घुटनों, उंगलियों, कलाई या टखनों में लगातार दर्द हो रहा है? अगर हां, तो इसे सिर्फ बढ़ती उम्र या अर्थराइटिस का संकेत मानकर नजरअंदाज न करें. जोड़ों का दर्द कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है और सही वजह जाने बिना इलाज शुरू करना मुश्किल हो सकता है. मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड में चीफ ऑफ लैब, नॉर्थ इंडिया ऑपरेशंस डॉ. गीता चोपड़ा का कहना है कि बार-बार होने वाले जोड़ों के दर्द में ब्लड टेस्ट अहम भूमिका निभाते हैं और बीमारी की सही पहचान में मदद करते हैं.
अर्थराइटिस एक नहीं, कई बीमारियों का है नाम
डॉ. गीता चोपड़ा बताती हैं कि अर्थराइटिस कोई एक बीमारी नहीं है. ये एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल जोड़ों में दर्द और सूजन से जुड़ी कई स्थितियों के लिए किया जाता है. ये समस्या शरीर के किसी एक जोड़ या कई जोड़ों को प्रभावित कर सकती है. महिलाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत ज्यादा देखी जाती है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकती है.
अर्थराइटिस होने पर आमतौर पर जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और मूवमेंट में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कुछ लोगों में ये लक्षण लंबे समय तक एक जैसे बने रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में समय के साथ समस्या गंभीर हो सकती है.
जोड़ों के दर्द के पीछे हो सकते हैं कई कारण
हर जोड़ों का दर्द अर्थराइटिस नहीं होता. इसके पीछे कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, जैसे-
- गाउट (यूरिक एसिड बढ़ना)
- बैक्टीरियल या फंगल संक्रमण
- ऑटोइम्यून आर्थराइटिस
- एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस
- जुवेनाइल अर्थराइटिस
डॉ. चोपड़ा का कहना है कि ऑटोइम्यून अर्थराइटिस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ जोड़ों पर ही हमला करने लगती है, जिससे सूजन और दर्द बढ़ सकता है.
कब करवाने पड़ सकते हैं ब्लड टेस्ट?
अगर दर्द लंबे समय से बना हुआ है या इसके साथ सूजन और अकड़न भी है, तो डॉक्टर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं. इनमें एक्स-रे, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों के साथ कई ब्लड टेस्ट शामिल हो सकते हैं.
कौन से टेस्ट बताते हैं असली कारण?
डॉ. गीता चोपड़ा का कहना है कि अगर आपको जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है, तो कुछ टेस्ट आप नियमित रूप से करवा सकते हैं, जिससे आपको दर्द का असली कारण पता चल सकता है, ये हैं कुछ निम्न टेस्ट-
- ईएसआर (ESR)
- सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP)
- कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC)
- यूरिक एसिड टेस्ट
- रूमेटोइड फैक्टर (RA Factor)
- एंटी-सीसीपी टेस्ट
- एएनए टेस्ट
- एचएलए- B27 टेस्ट
इन टेस्टों की मदद से डॉक्टर ये समझ पाते हैं कि दर्द के पीछे यूरिक एसिड, संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारी या कोई दूसरी वजह जिम्मेदार है.
समय पर जांच है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि जोड़ों के दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सही समय पर जांच और पहचान होने से इलाज आसान हो सकता है और जोड़ों को होने वाले स्थायी नुकसान से भी बचा जा सकता है. नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी जोड़ों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है.
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