हीमोग्लोबिन की कमी की वजह से एनीमिया का खतरा रहता है. आप इस बात से काफी अच्छी तरह से वाकिफ होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल जरूरत से ज्यादा बढ़ जाना भी कई तरह की हेल्थ संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है. आमतौर पर लोग ब्लड रिपोर्ट में हाई हीमोग्लोबिन देखकर खुश हो जाते हैं. लेकिन असल में ज्यादा हीमोग्लोबिन होना शरीर में छिपी बीमारी का संकेत हो सकता है. दिल्ली स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के कंसल्टेंट क्लिनिकल हेमेटोलॉजी डॉ. अनामिका बकलीवाल का कहना है कि हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है, इसलिए इसका संतुलित स्तर जरूरी है. अगर आपकी रिपोर्ट में लगातार हीमोग्लोबिन बढ़ा हुआ आ रहा है, तो इसके पीछे की वजह को समझना बेहद जरूरी है. यहां विस्तार से जानते हैं इस बारे में-
शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ने का क्या मतलब है?
डॉ. बकलीवाल का कहना है कि हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है. हालांकि, पर्याप्त हीमोग्लोबिन जरूरी है, लेकिन इसका काफी ज्यादा बढ़ जाना कभी-कभी इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर जरूरत से ज्यादा रेड ब्लड सेल्स बना रहा है. इस स्थिति को एरिथ्रोसाइटोसिस या पॉलीसाइथीमिया कहा जाता है.
शरीर में हीमोग्लोबिन किन कारणों से ज्यादा बढ़ जाता है?
डिहाइड्रेशन है बड़ी वजह
डॉक्टर का कहना गै कि जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो खून का तरल हिस्सा कम हो जाता है. इससे हीमोग्लोबिन का स्तर रिपोर्ट में अधिक दिखाई दे सकता है. इसे रिलेटिव पॉलीसाइथीमिया कहा जाता है. इस स्थिति में रेड ब्लड सेल्स की संख्या वास्तव में नहीं बढ़ती.
सेकेंडरी एरिथ्रोसाइटोसिस
जब शरीर को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो किडनी बोन मैरो को ज्यादा लाल रक्त कोशिकाएं बनाने का संकेत देती है. ये समस्या धूम्रपान करने वालों, लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों, स्लीप एपनिया के मरीजों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वालों में देखी जा सकती है.
क्या वायु प्रदूषण भी हो सकता है कारण हीमोग्लोबिन का स्तर ज्यादा?
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में वायु प्रदूषण लंग्स और हार्ट हेल्थ पर नकारात्मक असर डालता है. एक्सपर्ट का कहना है कि इसके ब्लड सेल्स पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी अध्ययन कर रहे हैं. हालांकि, सिर्फ प्रदूषण को हाई हीमोग्लोबिन का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इसके पीछे कई अन्य कारक भी हो सकते हैं.
पॉलीसाइथीमिया वेरा क्या है?
पॉलीसाइथीमिया वेरा बोन मैरो से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें शरीर जरूरत न होने पर भी काफी रेड ब्लड सेल्स बनाता रहता है. ये अक्सर JAK2 जीन में बदलाव से जुड़ी होती है. इसके लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना और गर्म पानी से नहाने के बाद खुजली शामिल हो सकते हैं. हालांकि, कुछ मरीजों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते.
हाई हीमोग्लोबिन क्यों हो सकता है खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार, पॉलीसाइथीमिया वेरा जैसी स्थितियों में खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है. इससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है. हालांकि हर व्यक्ति में हाई हीमोग्लोबिन का खतरा समान नहीं होता.
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