Precautions For H1N1 Flu : मौसम बदलने के साथ फ्लू के मामले बढ़ना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इसका खतरा एक जैसा नहीं होता. खासकर अगर पहले से कोई बीमारी चल रही हो, तो सामान्य सा लगने वाला फ्लू भी शरीर पर ज्यादा भारी पड़ सकता है. इन दिनों देश के कुछ हिस्सों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने के बाद इसे लेकर सावधानी की जरूरत फिर बढ़ गई है.
दिल्ली में इस सीजन में 13 अगस्त तक स्वाइन फ्लू के तकरीबन 1,344 मामले सामने आए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 229 थी. नागपुर में 2026 में H1N1 (स्वाइन फ्लू) से पहली मौत भी दर्ज हुई है. ऐसे में हार्ट, डायबिटीज और फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को फ्लू के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
H1N1 Flu से किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है?
हर व्यक्ति में H1N1 (स्वाइन फ्लू) का असर एक जैसा नहीं होता. ज्यादातर स्वस्थ लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ समूहों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम बढ़ा सकता है.
- बुजुर्ग (65 वर्ष या उससे अधिक) : उम्र बढ़ने के साथ इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है. इसलिए H1N1 संक्रमण बुजुर्गों में निमोनिया और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है.
- छोटे बच्चे : खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में फ्लू जल्दी गंभीर हो सकता है. 2 साल से कम उम्र के बच्चों में जोखिम और अधिक माना जाता है.
- गर्भवती महिलाएं : गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिससे फ्लू से गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
- हार्ट डिजीज वाले मरीज : हृदय रोग से पीड़ित लोगों में H1N1 संक्रमण दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. फ्लू के बाद हार्ट अटैक और अन्य कार्डियक जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है.
- डायबिटीज के मरीज : फ्लू के कारण ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो सकता है. बीमारी के दौरान शुगर को नियंत्रित रखना मुश्किल हो जाता है, जिससे जटिलताएं बढ़ सकती हैं.
- अस्थमा और COPD वाले लोग : H1N1 संक्रमण अस्थमा के अटैक को ट्रिगर कर सकता है और COPD के लक्षणों को गंभीर बना सकता है. ऐसे लोगों को सांस से जुड़े लक्षणों पर विशेष नजर रखनी चाहिए.
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग : कैंसर के मरीज, अंग प्रत्यारोपण (Transplant) करा चुके लोग, या इम्यूनिटी दबाने वाली दवाएं लेने वाले व्यक्तियों में संक्रमण गंभीर हो सकता है.
- किडनी, लिवर या अन्य पुरानी बीमारियों वाले मरीज : जिन लोगों को पहले से गंभीर क्रॉनिक बीमारी है, उनमें H1N1 से जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है.
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि फ्लू के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल सलाह लें:
- सांस लेने में तकलीफ
- सीने में दर्द या दबाव
- ऑक्सीजन लेवल कम होना
- लगातार चक्कर आना
- भ्रम (Confusion)
- बार-बार उल्टी होना
- लक्षणों का तेजी से बिगड़ना
H1N1 हर किसी के लिए समान रूप से खतरनाक नहीं होता, लेकिन बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, हार्ट डिजीज, डायबिटीज, अस्थमा और COPD मरीजों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है.
हार्ट डिजीज वाले मरीजों पर H1N1 का क्या असर पड़ सकता है?
फ्लू के दौरान बुखार, शरीर में सूजन और दिल की धड़कन बढ़ने जैसी स्थितियां शरीर पर एक्सट्रा प्रेशर डाल सकती हैं. अगर संक्रमण के कारण ऑक्सीजन का स्तर भी गिरने लगे, तो हार्ट पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है. रिसर्च में फ्लू के बाद हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने की बात भी सामने आई है. इसलिए लगातार बुखार, सांस फूलना, सीने में परेशानी, असामान्य थकान या दिल की धड़कन तेज लगने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
डायबिटीज मरीजों में H1N1 क्यों बन सकता है गंभीर समस्या?
फ्लू होने पर शरीर का स्ट्रेस बढ़ता है, जिससे ब्लड शुगर ऊपर जा सकती है. दूसरी तरफ बुखार या मितली की वजह से खाना-पीना कम हो सकता है. ऐसे में डायबिटीज वाले व्यक्ति के लिए शुगर को संभालना मुश्किल हो सकता है. इसलिए बीमारी के दौरान ब्लड ग्लूकोज पर ज्यादा नजर रखना और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है.
अगर बहुत ज्यादा या बहुत कम शुगर, लगातार उल्टी, खाना-पीना मुश्किल होना या ज्यादा नींद आने जैसी स्थिति हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
अस्थमा और COPD वाले लोगों को किन लक्षणों पर सतर्क होना चाहिए?
H1N1 जैसे फ्लू से सांस की बीमारी पहले से मौजूद होने पर परेशानी बढ़ सकती है. संक्रमण अस्थमा का अटैक ट्रिगर कर सकता है और COPD (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के लक्षणों को भी ज्यादा खराब कर सकता है.
गंभीर स्थिति में वायरल निमोनिया या उसके बाद बैक्टीरियल निमोनिया का खतरा भी हो सकता है. सांस ज्यादा फूलना, घरघराहट बढ़ना, ऑक्सीजन कम होना या सांस लेने में इतनी परेशानी होना कि बोलना मुश्किल लगे, गंभीर संकेत हो सकते हैं.
Swine Flu से बचाव के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
ऐसे लोगों के लिए फ्लू से बचाव खास मायने रखता है. हर साल लगने वाली इन्फ्लुएंजा वैक्सीन गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है. इसके अलावा बीमार लोगों के बहुत करीब जाने से बचना, भीड़ या कम हवा वाली जगहों पर जरूरत पड़ने पर मास्क लगाना, कमरे में हवा का अच्छा वेंटिलेशन रखना और हाथों को नियमित रूप से साफ करना मददगार हो सकता है.
Flu Vaccine और Antiviral Treatment कितना मददगार है?
जिन लोगों में गंभीर फ्लू का खतरा ज्यादा है, उनमें डॉक्टर जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवा शुरू करने की सलाह दे सकते हैं. इसका फायदा बीमारी के शुरुआती दौर में ज्यादा होता है, लेकिन ऐसी दवा खुद से लेना सही नहीं है. डॉक्टर लक्षण, बीमारी का इतिहास और स्थिति देखकर फैसला करते हैं. फ्लू को हर बार सिर्फ सामान्य वायरल फीवर मानकर टाल देना सही नहीं है.
खासकर हार्ट डिजीज, डायबिटीज, अस्थमा या COPD वाले लोगों को लक्षण ज्यादा गंभीर, लंबे समय तक बने रहने या बिगड़ने पर जल्दी मेडिकल सलाह लेनी चाहिए.
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