75 वर्ष की उम्र में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया. नाना पाटेकर हमेशा फिट और एक्टिव लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते थे. उन्हें अक्सर खुद खाना बनाते, सादा जीवन जीते, खेल में काम करते हुए देखा जाता था. ऐसे में हार्ट से जुड़ी समस्या के कारण उनके निधन की खबर ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या सिर्फ फिट दिखना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना ही हेल्दी हार्ट की गारंटी देता है? इसपर डॉक्टर का जवाब है, नहीं. कई बार व्यक्ति बाहर से पूरी तरह हेल्दी नजर आता है, लेकिन शरीर के अंदर ऐसी समस्याएं पनप रही होती हैं, जो लंबे समय तक कोई संकेत नहीं देतीं और अचानक गंभीर रूप ले सकती हैं.
इस विषय को लेकर दिल्ली स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अमित प्रकाश सिंह का कहना है कि हेल्दी दिखना और एक्चुअल में हार्ट का हेल्दी होना दोनों अलग-अलग बातें हैं. वजन सामान्य होना, घर का खाना खाना या नियमित एक्सरसाइज करना हार्ट डिजीज से सुरक्षित रहने की पूरी तरह से गारंटी नहीं देता है.
वहीं, यथार्थ हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. धीरज झांब का भी यही कहना है कि किसी व्यक्ति की शारीरिक सक्रियता निश्चित रूप से अच्छी सेहत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह अकेला पैमाना नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी की समस्या और कुछ प्रकार के कैंसर लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकते हैं।
खेल में काम करना अच्छी सेहत का पॉजिटिव संकेत, लेकिन नहीं देता गारंटी
डॉ. कहते हैं, “किसी व्यक्ति का रोजाना काम करना, खेत में सक्रिय रहना या घर का खाना खाना उसकी अच्छी सेहत के सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन इनसे यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर के अंदर कोई बीमारी विकसित नहीं हो रही है। उम्र बढ़ने के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच इसलिए जरूरी हो जाती है, क्योंकि कई बीमारियां शुरुआती चरण में कोई खास लक्षण नहीं देतीं।”
खेत में काम करने से हर बीमारी का खतरा खत्म नहीं होता
डॉ. झांब कहते हैं कि खेती या शारीरिक श्रम करने वाले लोगों को अक्सर लगता है कि उनकी दिनचर्या ही पर्याप्त व्यायाम है। वास्तव में शारीरिक गतिविधि हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इससे उम्र, आनुवंशिकता, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और अन्य जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होते।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति रोज कई घंटे खेत में काम कर सकता है, लेकिन उसका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ हो सकता है। इसी तरह कोलेस्ट्रॉल बढ़ने या रक्त में शुगर का स्तर असामान्य होने की जानकारी भी लंबे समय तक नहीं मिल सकती।
सिर्फ मोटापा ही नहीं, ये खतरे भी हैं जिम्मेदार
नाना पाटेकर बिल्कुल फिट दिखते थे, फिर भी उन्हें हार्ट डिजीज का सामना करना पड़ा. इस विषय पर डॉक्टर कहते हैं कि हम में से कई लोग ये मान लेते हैं कि मोटापा, जंक फूड, धूम्रपान और स्थिर जीवनशैली ही हार्ट डिजीज का मुख्य कारण है. हालांकि, इसके पीछे कई और कारण भी हो सकते हैं.
डॉ. अमित प्रकाश सिंह बताते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, शरीर में लगातार रहने वाली सूजन और फैमिली हिस्ट्री जैसे कारक लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के मौजूद रह सकते हैं. एक व्यक्ति देखने में पूरी तरह फिट हो सकता है, लेकिन उसके शरीर में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा हो सकता है या ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ हो सकता है. यही स्थितियां धीरे-धीरे आर्टरी को नुकसान पहुंचाकर हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ाती हैं.
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ जाता है हार्ट डिजीज का खतरा
डॉ. अमित बताते हैं कि उम्र भी हार्ट डिजीज का एक बड़ा रिस्क फैक्टर होता है. चाहे कोई व्यक्ति नियमित एक्सरसाइज करता हो और बैलेंस डाइट ही क्यों ना ले रहा हो, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता जाता है. इसलिए पूरी तरह सिर्फ फिटनेस पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है.
घर का खाना खाना अच्छी बात है, लेकिन काफी नहीं
डॉक्टर का कहना है कि घर का खाना आमतौर पर कम नमक, कम चीनी और कम अनहेल्दी फैट वाला होता है. इससे हार्ट हेल्थ को फायदे हो सकते हैं. लेकिन सिर्फ घर का खाना खाने से हार्ट की बीमारी का खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं होता है.
अगर किसी व्यक्ति में जेनेटिग रिस्क, लंबे समय से हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्याएं हैं, तो सिर्फ अच्छी डाइट उन्हें पूरी तरह सुरक्षित नहीं बना सकती. यही वजह है कि नियमित हेल्थ चेकअप उतना ही जरूरी है जितना हेल्टी लाइफस्टाइल अपनाना.
सबसे बड़ी समस्या, नियमित जांच को नजरअंदाज करना
स्वस्थ महसूस करने वाले लोग अक्सर डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब कोई परेशानी शुरू हो जाती है। यही देरी कई बार समस्या को गंभीर बना सकती है। डॉक्टर कहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, किडनी और लिवर फंक्शन जैसी जांच डॉक्टर की सलाह के अनुसार करानी चाहिए। परिवार में किसी बीमारी का इतिहास हो तो संबंधित स्क्रीनिंग पर भी डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए।
डॉ. झांब कहते हैं, “हमारे पास ऐसे कई मरीज आते हैं जो खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते थे क्योंकि वे रोज काम करते थे और उन्हें कोई बड़ी शिकायत नहीं थी। लेकिन जांच के बाद हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हृदय संबंधी जोखिम सामने आया। इसलिए ‘मुझे कोई तकलीफ नहीं है' और ‘मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं' इन दोनों बातों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।”
नाना पाटेकर का मामला हमें क्या सिखाता है?
इस मामले से हर किसी को ये समझना चाहिए कि हार्ट की बीमारी कई बार साइलेंट होती है. अगर कोई व्यक्ति नॉर्मल लाइफ जी रहा है, नियमित रूप से एक्सरसाइज कर रहा है और बाहरी तरह से पूरी तरह फिट है, तो जरूरी नहीं है कि वो अंदर से भी पूरी तरह फिट हो. इसलिए समय-समय पर बढ़ती उम्र के साथ जांच जरूरी हो जाता है. ताकि समय पर शरीर के अंदर पनप रही समस्याओं का पता चल सके और समय पर इलाज शुरू किया जा सके.
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