डेंगू की रिपोर्ट आते ही ज्यादातर लोगों की नजर सबसे पहले प्लेटलेट्स के नंबर पर जाती है. जैसे-जैसे यह काउंट गिरता है, मरीज और परिवार की चिंता बढ़ने लगती है. कई लोग तो प्लेटलेट्स थोड़ा कम होते ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की बात करने लगते हैं. लेकिन क्या सच में कोई ऐसा नंबर है, जिसके नीचे आते ही जान का खतरा बढ़ जाता है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स का नंबर नहीं, बल्कि मरीज की पूरी हालत ज्यादा मायने रखती है. ऐसे में घबराने के बजाय सही जानकारी होना बेहद जरूरी है.
डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स कम होना आम बात है, लेकिन इसका मतलब हर बार गंभीर खतरा नहीं होता. केयर हॉस्पिटल्स, बंजारा हिल्स के सीनियर कंसल्टेंट और एचओडी (क्रिटिकल केयर) डॉ. के. सी. मिश्रा के मुताबिक, सिर्फ प्लेटलेट्स का नंबर देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज की हालत कितनी गंभीर है. प्लेटलेट्स चढ़ाने का फैसला भी सिर्फ काउंट के आधार पर नहीं लिया जाता, बल्कि मरीज की पूरी क्लिनिकल स्थिति को देखकर किया जाता है.
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सबसे पहले यहां देखें डॉक्टर का वीडियो -
क्या कोई ऐसा नंबर है, जहां से खतरा बढ़ जाता है?
डॉक्टर के मुताबिक, ऐसा कोई एक तय प्लेटलेट नंबर नहीं है, जिसके आते ही हर मरीज की जान पर खतरा मान लिया जाए. हालांकि अगर प्लेटलेट्स बहुत कम स्तर, यानी करीब 20 हजार से 5 हजार तक पहुंच जाएं या मरीज में नाक, मसूड़ों या शरीर के किसी हिस्से से ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है. इसका फैसला डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति देखकर ही करते हैं.
लेकिन कई बार अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन केवल प्लेटलेट्स काउंट को देखकर मरीज को खून या प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए दबाव बनाने लगते हैं. ध्यान रहे कि यदि आप या आपका कोई भी परिजन डेंगू से जूझ रहे हों तो ये तीन गलतियां कभी भी न करें.
पहली गलती: सिर्फ प्लेटलेट्स का नंबर देखकर घबरा जाना
डेंगू में प्लेटलेट्स का गिरना बीमारी का सामान्य हिस्सा हो सकता है. कई मरीज कम प्लेटलेट्स के बावजूद बिना किसी गंभीर परेशानी के ठीक हो जाते हैं. इसलिए सिर्फ रिपोर्ट देखकर घबराने या खुद से कोई फैसला लेने से बचना चाहिए. आपके घबराने से केवल परेशानी बढ़ेगी उसमें कोई कमी नहीं आयेगी.
यहां देखें डॉक्टर का क्या कहना है -
दूसरी गलती: प्लेटलेट्स कम होते ही ट्रांसफ्यूजन की मांग करना
कई लोग मान लेते हैं कि प्लेटलेट्स कम होते ही उन्हें चढ़ाना जरूरी है. जबकि ऐसा हर बार नहीं होता. अगर मरीज में ब्लीडिंग नहीं है और डॉक्टर को जरूरत नहीं लगती, तो बिना वजह प्लेटलेट्स चढ़ाने से कोई खास फायदा नहीं होता. कई मामलों में ट्रांसफ्यूजन के बाद भी प्लेटलेट्स दोबारा कम हो सकते हैं.
तीसरी गलती: बाकी लक्षणों को नजरअंदाज करना
सिर्फ प्लेटलेट्स पर नजर रखने से काम नहीं चलता. अगर तेज कमजोरी, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, ब्लड प्रेशर गिरना या शरीर के किसी हिस्से से ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. ये डेंगू के गंभीर होने के संकेत हो सकते हैं.
तो फिर क्या करें?
डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त आराम करें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, समय पर दवाएं लें और जरूरत पड़ने पर जांच कराएं. बिना डॉक्टर की सलाह के प्लेटलेट्स बढ़ाने के दावे करने वाले घरेलू नुस्खों या दवाओं पर भरोसा न करें. कुल मिलाकर डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह से पालन करना ही समझदारी है.
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