विज्ञापन
This Article is From Sep 27, 2025

'डायबेसिटी' 21वीं सदी की बीमारी, जिससे नहीं संभले तो जीवन पर पड़ेगी भारी

आजकल सेहत की दुनिया में एक नया शब्द सुर्खियों में है. इसे कहा जा रहा है डायबेसिटी. इसे समझना मुश्किल नहीं है. ये एक शब्द दो बड़ी समस्याओं का मेल है. यानी जब इंसान का वजन बढ़ता है और साथ ही ब्लड शुगर भी नियंत्रण से बाहर होने लगता है, तो डॉक्टर इसे 'डायबेसिटी' कहते हैं. यह सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक बढ़ती हुई 'पब्लिक हेल्थ क्राइसिस' है. 

'डायबेसिटी' 21वीं सदी की बीमारी, जिससे नहीं संभले तो जीवन पर पड़ेगी भारी
अमूमन लोग है डायबिसिटी से पीड़ित.

आजकल सेहत की दुनिया में एक नया शब्द सुर्खियों में है. इसे कहा जा रहा है डायबेसिटी. इसे समझना मुश्किल नहीं है. ये एक शब्द दो बड़ी समस्याओं का मेल है. यानी जब इंसान का वजन बढ़ता है और साथ ही ब्लड शुगर भी नियंत्रण से बाहर होने लगता है, तो डॉक्टर इसे 'डायबेसिटी' कहते हैं. यह सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक बढ़ती हुई 'पब्लिक हेल्थ क्राइसिस' है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 65 करोड़ लोग मोटापे से और 53 करोड़ लोग डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं. भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है. 2023 की आईसीएमआर-इंडियाबी स्टडी बताती है कि देश में लगभग 10 करोड़ लोग डायबिटीज के शिकार हैं और 13 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में हैं. रिसर्च कहती है कि मोटे लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा 80–90 फीसदी तक बढ़ जाता है.

इंसुलिन रेजिस्टेंस – मोटापा शरीर की कोशिकाओं को 'इंसुलिन' के प्रति कम संवेदनशील बना देता है. यही टाइप-2 डायबिटीज की सबसे बड़ी जड़ है. विसरल फैट (पेट की चर्बी) – कमर और पेट पर जमा फैट शरीर में सूजन और हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है. लाइफस्टाइल फैक्टर – कम नींद, तनाव, फास्ट फूड और शारीरिक निष्क्रियता इस समस्या को और तेज कर देते हैं.

ये भी पढ़ें: नवरात्रि में इस DIY फेस पैक से पाएं इंस्टैंट निखार, पार्लर जाने की नहीं पड़ेगी जरूरत

डायबेसिटी होने पर इंसान को केवल डायबिटीज और मोटापे की परेशानी नहीं रहती, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन जाती है. हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा दोगुना होता है. हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर समेत किडनी की बीमारी और कुछ कैंसर हो सकते हैं.

वैज्ञानिक मानते हैं कि डायबेसिटी से निपटना सिर्फ दवाइयों से संभव नहीं. यह एक लाइफस्टाइल डिजीज है, जिसका हल भी लाइफस्टाइल में छिपा है. सलाह दी जाती है कि रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज वॉक या कसरत करें. फाइबर, प्रोटीन और लो-जीआई (ग्लाइसेमिक इंडेक्स) वाले आहार को चुनें और नींद पूरी करें.

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar on NDTV: Stress, Anxiety, से लेकर Relationship, Spirituality तक हर बात

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com