- तृणमूल कांग्रेस में बागी विधायक और सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़कर पार्टी के असली होने का दावा
- बागी गुट चुनाव आयोग में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पेश करने की तैयारी कर रहा
- टीएमसी में टूट का मामला शिवसेना, एनसीपी और लोजपा के समान कानूनी आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस टूट रही है, अब इसमें कोई संदेह नहीं रह गया है. टीएमसी के बागी विधायक और सांसद पिछले कुछ दिनों से उस रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत वो ममता बनर्जी का साथ छोड़ें और उनसे पार्टी का नाम भी न छिने. इसके लिए टीएमसी के बागी सांसदों का पिछले कई दिनों से बीजेपी के नेताओं के साथ बैठकों का दौर चल रहा है. बताया जा रहा है कि टीएमसी के रणनीतिकारों ने तृणमूल कांग्रेस संसदीय और विधायक दल में टूट के लिए फॉर्मूला क्या होगा, ये तय कर लिया है.
ये होगा TMC में टूट का फॉर्मूला
टीएमसी के रणनीतिकारों ने तृणमूल कांग्रेस संसदीय और विधायक दल में टूट के लिए फॉर्मूला तैयार कर लिया है. इसके तहत बागी गुट यह दावा करेगा कि 'असली तृणमूल कांग्रेस' वही हैं. इसी आधार पर विधानसभा और लोकसभा अध्यक्ष से असली पार्टी के रूप में मान्यता देने की बात कही जाएगी. चुनाव आयोग में भी इसी तरह अर्जी देकर टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर दावा ठोका जाएगा.
उथल-पुथल और इस्तीफे से जूझ रही TMC
लोकसभा
- 2024 चुनाव में सांसद जीते- 29
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने से पहले एमपी - 28 (1 सांसद की मृत्यु हो गई थी)
- टीएमसी से अलग होने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखने वाले सांसद-19
- ममता की TMC के साथ बचे हुए सांसद - 9
राज्य सभा
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने से पहले TMC के राज्यसभा सांसद - 13
- इस्तीफा देने वाले सांसद - 3
- ममता की TMC के साथ बचे हुए सांसद - 10
राज्यसभा सांसद, जिन्होंने इस्तीफा दिया
- सुखेंदु शेखर रे
- सुष्मिता देव
- प्रकाश चिक बड़ाईक
शिवसेना, NCP और LJP की तरह ही...
टीएमसी में टूट कानूनी आधार पर की जाएगी. यह कहा जाएगा कि टीएमसी अपने संविधान के हिसाब से नहीं चल रही थी. कई फैसले पार्टी संविधान के खिलाफ किए गए. पत्र लिख कर बताया जाएगा कि कैसे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी मनमाने ढंग से फैसले कर रहे थे. सूत्रों के अनुसार, टीएमसी में टूट का मामला शिवसेना, एनसीपी और लोजपा की तरह ही आगे बढ़ाया जाएगा. इन तीनों ही मामलों में चुनाव आयोग ने टूट कर अलग हुए नेताओं के पक्ष में ही फैसला दिया था.
क्या कहना है दलबदल कानून?
भारत में दलबदल कानून के तहत दो तिहाई सदस्यों का अलग होकर दूसरे दल में विलय जरूरी होता है. लेकिन 'हम ही असली पार्टी' वाले फॉर्मूले में विलय की जरूरत ही नहीं पड़ती है. दरअसल, इसमें विलय की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि अलग गुट को ही मान्यता मिलने की संभावना होती है. इसमें बागी गुट यह दावा करता है-'वही असली पार्टी है.' हालांकि, आम आदमीं पार्टी के राज्यसभा सांसदों के मामले में ऐसा नहीं हुआ था. इसमें 10 में से सात सांसद यानी दो तिहाई अलग होकर बीजेपी में शामिल हो गए थे. इस तरह उनकी सदस्यता बची रही. ऐसे में अलग गुट व असली पार्टी का दावा करने और उसे मान्यता मिलने पर भी टीएमसी के बागी सांसदों की सदस्यता बची रहेगी. हां, टीएमसी पर अधिकार को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चल सकती है.
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 19 बागी टीएमसी सांसदों की लिस्ट
- काकोली घोष (बारासात)
- जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)
- खलीलुर्रहमान (जंगीपुर)
- यूसुफ पठान (बेरहामपुर)
- अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद)
- पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
- बापी हलधर (मथुरापुर)
- सयोनी घोष (जादवपुर)
- माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
- मिताली बाग (आरामबाग)
- दीपक अधिकारी (घाटल)
- कालीपद सोरेन (झारग्राम)
- जून मालिया (मेदिनीपुर)
- अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा)
- डॉ शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व)
- शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
- असित कुमार मल (बोलपुर)
- शताब्दी रॉय (बीरभूम)
- रचना बनर्जी (हुगली)
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बता दें कि टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 बागी हो गए हैं और उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुन लिया है. ममता बनर्जी के साथ अब सिर्फ 22 विधायक बचे हैं. वहीं लोकसभा की बात करें, तो कुल 28 विधायकों में से 19 के अलग गुट बनाने की बात सामने आई है. इस गुट का नेतृत्व काकोली घोष कर रही हैं, जिन्होंने लोकसभा स्पीकर को बागी सांसदों से जुड़ा पत्र थमा दिया है. ऐसे में दल बदल और 'हम ही असली पार्टी' वाले फॉर्मूले, दोनों में ही तरीके से बागी टीएमसी विधायक और सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़ सकते हैं.
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