CRPF DG Gyanendra Pratap Singh Profile: देश के सबसे बड़े पैरामिलिट्री फोर्स CRPF के डायरेक्टर जनरल (DG) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं. हाल ही में जंतर-मंतर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों पर ज्यादा सख्ती बरतने के आरोप लगे थे. मामला संसद तक भी गूंजा. लेकिन इसी बीच CRPF चीफ ने अपने जवानों के सामने कुछ ऐसा कह दिया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया है. ऐसे में आइए जानते हैं ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह आखिरी कौन हैं, कहां से पढ़े हैं और उनका बैकग्राउंड क्या है और उन्होंने ऐसा क्या कह दिया है, जिससे देशभर में बवाल मच गया है.
CRPF डीजी चर्चा में क्यों हैं
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से 'संसद चलो' मार्च निकाला गया था. बड़ी संख्या में छात्र इसमें पहुंचे थे. भीड़ बेकाबू होने लगी, तो पुलिस और सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. इसके बाद सुरक्षाबलों पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करने के आरोप लगने लगे. विपक्ष ने भी इस पर खूब हंगामा किया. इसी हंगामे के बीच 27 जुलाई को सीआरपीएफ के एक कार्यक्रम में ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (GP Singh) ने अपने जवानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, 'आप लोग बिना डरे अपनी ड्यूटी करें. ड्यूटी के दौरान सही नीयत से लिए गए आपके हर जायज एक्शन और फैसले की पूरी जिम्मेदारी मैं लेता हूं. जो भी जिम्मेदारी होगी, वो बल का प्रमुख होने के नाते मेरी होगी.' हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर कोई बिना वजह गलत एक्शन लेगा, तो उस पर सख्त विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी.
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह कौन हैं
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह देश के बेहद तेज-तर्रार आईपीएस अफसरों में गिने जाते हैं. फरवरी 2025 में उन्होंने सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के डायरेक्टर जनरल का पद संभाला है और नवंबर 2027 तक इस पद पर रहेंगे. जीपी सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले हैं.
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह किस बैच के IPS अधिकारी हैं
सीआरपीएफ चीफ 1991 बैच के असम-मेघालय कैडर के IPS अधिकारी हैं. उनका करीब तीन दशकों से ज्यादा का करियर बेहद शानदार और एक्शन से भरा रहा है. 1992 में असम से अपनी पुलिस सर्विस शुरू करने वाले ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने पुलिसिंग, आतंकवाद विरोधी अभियान, VIP सुरक्षा और जांच एजेंसियों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं.
कितनी और कहां से पढ़ाई की है
जीपी सिंह की शुरुआती और कॉलेज की पढ़ाई यूपी की राजधानी लखनऊ से हुई है. उन्होंने साइंस स्ट्रीम से B.Sc और M.Sc की डिग्री हासिल की है. पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने UPSC की कठिन परीक्षा पास की और 1991 बैच के असम-मेघालय कैडर के आईपीएस अधिकारी बने.
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का अब तक का करियर कैसा रहा है
असम पुलिस में दबदबा
करियर के शुरुआती दिनों 1992 में ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह असम के सोनितपुर नलबाड़ी और बारपेटा जैसे कई जिलों में SP रहे. फरवरी 2023 में उन्हें असम का DGP यानी पुलिस का सबसे बड़ा मुखिया बनाया गया था.
पीएम की सुरक्षा में रहे
साल 2002 में वे देश के सबसे VVIP सुरक्षा घेरे यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का हिस्सा बने. यहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह की सुरक्षा की अहम जिम्मेदारी संभाली.
आतंकवाद के खिलाफ बड़े ऑपरेशन
2013 से 2019 तक उन्होंने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) में IG के तौर पर काम किया. इस दौरान उन्होंने समझौता एक्सप्रेस, मालेगांव, अजमेर शरीफ और मक्का मस्जिद ब्लास्ट जैसे हाई-प्रोफाइल आतंकवादी मामलों की जांच को लीड किया.
गैंडों की सुरक्षा
असम में रहने के दौरान उन्होंने 'राइनो प्रोटेक्शन टास्क फोर्स' के चीफ के तौर पर भी काम किया, जो वहां के गैंडों (Rhinos) को शिकारियों से बचाने के लिए बनाई गई थी.
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