Central Government Increased Monitoring On Pregabalin Drug: दर्द और नसों (Nerves) की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली प्रेगाबालिन (Pregabalin) दवा अब आसानी से नहीं मिल पाएगी. केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए दवा को शेड्यूल एच (Schedule H) से हटाकर कड़े नियंत्रण वाली श्रेणी शेड्यूल एच 1 ( Schedule H1) में डाल दिया है. इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी है.
प्रेगाबालिन दवा आमतौर पर नसों के दर्द (न्यूरोपैथिक पेन), मिर्गी, चिंता संबंधी समस्याओं और कुछ अन्य बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. मंत्रालय के अनुसार, हाल के वर्षों में कई राज्यों से इस दवा का गलत इस्तेमाल हो रहा था, साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के अधिक मात्रा में सेवन के मामले बढ़ गए थे. इसी को देखते हुए सरकार ने दवा की बिक्री और उपयोग पर निगरानी कड़ी करने का फैसला लिया है.

बिना डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन नहीं मिलेगी दवा
शेड्यूल H1 में शामिल होने के बाद अब प्रेगाबालिन केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकेगी. साथ ही मेडिकल स्टोर्स को इसकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और बिना पर्चे के दवा बेचने पर कार्रवाई होगी. इसके अलावा दवा के पैकेट पर लाल रंग की चेतावनी भी लिखी होती है, ताकि लोग बिना सलाह के इसका इस्तेमाल न करें. जानकारी के अनुसार, शेड्यूल एच 1 में पहले से कई एंटीबायोटिक (Antibiotic) और संवेदनशील दवाएं शामिल हैं, जिनकी बिक्री पर विशेष निगरानी रखी जाती है.
यह भी पढ़ें- Liquid Gold: सोने के नैनोपार्टिकल्स बनेंगे कैंसर का नया हथियार, जापानी रिसर्चर्स ने की नई खोज
सरकार ने क्यों लिया फैसला?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह फैसला युवाओं में दवा के गलत इस्तेमाल और नशे के तौर पर उपयोग की बढ़ती शिकायतों और दवा के अवैध स्टॉक और गैरकानूनी बिक्री के मामले सामने के बाद लिया गया है. इस कदम का उद्देश्य दवा के दुरुपयोग को रोकना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेगाबालिन का लंबे समय तक या गलत तरीके से सेवन करने पर इसकी लत लगने, चक्कर, सुस्ती और मानसिक प्रभाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
अधिसूचना के अनुसार, ड्रग्स रूल्स, 1945 की शेड्यूल H1 में क्रम संख्या 50 के बाद “51. Pregabalin” जोड़ा गया है. केंद्र सरकार का कहना है कि इस फैसले से देशभर में दवा की बिक्री और वितरण प्रणाली अधिक नियंत्रित हो जाएगी.
Watch Video: फेफड़ों का कैंसर कितने तरह का होता है? लंग कैंसर के प्रकार
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं