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नींद पूरी नहीं लेते? चुपचाप बढ़ सकता है अल्जाइमर का जोखिम, डॉक्टर ने किया अलर्ट

क्या कम नींद लेने से अल्जाइमर का खतरा बढ़ सकता है? जानिए गहरी नींद, ग्लाइम्फेटिक सिस्टम और दिमाग की सफाई के बीच क्या है संबंध, डॉक्टर की सलाह के साथ.

नींद पूरी नहीं लेते? चुपचाप बढ़ सकता है अल्जाइमर का जोखिम, डॉक्टर ने किया अलर्ट
जब ठीक से नींद नही आती तो दिमाग पर क्या असर पड़ता है? जानिये इसका अल्जाइमर से क्या नाता है
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आजकल रात को देर तक जागना एक आम सी आदत बन चुकी है. कभी ऑफिस का काम, कभी जिंदगी का तनाव तो कभी सोने से पहले घंटों मोबाइल स्क्रोल करना. हम में से ज्यादातर लोग नींद को सबसे आखिर में रखते हैं. एक ताजा रिसर्च बताती है कि करीब 61% शहरी भारतीय 7 घंटे से भी कम सो पा रहे हैं. एक-दो दिन नींद कम मिले तो बात समझ आती है, इंसान थोड़ा थकावट और भारीपन महसूस करता है. लेकिन अगर यह रोज का किस्सा बन जाए, तो यह सिर्फ सुस्ती की बात नहीं रहती, बल्कि सीधे आपके दिमाग की सेहत पर हमला बोलने लगता है.

Alzheimer's Day : क्या आप भी रात में देर तक मोबाइल चलाते हैं या अक्सर 6-7 घंटे से कम सोते हैं? डॉक्टरों का कहना है कि लगातार खराब नींद सिर्फ थकान नहीं बढ़ाती, बल्कि दिमाग की सफाई प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है. यही वजह है कि नींद और अल्जाइमर के बीच के संबंध पर वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं.

गहरी नींद दिमाग की सफाई के लिए क्यों जरूरी है?

दिनभर हमारा दिमाग लगातार काम करता है. दुनिया भर की बातें सोचना, फैसले लेना, यादें बनाना. इस पूरी भागदौड़ में दिमाग के अंदर एक तरह का बायोलॉजिकल कचरा (मेटाबोलिक वेस्ट) जमा होने लगता है. इनमें बीटा-एमाइलॉयड और टाऊ नाम के दो प्रोटीन प्रमुख हैं. जब ये कचरा दिमाग में जरूरत से ज्यादा जमने लगता है, तो यही आगे चलकर अल्जाइमर जैसी खतरनाक बीमारी की वजह बनता है.

अब सवाल उठता है कि ये कचरा बाहर कैसे निकलता है? यहीं पर गहरी नींद का रोल शुरू होता है. जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो दिमाग का अपना एक नेचुरल सफाई सिस्टम चालू हो जाता है. मेडिकल भाषा में इसे ग्लाइम्फेटिक सिस्टम कहते हैं. इस दौरान एक खास लिक्विड पूरे दिमाग से होकर गुजरता है और दिनभर के जमे हुए कचरे को धोकर बाहर निकाल देता है. अगर आप सोएंगे ही नहीं, तो दिमाग को अपने आप को साफ करने का मोका ही नहीं मिलेगा.

हाल ही में लगभग 15,000 लोगों पर हुई स्टडीज में भी यह बात सामने आई है कि जो लोग सालों से अधूरी या खराब नींद ले रहे हैं, उनके दिमाग में ये हानिकारक प्रोटीन ज्यादा तेजी से जमा होने लगते हैं.

नींद की परेशानी कब खतरे की घंटी बन जाती है?

हर खराब रात का मतलब यह नहीं कि आपको अल्जाइमर हो जाएगा. असली चिंता तब शुरू होती है जब नींद की खराबी रोज का नियम बन जाए.

अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या लंबे समय से है, तो सचेत हो जाएं:

  • बिस्तर पर घंटों करवटें बदलते रहना और नींद न आना.
  • रात में बार-बार आँख खुलना और फिर नींद उचट जाना.
  • सुबह उठने के बाद भी ऐसा लगना कि बिल्कुल सोए ही नहीं.
  • दिन के समय जरूरत से ज्यादा आलस और झपकियां आना.
  • बहुत तेज खर्राटे लेना या सोते समय कुछ पलों के लिए सांस का अटक जाना.

तेज खर्राटे और सांस रुकने की समस्या को स्लीप एपनिया कहा जाता है. इसमें सोते वक्त दिमाग तक सही मात्रा में आक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जो आगे चलकर बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती है. खासकर घर के बुजुर्गों में अगर नींद का पैटर्न अचानक बदलने लगे, तो उसे सिर्फ "बुढ़ापे की बात" कहकर टालना बहुत बड़ी गलती हो सकती है.

तो क्या अच्छी नींद से अल्जाइमर टल सकता है?

यह दावा तो कोई डॉक्टर नहीं करेगा कि सिर्फ 8 घंटे सोने से अल्जाइमर कभी नहीं होगा. लेकिन यह बात सौ टका सच है कि लगातार नींद खराब रहने से दिमाग समय से पहले बूढा होने लगता है.

अपने दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए आज से ही कुछ छोटी आदतें जरूर अपनाएं:

  1. सोने और जागने का एक पक्का समय तय करें, छुट्टी वाले दिन भी.
  2. रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और टीवी स्क्रीन बंद कर दें.
  3. दिन में थोड़ी देर धूप में जरूर बैठें और हल्की फुल्की कसरत करें.
  4. अगर सालों से नींद की समसया बनी हुई है, तो चुपचाप सहने के बजाय किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाएं.

शरीर को तो आराम बाद में मिलता है, नींद सबसे पहले दिमाग की खुराक और उसकी रिपेयरिंग का वक्त होती है. इसलिए इसे हल्के में लेना छोड़िये और अपनी नींद का पूरा धियान रखिये.

लेखक के बारे में 

डॉ. गौरव शर्मा 14 वर्षों से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ न्यूरोसर्जन हैं. वे मस्तिष्क और रीढ़ (स्पाइन) से जुड़ी जटिल बीमारियों के उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं और आधुनिक न्यूरोसर्जिकल तकनीकों के साथ मरीज-केंद्रित देखभाल के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने मैक्स हॉस्पिटल और एस.एम.एस. हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दी हैं और न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में व्यापक क्लिनिकल अनुभव रखते हैं.

FAQs-

Q. क्या कम नींद लेने से अल्जाइमर का खतरा बढ़ सकता है?

कुछ रिसर्च बताती हैं कि लंबे समय तक खराब या अधूरी नींद लेने से दिमाग में ऐसे प्रोटीन जमा हो सकते हैं जो अल्जाइमर से जुड़े पाए गए हैं. हालांकि सिर्फ कम नींद को अल्जाइमर का सीधा कारण नहीं माना जाता.

Q. दिमाग खुद को कब साफ करता है?

गहरी नींद के दौरान दिमाग का ग्लाइम्फेटिक सिस्टम सक्रिय होता है, जो मेटाबॉलिक वेस्ट को बाहर निकालने में मदद करता है.

Q. अच्छी नींद कितने घंटे की होनी चाहिए?

अधिकांश वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नियमित और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद फायदेमंद मानी जाती है.

Q. स्लीप एपनिया क्या है?

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.

Q. किन लोगों को नींद की समस्या पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

जिन्हें लंबे समय से अनिद्रा, बार-बार नींद खुलना, तेज खर्राटे या दिनभर अत्यधिक नींद आने जैसी परेशानी हो रही हो.

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