आज देशभर में केमिस्टों की हड़ताल ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई जगहों पर मेडिकल स्टोर बंद रहने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जरूरी दवाइयां मिल पाएंगी या नहीं. यह हड़ताल ऑनलाइन दवा बिक्री यानी ई-फार्मेसी के खिलाफ बुलाई गई है. ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) का कहना है कि बिना सख्त नियमों के ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है. वहीं केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अस्पतालों की फार्मेसी, जन औषधि केंद्र और कई बड़ी मेडिकल चेन खुली रहेंगी. ऐसे में यह मुद्दा सिर्फ हड़ताल तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में दवाइयों के बदलते कारोबार और मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है.
क्यों बुलानी पड़ी देशव्यापी हड़ताल?
AIOCD के अनुसार देशभर में तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन दवा कंपनियां बिना पर्याप्त निगरानी के काम कर रही हैं. संगठन का दावा है कि पारंपरिक मेडिकल स्टोरों को दवा बेचने के लिए कई नियमों का पालन करना पड़ता है. उन्हें डॉक्टर की पर्ची जांचनी होती है, रिकॉर्ड रखना होता है और कई नियंत्रित दवाओं के लिए अलग रजिस्टर भी बनाए जाते हैं.
लेकिन केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए भी दवाइयां खरीदी जा सकती हैं. खासकर एंटीबायोटिक्स, नशीली दवाइयां और गर्भपात से जुड़ी दवाओं को लेकर चिंता जताई गई है.
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ऑनलाइन दवा डिलीवरी को लेकर क्या हैं चिंताएं?
केमिस्ट संगठनों ने मरीजों की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं. उनका कहना है कि ऑनलाइन दवा सप्लाई में नकली दवाओं का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा पुरानी पर्चियों का बार-बार इस्तेमाल भी गलत दवा सेवन को बढ़ावा दे सकता है.
एक बड़ी चिंता तापमान में रखने वाली दवाओं को लेकर भी है. इंसुलिन, वैक्सीन और कुछ विशेष इंजेक्शन जैसी दवाओं को ठंडे तापमान में रखना जरूरी होता है. अगर डिलीवरी के दौरान सही तापमान न मिले तो दवा का असर कम हो सकता है.
इसके अलावा छोटे शहरों और गांवों के मेडिकल स्टोर मालिकों का कहना है कि बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियों द्वारा भारी छूट देने से उनकी दुकानें प्रभावित हो रही हैं.
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क्या मरीजों को दवाइयों की कमी होगी?
सरकार और स्वास्थ्य विभागों ने कहा है कि जरूरी दवाओं की सप्लाई जारी रहेगी. अस्पतालों की फार्मेसी, जन औषधि केंद्र, AMRIT फार्मेसी और कई बड़ी मेडिकल चेन खुली रहने वाली हैं.
कई राज्यों ने इमरजेंसी हेल्पलाइन भी शुरू की हैं ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत सहायता मिल सके. तमिलनाडु जैसे राज्यों में हजारों मेडिकल स्टोर खुले रहने की उम्मीद जताई गई है.
हालांकि जिन इलाकों में ज्यादातर निजी मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे, वहां रोजाना दवाइयां लेने वाले मरीजों को थोड़ी परेशानी हो सकती है. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट और दूसरी गंभीर बीमारियों के मरीज अपनी जरूरी दवाइयां पहले से खरीदकर रखें.
ई-फार्मेसी पर क्यों बढ़ रही बहस?
कोरोना महामारी के बाद ऑनलाइन दवा खरीदने का चलन तेजी से बढ़ा. घर बैठे दवा मिलना, कम कीमत और आसान सुविधा के कारण लोग ई-फार्मेसी की तरफ आकर्षित हुए.
विशेषज्ञ मानते हैं कि बुजुर्गों, दिव्यांग लोगों और दूरदराज इलाकों में रहने वालों के लिए ऑनलाइन दवा सेवा काफी मददगार साबित हो सकती है. लेकिन इसके साथ सख्त नियम और निगरानी भी जरूरी है ताकि मरीजों की सुरक्षा से समझौता न हो.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी नकली और घटिया दवाओं को वैश्विक खतरा मान चुका है. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना निगरानी के एंटीबायोटिक्स की ऑनलाइन बिक्री भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकती है.
देशभर की यह केमिस्ट हड़ताल सिर्फ दुकानों के बंद होने का मामला नहीं है, बल्कि भारत में दवा कारोबार के बदलते स्वरूप की बड़ी बहस है. एक तरफ पारंपरिक मेडिकल स्टोर सुरक्षा और नियमों की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सुविधा और सस्ती कीमतों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.
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