मानसून और बदलते मौसम के बीच देश के कई हिस्सों में सांस और फेफड़ों से जुड़े इन्फेक्शन तेजी से पैर पसार रहे हैं. आमतौर पर 'स्वाइन फ्लू' (Swine Flu) के नाम से जाने जाने वाले H1N1 इन्फ्लूएंजा के मामलों में राजधानी दिल्ली में बड़ा उछाल देखा गया है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि बेंगलुरु में भी मौसमी इन्फ्लूएंजा, जिसमें H1N1 और H3N2 वायरस शामिल हैं, के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत तक दिल्ली में H1N1 के लगभग 1,344 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या महज 229 थी. बेंगलुरु के अस्पतालों में भी ओपीडी के दौरान फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की तादाद काफी ज्यादा देखी जा रही है.
क्या फ्लू सिर्फ एक हफ्ते की मामूली बीमारी है?
ज्यादातर स्वस्थ लोगों में मौसमी फ्लू एक या दो हफ्ते में अपने आप ठीक हो जाता है. लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में फ्लू के कारण निमोनिया और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बहुत ज्यादा रहता है.
केसों के बढ़ते ग्राफ को देखकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस समय H1N1 की वैक्सीन लगवाना जरूरी है.
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क्या अलग से मिलती है H1N1 वैक्सीन?
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत (नई दिल्ली) के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड डॉ. आर. एस. मिश्रा बताते हैं कि आजकल H1N1 के लिए अलग से कोई टीका नहीं आता है.
डॉ. मिश्रा के अनुसार-
भारत का राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और डब्ल्यूएचओ हर साल फैलने वाले वायरस के पैटर्न को देखकर इस वैक्सीन के फॉर्मूले को समय-समय पर अपडेट करते रहते हैं.
किसे सबसे पहले लगवानी चाहिए फ्लू वैक्सीन?
वैसे तो 6 महीने से ऊपर का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति फ्लू का टीका लगवा सकता है, लेकिन कुछ खास वर्ग के लोगों को इसे प्राथमिकता पर लगवाना चाहिए:
- गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women): गर्भावस्था के दौरान इम्युनिटी कमजोर होती है, जिससे फ्लू का असर बच्चे और मां दोनों पर पड़ सकता है.
- 6 महीने से 5 साल तक के छोटे बच्चे: बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता.
- 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग: उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है.
- क्रॉनिक बीमारियों के मरीज: डायबिटीज, दिल की बीमारी, दमा/अस्थमा, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारी वाले लोग.
- हेल्थकेयर वर्कर्स और केयरगिवर्स: डॉक्टर, नर्स और अस्पतालों में काम करने वाले स्टाफ जो रोज मरीजों के संपर्क में आते हैं.
- मोटापे से ग्रस्त लोग: जिनका वजन सामान्य से बहुत अधिक है.
वैक्सीन लगवाने का सबसे सही समय क्या है?
एक्सपर्ट्स की मानें तो फ्लू का मौसम शुरू होने या मामले बढ़ने से पहले ही टीका लगवा लेना सबसे बेहतर होता है.
डॉ. मिश्रा बताते हैं, "टीका लगने के बाद हमारे शरीर को वायरस के खिलाफ पूरी इम्युनिटी तैयार करने में लगभग 2 हफ्ते का समय लगता है. इसलिए जब मामले बढ़ने की उम्मीद हो, उससे कम से कम 15 दिन पहले वैक्सीन लगवाना सबसे असरदार माना जाता है."
हालांकि, अगर दिल्ली-एनसीआर या बेंगलुरु में मामले पहले से बढ़ रहे हैं, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि अब देर हो चुकी है. अगर आपने इस साल फ्लू शॉट नहीं लिया है, तो अभी भी डॉक्टर से परामर्श करके इसे लगवाया जा सकता है.
क्या फ्लू वैक्सीन लगवाने से स्वाइन फ्लू हो सकता है?
यह लोगों के बीच बहुत बड़ा भ्रम है कि टीका लगवाने से बीमारी हो जाएगी. सच यह है कि फ्लू वैक्सीन में निष्क्रिय (Inactivated) या मृत वायरस के अंश होते हैं, जिनसे किसी को इन्फेक्शन नहीं हो सकता.
टीका लगने के बाद बांह पर हल्का दर्द, लाली या सूजन आ सकती है. कुछ लोगों को एक-दो दिन के लिए हल्का बुखार, थकान या बदन दर्द महसूस हो सकता है, जो अपने आप ठीक हो जाता है.
यह वैक्सीन 100% इन्फेक्शन रोकने की गारंटी नहीं देती, लेकिन अगर टीका लगा हो और उसके बाद भी इन्फेक्शन हो जाए, तो बीमारी गंभीर रूप नहीं लेती और अस्पताल में भर्ती होने या जान जाने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है.
हर साल क्यों लगवानी पड़ती है नई वैक्सीन?
बहुत से लोग सोचते हैं कि एक बार टीका लगवा लिया तो जिंदगी भर काम करेगा. फ्लू के मामले में ऐसा नहीं है, इसके दो मुख्य कारण हैं:
वायरस का रूप बदलना (Mutation): फ्लू वायरस बहुत तेजी से अपने जेनेटिक ढांचे को बदलता रहता है. इसलिए डब्ल्यूएचओ हर साल दुनिया भर में एक्टिव वायरस की निगरानी करके वैक्सीन का नया फॉर्मूला तैयार करता है.
इम्युनिटी का कम होना: वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा समय के साथ शरीर में धीरे-धीरे कम होने लगती है. एक साल बाद इसका असर बहुत घट जाता है, इसलिए हर साल नया फ्लू शॉट लेना जरूरी है.
वैक्सीन के अलावा इन सावधानियों का रखें ध्यान
सिर्फ वैक्सीन पर निर्भर रहने के बजाय रोजाना की जिंदगी में साफ-सफाई और जरूरी एहतियात बरतना भी उतना ही जरूरी है:
- अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं या सैनिटाइजर लगाएं.
- खांसते या छींकते वक्त मुंह और नाक पर रुमाल या टिशू का इस्तेमाल करें.
- अगर सर्दी, खांसी या बुखार के लक्षण हों तो ऑफिस या भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और घर पर आराम करें.
- भीड़भाड़ वाले बंद कमरों या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मास्क जरूर पहनें.
- घर और दफ्तर में ताजी हवा का वेंटिलेशन बनाए रखें.
एक्सपर्ट की राय
दिल्ली-एनसीआर और दक्षिण भारत में H1N1 के बढ़ते मामले यह याद दिलाते हैं कि स्वाइन फ्लू को केवल सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. हाई-रिस्क ग्रुप वाले लोगों को तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करके मौसमी इन्फ्लूएंजा का टीका लगवा लेना चाहिए. जैसा कि डॉ. मिश्रा कहते हैं, "सालाना फ्लू शॉट एक छोटा सा कदम है, जो आपको और आपके परिवार को एक बड़ी बीमारी से सुरक्षित रख सकता है."
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