह रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण अक्सर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद विकसित होता है. कई बार शुरुआत सिर्फ गले में खराश या खांसी से होती है और बाद में दूसरे लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

सिर्फ कफ का रंग देखकर न करें फैसला

बहुत से लोग मानते हैं कि पीला या हरा कफ दिखने का मतलब बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. डॉ. ग्रोवर के अनुसार, केवल बलगम के रंग के आधार पर वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण में अंतर करना संभव नहीं है. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है.

एक साथ भी हो सकते हैं प्रदूषण और इन्फेक्शन

डॉक्टर कहते हैं कि समस्या ये है कि कई बार दोनों कारणों से मरीजों में इस तरह की स्थिति पैदा होती है. उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को वायरल संक्रमण से रिकवर करने के दौरान प्रदूषित हवा में रहने से खांसी ज्यादा बढ़ सकती है. दूसरी ओर प्रदूषण से परेशान व्यक्ति को बाद में वायरल इन्फेक्शन भी हो सकता है.

अगर खांसी खराब एयर क्वालिटी वाले दिनों में ज्यादा बढ़ती है, तो वजह प्रदूषण हो सकती है. वहीं, बुखार, शरीर दर्द और किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क का इतिहास संक्रमण की ओर इशारा कर सकता है.

कैसे करें बचाव?

डॉक्टर बताते हैं कि प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर की जाना कम करें. हमेशा एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर N95 मास्क का इस्तेमाल करें. पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और खुद से दवा लेने से बचना भी जरूरी है.

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