- नाना पाटेकर या कैप्टन स्मित मच्छार? विद्याविहार ब्रिज पर BJP-UBT में टकराव
- नाना पाटेकर सेतु का बोर्ड लगा, BJP ने उठाया कैप्टन स्मित मच्छार का नाम
- उद्घाटन से पहले ही श्रेय और नाम की राजनीति का विवाद
मुंबई में लंबे समय से प्रतीक्षित विद्याविहार ईस्ट-वेस्ट ब्रिज अभी यातायात के लिए खुला भी नहीं है, लेकिन उसके नामकरण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. एक ओर उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना पुल का नाम प्रसिद्ध अभिनेता पद्मश्री नाना पाटेकर के नाम पर रखने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक पराग शाह ने इसे कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है. दोनों दलों की अलग-अलग मांगों के चलते उद्घाटन से पहले ही ब्रिज का नाम राजनीतिक बहस और श्रेय की लड़ाई का विषय बन गया है. NDTV के लिए देवेंद्र कोल्हटकर की रिपोर्ट.
उद्घाटन से पहले लगाया गया नाना पाटेकर सेतु का बोर्ड
विवाद उस समय और बढ़ गया जब शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं ने ब्रिज पर उद्घाटन से पहले ही 'पद्मश्री नाना पाटेकर सेतु' नाम का बोर्ड लगा दिया. पार्टी का कहना है कि नाना पाटेकर केवल फिल्म अभिनेता ही नहीं बल्कि सामाजिक कार्यों और किसानों के हित में किए गए कार्यों के लिए भी व्यापक पहचान रखते हैं. इसी मांग को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई की मेयर रितु तावड़े से मुलाकात कर औपचारिक प्रस्ताव भी सौंपा है.

शुरू होने से पहले ही नाना पाटेकर के नाम का लगा होर्डिंग
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भाजपा की पसंद कैप्टन स्मित मच्छार
दूसरी ओर भाजपा विधायक पराग शाह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर पुल का नाम कैप्टन स्मित मच्छार के नाम पर रखने की मांग की है. कैप्टन स्मित मच्छार हाल ही में उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में कथित अपहरण जैसी गंभीर स्थिति को नियंत्रित कर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की थी. इस घटना के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी. भाजपा का मानना है कि ऐसे साहसिक कार्य करने वाले व्यक्ति के सम्मान में पुल का नाम रखा जाना चाहिए.
श्रेय लेने की राजनीति का आरोप
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सदन के नेता गणेश खंकर ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद पैदा कर रही है. उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर देश के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में से एक हैं, लेकिन उनके सम्मान में किसी बड़े थिएटर या सांस्कृतिक परिसर का नाम रखा जाना अधिक उपयुक्त होगा, बजाय किसी पुल के.
लंबे इंतजार के बाद तैयार हुआ पुल
विद्याविहार रेलवे स्टेशन के पास बना यह बहुप्रतीक्षित पुल करीब 650 मीटर लंबा और दो लेन वाला है. यह पुल पूर्वी हिस्से में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को पश्चिमी हिस्से में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से जोड़ता है. बीएमसी के अनुसार पुल का लगभग 100 मीटर हिस्सा रेलवे ट्रैक के ऊपर बनाया गया है. इसके अलावा पूर्वी तरफ 220 मीटर और पश्चिमी तरफ 330 मीटर लंबे एप्रोच रोड भी तैयार किए गए हैं.
स्टेशन सुविधाओं का भी किया गया विकास
परियोजना के तहत केवल पुल का निर्माण ही नहीं किया गया, बल्कि यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन फुटपाथों से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग भी विकसित किए गए हैं. साथ ही टिकट बुकिंग कार्यालय, स्टेशन मास्टर कार्यालय और सीढ़ियों का पुनर्निर्माण भी परियोजना का हिस्सा रहा है.
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