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महिलाओं और पुरुषों में एक जैसी नहीं होती डायबिटीज, जानें क्यों अलग हो सकता है इलाज

महिलाओं और पुरुषों में डायबिटीज के एक जैसे नहीं, बल्कि अलग-अलग होते हैं. यहां हम इस विषय को डॉक्टर पारस अग्रवाल से विस्तार से समझेंगे- 

महिलाओं और पुरुषों में एक जैसी नहीं होती डायबिटीज, जानें क्यों अलग हो सकता है इलाज
Diabetes in Men and Women : महिलाओं और पुरुषों में अलग होता है डायबिटीज

हम में से कई लोग डायबिटीज को एक बीमारी मान लेते हैं. वहीं, जो भी इस बारे में बात करता है, तो हम उसे एक जैसा मान लेते हैं. लेकिन इस विषय पर डॉक्टर का कहना है कि पुरुषों और महिलाओं में ये बीमारी एक जैसी नहीं, बल्कि अलग-अलग तरीके से विकसित हो सकती है. गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल की डायबिटीज, ओबेसिटी एंड मेटाबोलिक क्लिनिक के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल का कहना है कि हाल ही में हुए रिसर्च में पता चलता है कि डायबिटीज के रिस्क, लक्षण और इलाज के प्रति रिस्पॉन्स जेंडर के आधार पर  अलग-अलग देखने को मिलता है.

हार्मोनल बदलाव बढ़ा सकते हैं रिस्क

डॉक्टर पारस अग्रवाल का कहना है कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव डायबिटीज के खतरे को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक हैं. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी स्थितियां महिलाओं में विशेष रिस्क पैदा करती हैं. इसके अलावा मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव ब्लड शुगर को कंट्रोल करना और चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं.

वहीं, पुरुषों में पेट के आसपास जमा होने वाली विसरल फैट कम वजन पर भी बढ़ सकती है. ये फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती है, जिससे डायबिटीज का खतरा जल्दी बढ़ सकता है.

हार्ट की बीमारियों का खतरा महिलाओं में है ज्यादा

डॉक्टरर बताते हैं कि डायबिटीज महिलाओं में दिल की बीमारियों के खतरे को पुरुषों की तुलना में अधिक बढ़ा सकती है. आमतौर पर मेनोपॉज से पहले महिलाओं को हार्ट डिजीज से कुछ नैचुरल सुरक्षा मिलती है, लेकिन डायबिटीज इस सुरक्षा को कमजोर कर देती है.

समस्या ये भी है कि महिलाओं में हार्ट संबंधी लक्षण कई बार पुरुषों से अलग दिखाई देते हैं. ऐसे में हार्ट डिजीज का समय पर पता नहीं चल पाता और ट्रीटमेंट में देरी हो सकती है. 

महिलाओं में अलग होते हैं डायबिटीज के लक्षण

डायबिटीज के लक्षणों को अक्सर काफी ज्यादा प्यास, थकान और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है, लेकिन इस तरह के लक्षण हर एक मरीज में दिखे, ये जरूरी नहीं होता है. 

महिलाओं में बार-बार होने वाले यूरिनरी या वैजाइनल इंफेक्शन डायबिटीज का शुरुआती संकेत हो सकते हैं. दूसरी ओर पुरुषों में सेक्सुअल या टेस्टोस्टेरोन से जुड़ी समस्याएं बीमार का शुरुआती संकेत बन सकती हैं. इन लक्षणों को अक्सर अलग समस्या मान लिया जाता है, जिससे डायबिटीज की पहचान में देरी हो सकती है.

क्यों डायबिटीज में महिलाओं और पुरुषों का ट्रीटमेंट अलग होता है?

डॉक्टर कहते हैं कि  पुरुषों और महिलाओं के लिए डायबिटीज की अलग-अलग किताबें लिखने की जरूरत नहीं है, लेकिन स्क्रीनिंग, लक्षणों की पहचान और ट्रीटमेंट की प्लानिंग बनाते समय जेंटर-विशेष कारकों को ध्यान में रखना बहुत ही जरूरी है. इससे बीमारी का जल्द पता लगाया जा सकता है और मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार अधिक प्रभावी ट्रीटमेंट मिल सकता है.

डायबिटीज के लिए कौन सी दवा है बेहतर, देखें वीडियो-

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