हरीश राणा केस में फैसले से पहले पूरी कोर्ट भरी हुई थी. हर किसी की नजर इस संवेदनशील मामले पर टिकी थी, जिसमें इंसानी जिंदगी, दर्द और कानून तीनों एक साथ खड़े थे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पैसिव यूथिनिसिया मानने से साफ इनकार किया है. कोर्ट ने साफ किया कि यूथिनिसिया का मतलब एक्टिव प्रक्रिया होता है और ऐसी किसी भी एक्टिविटी पर पूरे देश में मनाही है. हालांकि, अदालत ने इस केस को एक अलग नजरिए से देखा और विथहोल्डिंग और विथड्रॉइंग की प्रक्रिया का जिक्र किया. हरीश राणा के केस में इसे विथड्रॉइंग माना गया है. इसका मतलब है कि उनके शरीर में जो भी मेडिकल ट्यूब्स लगी हैं, उन्हें हटाया जाएगा.
क्या है मामला और कोर्ट का रुख
हरीश राणा लंबे समय से गंभीर हालत में हैं और उनका परिवार काफी वक्त से उन्हें इस स्थिति से मुक्ति दिलाने की मांग कर रहा था. कोर्ट ने इस पहलू को बेहद संवेदनशीलता के साथ समझा.
फैसला देने से पहले जज ने खुद हरीश राणा के परिवार से मुलाकात की. डॉक्टरों से भी विस्तार से बातचीत की गई और हर पहलू को समझने के बाद ही यह निर्णय लिया गया. फैसला सुनाते वक्त जज साहब काफी भावुक हो गए थे.
शरीर में लगी ट्यूब्स हटाने का निर्देश:
हरीश के शरीर में 3 तरह की ट्यूब्स लगी हैं:
- गले में बलगम निकालने के लिए ट्यूब
- पेट में फीडिंग के लिए PEG ट्यूब
- यूरिन के लिए एक मोटी ट्यूब
कोर्ट के निर्देश के मुताबिक इन्हीं ट्यूब्स को हटाया जाएगा.

पूरे देश के लिए नई गाइडलाइन
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक केस पर फैसला नहीं दिया, बल्कि देशभर के लिए एक गाइडलाइन भी तय की है. कोर्ट ने सभी जिलों के CMO को निर्देश दिया है कि वे प्राइमरी और सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड का गठन करें. अगर कोई ऐसा मरीज आता है जो लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, तो यह मेडिकल बोर्ड उसकी स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करेगा. इसके बाद उस रिपोर्ट पर जुडिशियल मजिस्ट्रेट संज्ञान लेंगे और फिर सरकार इस पर अंतिम फैसला करेगी.
क्या होगा इसका असर
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीज और उनके परिवार को सीधे कोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पहले मेडिकल बोर्ड के स्तर पर ही स्थिति साफ हो जाएगी, जिससे प्रक्रिया आसान और व्यवस्थित बनेगी.
कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक महीने के अंदर सभी जिलों के चीफ मेडिकल ऑफिसर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करें. चूंकि फैसला 11 मार्च को दिया गया था, इसलिए 11 अप्रैल से पहले यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी. इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सरकार ने इस पर क्या कार्रवाई की है.
संवेदनशीलता और सख्ती दोनों
इस केस में AIIMS को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें. वहीं, परिवार लगातार संपर्क में है, हालांकि केस की संवेदनशीलता को देखते हुए अपडेट सीमित रखे गए हैं.
आसान नहीं है इच्छा मृत्यु
हरीश राणा के केस के बावजूद यह साफ हो गया है कि देश में इच्छा मृत्यु (यूथिनिसिया) लेना अभी भी आसान नहीं है. इसके लिए कड़ी कानूनी और मेडिकल प्रक्रिया से गुजरना होगा. फिलहाल, हरीश राणा का परिवार स्थिर है और उनकी स्थिति को लेकर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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