COVID-19 and Heart Risks: कोविड वैक्सीन को लगभग पांच साल हो चुके हैं, इस दौरान, दुनिया भर में करोड़ों लोगों को वैक्सीन दी गई और इससे गंभीर संक्रमण और मौतों को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई गई, लेकिन हाल के वर्षों में, युवाओं में अचानक हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों को लेकर एक सवाल बार-बार उठ रहा है. क्या इसका संबंध कोविड वैक्सीन से है? इस मुद्दे पर अलग-अलग डॉक्टरों से बात की गई.

डॉ. आशीष अग्रवाल (आकाश हेल्थकेयर) कहते हैं,
आकाश हेल्थकेयर के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड (यूनिट-1) डॉ. आशीष अग्रवाल कहते हैं, “कोविड वैक्सीन को लेकर युवाओं में हार्ट अटैक का डर काफी हद तक गलतफहमी पर आधारित है. अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक डेटा में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि वैक्सीन सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बनती है. हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे असली कारण हमारी बदलती लाइफस्टाइल है, जैसे फिजिकल एक्टिविटी की कमी, जंक फूड, स्मोकिंग और बढ़ता तनाव. कुछ दुर्लभ मामलों में वैक्सीन के बाद हल्की मायोकार्डाइटिस देखी गई है, लेकिन यह अधिकतर अस्थायी होती है और इलाज से ठीक हो जाती है. इसके मुकाबले कोविड संक्रमण खुद दिल के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हुआ है. इसलिए लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए और अपने दिल की सेहत पर ध्यान देना चाहिए, जैसे नियमित जांच, सही डाइट और एक्सरसाइज.”
डॉ. विनीत मल्होत्रा: कोविड संक्रमण से दिल का खतरा ज्यादा
SCM Healthcare के यूरोलॉजी, सेक्सोलॉजी और इनफर्टिलिटी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. विनीत मल्होत्रा कहते हैं, “कोविड वैक्सीन को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना बहुत जरूरी है. वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य गंभीर संक्रमण और उससे होने वाली जटिलताओं से बचाव करना है, और इसमें यह काफी हद तक सफल भी रही है। जहां तक हार्ट से जुड़ी समस्याओं का सवाल है, तो रिसर्च बताती है कि कोविड संक्रमण के बाद दिल से जुड़ी जटिलताओं का खतरा वैक्सीन की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है. वैक्सीन के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स बेहद दुर्लभ होते हैं और ज्यादातर मामलों में हल्के और अस्थायी होते हैं. युवाओं को यह समझना चाहिए कि उनकी जीवनशैली, जैसे नींद, डाइट, स्ट्रेस और एक्सरसाइज-दिल की सेहत में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाती है. सही जानकारी और जागरूकता ही इस तरह की चिंताओं को दूर कर सकती है.”

डॉ. प्रवीण गुप्ता: डर गलतफहमियों से पैदा हुआ है
डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमैन, मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS), गुरुग्राम के अनुसार, कोविड वैक्सीन और हार्ट अटैक को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, वह ज्यादातर गलतफहमियों पर आधारित है. न्यूरोलॉजी के नजरिए से देखें तो शरीर और दिमाग दोनों पर कोविड संक्रमण का असर वैक्सीन से कहीं ज्यादा गंभीर रहा है. कई मरीजों में कोविड के बाद स्ट्रोक, न्यूरोलॉजिकल कमजोरी और लंबे समय तक थकान जैसे लक्षण देखे गए हैं. जहां तक वैक्सीन का सवाल है, इसके बाद गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं बेहद दुर्लभ हैं. युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को केवल वैक्सीन से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है. इसमें लाइफस्टाइल, तनाव, नींद की कमी और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं ज्यादा बड़ी भूमिका निभाती हैं. इसलिए जरूरी है कि लोग अफवाहों से दूर रहें और अपने समग्र स्वास्थ्य-खासतौर पर दिमाग और दिल का संतुलन बनाए रखें."
क्या सोशल मीडिया डर बढ़ा रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अधूरी जानकारी और अफवाहों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, अब तक के वैज्ञानिक अध्ययन यह संकेत देते हैं कि वैक्सीन और हार्ट अटैक के बीच कोई सीधा और व्यापक संबंध स्थापित नहीं हुआ है.
युवाओं को क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं को अपनी जीवनशैली पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है:
- नियमित व्यायाम
- संतुलित आहार
- पर्याप्त नींद
- तनाव का प्रबंधन
इसके अलावा, सीने में दर्द, सांस फूलना या असामान्य थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
कोविड वैक्सीन और युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के बीच कोई स्पष्ट संबंध सामने नहीं आया है. हां, कुछ दुर्लभ मामलों में दिल की सूजन देखी गई है, लेकिन वह सीमित और अस्थायी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर घबराने के बजाय लोगों को सही जानकारी पर भरोसा करना चाहिए और अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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