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उत्तराखंड चारधाम यात्रा: 55 दिन में 161 मौतें... हार्ट अटैक से गई सबसे ज्यादा जानें, 31 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में 55 दिन में 161 यात्रियों की मौत हो गई. इनमें सबसे अधिक मौतें हार्ट अटैक से हुई हैं, इसके अलावा ऑक्सीजन की कमी से भी यात्रियों की जान गई है. केदारनाथ धाम में मौत का आंकड़ा सबसे अधिक 78 है, जो चारों धाम में सबसे ज्यादा है.

उत्तराखंड चारधाम यात्रा: 55 दिन में 161 मौतें... हार्ट अटैक से गई सबसे ज्यादा जानें, 31 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
Uttarakhand: चारधाम यात्रा में यात्रियों का दिल दे रहा धोखा, इससे हुई सबसे ज्यादा मौतें.

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू हुए 55 दिन हो गए हैं, इस बीच 31 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने चारों धाम के दर्शन किए हैं. सबसे अधिक यात्री केदारनाथ पहुंचे, इसके बाद बद्रीनाथ गंगोत्री और यमुनोत्री में तीर्थ यात्री ने दर्शन किए. चारधाम यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन चिंता की बात यह है कि 55 दिनों की यात्रा में 161 यात्रियों की मौत भी हो चुकी है. इनमें 160 यात्रियों की मौत स्वास्थ्य खराब होने और 1 यात्री की मौत प्राकृतिक आपदा की वजह से हुई है. 

चारधाम यात्रा के दौरान कहां हुई कितनी मौतें?

चारधाम यात्रा में सबसे ज्यादा मौतें केदारनाथ में हुई, जहां स्वास्थ्य खराब के कारण 78 तीर्थ यात्रियों की जान चली गई. इसी तरह खबरा स्वास्थ्य के कारण बदरीनाथ धाम में 47, गंगोत्री धाम में 16 और यमनोत्री धाम में 20 तीर्थ यात्रियों की मौत हुई है. इन मौतों के सबसे बड़े कारण हार्ट अटैक है, दूसरा हाई एल्टीट्यूड सिकनेस यानी ऊंचाई वाली जगह पर ऑक्सीजन की कमी होना है. 

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केदारनाथ की चढ़ाई सबसे कठिन

चारधाम यात्रा में केदारनाथ और यमुनोत्री धाम की चढ़ाई सबसे कठिन है. केदारनाथ धाम में 21 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई है तो यमुनोत्री धाम में 5 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई है. हालांकि, यमुनोत्री और बद्रीनाथ धाम के लिए ज्यादा पैदल नहीं चलना होता है, यहां गाड़ियां मंदिर से करीब 200 मीटर दूरी पर पार्क होते हैं. फिर भी इन जगहों पर भी जान गंवाने वालों की संख्या अधिक है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यात्री अपनी बीमारी या कोई अन्य शारीरिक परेशानी को छिपा कर दर्शन करने पहुंच रहे हैं. 

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एक दिन रुक कर उच्च हिमालय क्षेत्र में जाएं यात्री   

उत्तराखंड सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से चारधाम यात्रियों को लगातार अलर्ट किया जा रहा है कि वे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले एक दिन का पड़ाव निचले इलाकों में जरूर करें. ऐसा करने में उनका शरीर उच्च हिमालय क्षेत्र के अनुकूल ढल जाता है और फिर वे आराम से चारों धामों के दर्शन करने जा सकते हैं. लेकिन, अच्छी सड़कें और वाहन होने के कारण यात्री एक ही दिन में दर्शन करने के लिए पहुंच जाते हैं. 

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स्वास्थ्य को लेकर उत्तराखंड सरकार ने क्या इंतजाम किए?  

सरकार की तरफ से चारधाम यात्रा में 47 परमानेंट डेडीकेटेड हॉस्पिटल से इसके अलावा अस्थाई तौर पर 25 मेडिकल अस्पताल बनाए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने 57 स्क्रीनिंग केंद्र भी अलग-अलग जगह पर बनाए हैं जो देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में  हैं. केदारनाथ में 17 बेड और बद्रीनाथ धाम में 45 बेड का अस्पताल बनाया गया है. 25 स्पेशलिस्ट डॉक्टर, 178 मेडिकल ऑफिसर्स, 414 पैरामेडिकल स्टाफ को पदस्थ किया गया है. इसके अलावा फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक, एनएस्थेसिसटी और गाइनेकोलॉजिस्ट की भी तैनाती की गई है. 

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हार्ट अटैक से हो रही सबसे अधिक मौतें 

चारधाम यात्रा के सब नोडल अधिकारी डॉ. विमलेश जोशी ने बताया कि चार धाम यात्रा में सबसे ज्यादा मौतों का कारण हार्ट अटैक और रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन तंत्र) है. तीर्थ यात्री बिना रुके सीधे उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौजूद धामों के दर्शन करने पहुंच रहे हैं, जबकि उन्हें उच्च हिमालय क्षेत्र के मुताबिक अपने शरीर को ढ़ालना जरूरी है. अगर, एक दिन रुक कर यात्रा करें तो स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर होगा. 

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5.5 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई 

डॉ विमलेश जोशी ने बताया कि चार धाम यात्रा में अब तक साढ़े पांच लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई है. 20000 से ज्यादा तीर्थ यात्रियों को हल्की-फुल्की बीमारियां दी थी, जिन्हें दवा दी गई. 78 से ज्यादा मरीजों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि 650 से ज्यादा मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉ विमलेश जोशी ने बताया कि बहुत बड़ी तादात में यात्री आ रहे हैं, अगर किसी को हार्ट अटैक आता है तो उसे अस्पताल पहुंचने में समय लग जाता है, इससे उसकी मौत मौके हो जाती है. हालांकि, डॉक्टर या पैरेट मेडिक टीमों द्वारा उन्हें फर्स्ट एड दिया जाता है, लेकिन हायर सेंटर पहुंचने में समय लग जाता है. 

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