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बिना सर्जरी घुटनों के दर्द से राहत! अर्थराइटिस के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है एंटी एजिंग इंजेक्शन

Anti-aging Injection For Knee Pain: हाल के सालों में पारंपरिक इलाज जैसे दवाइयां, फिजियोथेरेपी और जॉइंट रिप्लेसमेंट के अलावा नई वैकल्पिक और रिसजेनरेटिव (Regenerative) तकनीकें उभरकर आई हैं. जो घुटनों के दर्द और अर्थराइटिस के लिए वरदान साबित हो सकती हैं.

बिना सर्जरी घुटनों के दर्द से राहत! अर्थराइटिस के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है एंटी एजिंग इंजेक्शन
Arthritis Relief Without Surgery: क्या एंटी एजिंग इंजेक्शन्स से जोड़ों के दर्द में राहत संभव है?

Non-surgical Arthritis Treatment: घुटनों का दर्द और ऑस्टियोअर्थराइइटिस उम्र के साथ बहुत सामान्य समस्या बन जाती है. पुराने दर्द, चलने-फिरने की तकलीफ और रोजमर्रा के कामों में बाधा कई लोगों की जिंदगी प्रभावित कर देती है. हाल के सालों में पारंपरिक इलाज जैसे दवाइयां, फिजियोथेरेपी और जॉइंट रिप्लेसमेंट के अलावा नई वैकल्पिक और रिसजेनरेटिव (Regenerative) तकनीकें उभरकर आई हैं. इन्हीं में से एक समूह को लोग आम बोलचाल में एंटी-एजिंग इजेक्शन भी कहने लगे हैं, जो वास्तव में उम्र-जुड़ी कोशिकाओं/टिशू की मरम्मत या सूजन को कम करने की कोशिश करते हैं, जैसे PRP (Platelet-Rich Plasma), BMAC या स्टेम-सेल बेस्ड थेरेपी और अन्य रिजनरेटिव इन्जेक्शन्स. मायो क्लिनिक में इन विधियों पर क्लिनिकल अनुभव और स्टडी बढ़ रही हैं और शुरुआती नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं.

क्या एंटी एजिंग इंजेक्शन्स से जोड़ों के दर्द में राहत संभव है?

मायो क्लिनिक के अनुभव में PRP इंजेक्शन लेने वाले कई मरीजों ने 6 से 12 महीने तक दर्द में उल्लेखनीय कमी महसूस की है. यह खासतौर से हल्के-मध्यम ग्रेड के ऑस्टियोआर्थ्राइटिस वाले सक्रिय रोगियों में अच्छा नतीजा दे सकता है. साथ ही मायो क्लिनिक में स्टेम-सेल और अन्य रिजनरेटिव विधियों पर कई क्लिनिकल ट्रायल भी चल रहे हैं ताकि सुरक्षा और प्रभाव की स्पष्ट समझ बन सके.

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कैसे काम करते हैं ये इंजेक्शन?

1. PRP (Platelet-Rich Plasma): यह मरीज के ही खून से बनाया जाता है, जिसमें प्लेटलेट्स (growth factors) ज्यादा होते हैं. इन्हें घुटने में इंजेक्ट करने से सूजन कम होती है, सेल रिपेयर प्रोसेस चलती है और दर्द-सिग्नल घटते हैं.

2. स्टेम-सेल या एडिपोस (फैट)-बेस्ड थेरेपी: मरीज की खुद के फैट या बोन-मैरो से कोशिकाएं लेकर प्रयोगशाला में तैयार कर घुटने में डाली जाती हैं. उद्देश्य है घुटने के टिशू को पुनर्जीवित करना और सूजन घटाना, पर यह क्षेत्र अभी अध्ययन और कंट्रोल ट्रायल का विषय है.

3. सैनोलिटिक्स और एंटी-सेनेंसेंट थेरेपी (क्वचित शोध): बुढ़ापे से जुड़ी सेनेसेंट कोशिकाओं (जो सूजन और टिश्यू नुकसान बढ़ाती हैं) को टारगेट करने वाली दवाओं या विधियों पर भी रिसर्च चल रही है. प्रयोगशाला और प्रारंभिक अध्ययनों ने संकेत दिए हैं कि इससे ऑर्थराइटिस की प्रगति धीमी हो सकती है, पर मानव पर व्यापक प्रमाण अभी बन रहे हैं.

किसे फायदा हो सकता है और किन हालात में सावधानी चाहिए:

  • हल्के-मध्यम आर्थराइटिस वाले और एक्टिव लाइफस्टाइल रखने वाले लोग अक्सर बेहतर प्रतिक्रिया दिखाते हैं.
  • गंभीर और एडवांस जॉइंट-डैमेज में जॉइंट रिप्लेसमेंट ही बेहतर विकल्प हो सकता है.
  • इन इंजेक्शन्स की प्रभावशीलता, मात्रा और अवधि व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करती है और कुछ लोगों को केवल अस्थायी (6-12 महीने) राहत मिलती है.

इन बातों का रखें ध्यान:

  • एंटी-एजिंग इजेक्शन एक बड़ा यानि छतरी शब्द है, असल में कई अलग-अलग तकनीकें हैं (PRP, BMAC, स्टेम-सेल, आदि).
  • मायो क्लिनिक जैसे संस्थान पर चल रहे क्लिनिकल ट्रायल यह दिखा रहे हैं कि कुछ मरीजों में दर्द और कार्यक्षमता में सुधार संभव है, पर बड़े और लंबे-समय के अध्ययन अभी भी जरूरी हैं.
  • कोई भी इलाज अपनाने से पहले प्रमाणित ऑर्थोपीडिक या रिजेनरेटिव स्पेशलिस्ट से सलाह, रोग की गंभीरता की जांच और संभावित जोखिम और लाभ की चर्चा जरूरी है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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