मौसम करवट लेते ही हल्की छींकें, सिर में भारीपन और गले की खिचखिच अक्सर हमें परेशान करने लगती है, ज्यादातर लोग इसे साधारण वायरल मानकर टाल देते हैं, लेकिन कभी-कभी यह मामूली सी दिखने वाली बीमारी इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू का रूप भी हो सकती है. हालांकि मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों में यह अपने आप ठीक हो जाता है, फिर भी इसे पूरी तरह हलके में लेना भारी पड़ सकता है.
शरीर में दिखने वाले शुरुआती संकेत
- हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सजग करते हुए बताया है कि इस फ्लू की चपेट में आने पर शरीर कई तरह के इशारे देता है, तेज बुखार के साथ सूखी या बलगम वाली खांसी होना इसका मुख्य लक्षण है.
- इसके अलावा गले में खराश, लगातार नाक बहना, पूरे बदन में ऐंठन और भयंकर सुस्ती महसूस हो सकती है.
- कुछ लोगों के पेट में गड़बड़ी, जैसे उल्टी या दस्त की शिकायत भी देखने को मिलती है.
- यह जरूरी नहीं कि हर किसी में सारे लक्षण एक साथ दिखें, लेकिन अगर शरीर बेहाल लग रहा हो तो अलर्ट हो जाना चाहिए.

शुरुआती दिनों में कैसे संभालें खुद को?
- जब भी लगे कि इन्फेक्शन हावी हो रहा है, सबसे पहले शरीर को पूरा रेस्ट दें. भागदौड़ छोड़कर आराम करने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को वायरस से लड़ने की ताकत मिलती है.
- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए दिनभर गुनगुना पानी, नारियल पानी या घर का बना ताजा सूप पीते रहें.
- ऐसी डाइट लें जो आसानी से पच जाए.
दूसरों को सुरक्षित रखने और खुद बचने के उपाय
- यह सांस से जुड़ी बीमारी है, जो हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलती है. इसलिए थोड़ी सावधानी बरतकर इसे रोका जा सकता है.
- बाहर से आने के बाद या कुछ भी खाने से पहले हाथों को अच्छे से धोएं.
- जब भी छींक या खांसी आए, रुमाल या कोहनी से मुंह ढकना न भूलें.
- अगर आपकी तबीयत खराब लग रही है, तो कुछ दिन घर पर ही रुकें ताकि परिवार या सहकर्मियों तक यह न पहुंचे.
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
आमतौर पर हफ्ता भर बीतते-बीतते स्थिति सुधरने लगती है, लेकिन अगर 5 से 6 दिन बाद भी बुखार न उतरे, सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाए या सांस फूलने लगे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें. छोटे बच्चों, बुजुर्गों, डायबिटीज और सांस के मरीजों में लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए, क्योंकि इनमें परेशानी बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है.
Swine Flu Alert: H1N1 कितना खतरनाक? डॉक्टर ने बताए शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके
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