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सिर्फ बुखार ही नहीं, H1N1 वायरस दिमाग पर भी कर सकता है असर! डॉक्टर से जानें लक्षण और बचाव

H1N1 वायरस को आमतौर पर फ्लू और बुखार से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह दिमाग और नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है.

सिर्फ बुखार ही नहीं, H1N1 वायरस दिमाग पर भी कर सकता है असर! डॉक्टर से जानें लक्षण और बचाव
स्वाइन फ्लू कैसे दिमाग पर डालता है असर.
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इंफ्लुएंजा A (H1N1), जिसे हम आमतौर पर 'स्वाइन फ्लू' के रूप में जानते हैं, ये एक सांस संबंधी बीमारी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई मामलों में यह वायरस आपके मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम को भी इफेक्ट कर सकता है? ​अक्सर बुखार, डिहाइड्रेशन या वायरल इंफेक्शन के कारण मरीज को सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और थकान महसूस होती है, जिसे सामान्य माना जाता है. लेकिन, कुछ ऐसे न्यूरोलॉजिकल लक्षण हैं जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर यदि वे अचानक उभरें या बहुत गंभीर हों.

किन लक्षणों को न करें अनदेखा-

​यदि कोई मरीज इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करे, तो उसे तुरंत मेडिकल सहायता की आवश्यकता है-

  • ​तेज सिरदर्द.
  • ​लगातार उल्टी आना.
  • ​भ्रम की स्थिति 
  • ​अधिक नींद आना या होश खोना.
  • ​बोलने में कठिनाई 
  • कमजोरी महसूस होना.
  • ​दौरे पड़ना 

​एक्सपर्ट के अनुसार, गंभीर मामलों में इंफ्लुएंजा से दिमाग में सूजन आ सकती है, जिसे 'एन्सेफलाइटिस' (Encephalitis) या 'एन्सेफलोपैथी' कहा जाता है. बच्चों में फ्लू के दौरान दौरे पड़ने की संभावना अधिक होती है. हालांकि हर दौरा सीधे दिमाग पर वायरस के हमले का संकेत नहीं होता, लेकिन फिर भी इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

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​कब है परेशानी की बात- 

​बहुत ही कम मामलों में, H1N1 'गुइलेन-बैरे सिंड्रोम' (Guillain-Barré Syndrome - GBS) जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. यह एक ऐसी ऑटो-इम्यून स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम नर्वस सिस्टम पर हमला कर देता है. इससे मांसपेशियों में धीरे-धीरे कमजोरी आने लगती है, जो बढ़कर लकवे (Paralysis) में बदल सकती है. यदि यह कमजोरी शरीर के चारों अंगों तक फैल जाए या सांस लेने वाली मांसपेशियों को प्रभावित करे, तो यह जानलेवा हो सकता है.

​कब जाएं डॉक्टर के पास?

​आम आदमी के लिए यह समझना जरूरी है कि कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए-

  1. ​सिरदर्द- यदि बुखार कम होने के साथ सिरदर्द ठीक नहीं हो रहा है, बल्कि और गंभीर हो रहा है, तो सतर्क हो जाएं.
  2. व्यवहार- यदि मरीज को जगाने में मुश्किल हो रही हो या वह असामान्य व्यवहार कर रहा है.
  3. ​कमजोरी- यदि हाथों-पैरों में नई कमजोरी महसूस हो, चलने में दिक्कत हो या शरीर का संतुलन बिगड़ रहा हो.

​रिकवरी के बाद भी रहें सतर्क-

​अक्सर हम सोचते हैं कि बुखार और सांस की तकलीफ कम होते ही खतरा टल गया. लेकिन न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं संक्रमण के दौरान या ठीक होने के बाद भी दिखाई दे सकती हैं. इसलिए, रिकवरी के दौरान भी अपने लक्षणों पर बारीकी से नजर रखें.

हालांकि H1N1 के अधिकांश मामले बिना किसी परेशानी के ठीक हो जाते हैं, लेकिन समय रहते संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी है. यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी नए या बिगड़ते हुए न्यूरोलॉजिकल लक्षण महसूस हों, तो इंतजार न करें. तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें. ​आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है.

डॉ. ऋतु झा फरीदाबाद के सेक्टर-8 में न्यूरोलॉजी विभाग की डायरेक्टर और एचओडी हैं. उनके पास 21 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वह स्ट्रोक, मिर्गी (Epilepsy), सिरदर्द और नसों से जुड़े विकारों के इलाज में विशेषज्ञ हैं.

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