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गेहूं, रागी, बाजरा या ज्वार... डायबिटीज में कौन सी रोटी है बेहतर? एक्सपर्ट से जानें

क्या आप भी डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए रोटी खाना छोड़ देते हैं. तो आज से ही ऐसा करना बंद कर दें. इस आर्टिकल में जानें शुगर मरीजों के लिए कौन से आटे की रोटी है बेस्ट.

गेहूं, रागी, बाजरा या ज्वार... डायबिटीज में कौन सी रोटी है बेहतर? एक्सपर्ट से जानें
डायबिटीज में कौन से आटे की रोटी खाएं. (Image NDTV)

रोटी हमारे मील का अहम हिस्सा है. लंच से लेकर डिनर तक में हममें से ज्यादातर लोग रोटी खाना पसंद करते हैं. लेकिन डायबिटीज होने के बाद सबसे ज्यादा उलझन अक्सर रोटी को लेकर ही होती है. कोई कहता है गेहूं की रोटी मत खाओ, तो कोई ज्वार, बाजरा या रागी खाने की सलाह देता है. ऐसे में कई लोग यह समझ ही नहीं पाते कि आखिर कौन सी रोटी ब्लड शुगर के लिए बेहतर हो सकती है. इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए एक हेल्थ कंटेंट क्रिएटर ने अलग-अलग तरह की रोटियों का टेस्ट किया. 7 अलग-अलग तरह की रोटियों को टेस्ट करने के बाद ये लोग इस नतीजे पर पहुंचे कि काला चना आटे की रोटी ब्लड शुगर के मामले में सबसे बेहतर साबित हुई. दावा है कि इससे अब तक का सबसे कम ग्लूकोज स्पाइक दर्ज किया गया.

आखिर क्यों खास निकली चना रोटी?

न्यूट्रिशन कोच और पर्सनल ट्रेनर प्राणव मोहन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट Praanify पर अलग-अलग तरह की रोटियों के ब्लड शुगर पर असर को शेयर किया. ताज्जुब की बात है कि गेहूं, रागी, बाजरा, ज्वार और मक्का समेत कई रोटियों को CGM (Continuous Glucose Monitor) की मदद से परखा गया. 

टेस्ट में गेहूं की रोटी के बाद 79 mg/dL और 170 mg/dL तक स्पाइक दर्ज हुआ, जबकि काला चना आटे की रोटी के बाद यह 35 mg/dL और 99 mg/dL रहा. इससे गेहूं, रागी, बाजरा, मक्का और ज्वार जैसी रोटियों के मुकाबले भी कम ग्लूकोज स्पाइक देखने को मिला. यानि काला चना रोटी खाने के बाद ग्लूकोज में बढ़ोतरी बाकी रोटियों के मुकाबले सबसे कम रही. हालांकि यह नतीजा एक सीमित टेस्ट पर आधारित है और हर व्यक्ति में परिणाम अलग हो सकते हैं.

कैसे गेहूं के आटे और बेसन से अलग है ये-

यहां एक बात और साफ करना जरूरी है कि चने के आटे को बेसन समझने की गलती न करें. दरअसल, काला चना आटा बेसन से भी अलग होता है. इसमें चने का छिलका भी शामिल रहता है, जिसमें फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है. यही वजह है कि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम बताया गया. साथ ही इसमें गेहूं के आटे की तुलना में कार्ब्स कम और प्रोटीन व फाइबर ज्यादा होते हैं. यही वजह है कि काला चना आटे की रोटी से कम ग्लूकोज स्पाइक देखा गया. लेकिन सिर्फ इसी आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर डायबिटीज मरीज को गेहूं की रोटी छोड़ देनी चाहिए.

दरअसल ब्लड शुगर पर असर कई बातों से तय होता है, जिनमें व्यक्ति की सेहत, दवाएं, फिजिकल एक्टिविटी, खाने की मात्रा और भोजन के साथ खाई गई दूसरी चीजें भी शामिल हैं. हालांकि इतना जरूर कहा जा सकता है कि काला चना आटा कुछ लोगों के लिए गेहूं के आटे का एक दिलचस्प विकल्प बन सकता है. डायबिटीज में किस तरह की डाइट बेहतर होगी, इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है. ऐसे में किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइट एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है.

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