आजकल बाजार में मिलने वाले कोलेजन सप्लीमेंट्स को देखकर कई लोगों को लगता है कि अगर उसमें 8 या 10 ग्राम प्रोटीन लिखा है, तो वह अंडे, मछली या दूसरी प्रोटीन वाली चीजों के बराबर होगा. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि हर प्रोटीन शरीर में एक जैसा काम नहीं करता. कुछ प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, जबकि कुछ का काम त्वचा, बाल और जोड़ों को सहारा देना होता है. ऐसे में सिर्फ पैकेट पर लिखा प्रोटीन देखकर फैसला करना सही नहीं है. अगर आपका गोल मसल्स बनाना है, तो सही तरह का प्रोटीन चुनना बेहद जरूरी है.
कोलेजन क्या होता है?
कोलेजन एक तरह का प्रोटीन है, जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. यह स्किन, हड्डियों, मांसपेशियों, जोड़ों, टेंडन और लिगामेंट्स को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाता है. बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कोलेजन बनने की रफ्तार कम होने लगती है. यही वजह है कि कई लोग कोलेजन सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं.
न्यूट्रिशनिस्ट राशि चौधरी के मुताबिक, कोलेजन में प्रोटीन जरूर होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह शरीर में उसी तरह काम करेगा, जैसे अंडे, मछली या दूसरे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ करते हैं. इसलिए पैकेट पर लिखी प्रोटीन की मात्रा देखकर दोनों को एक जैसा मान लेना सही नहीं है.
मसल्स बनाने के लिए क्यों नहीं है सबसे अच्छा विकल्प?
कोलेजन में कुछ जरूरी अमीनो एसिड पर्याप्त मात्रा में नहीं होते. खासतौर पर ट्रिप्टोफैन की कमी की वजह से यह मसल प्रोटीन सिंथेसिस को उतना बेहतर तरीके से बढ़ावा नहीं दे पाता, जितना दूसरे उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन दे सकते हैं. इसलिए अगर आपका लक्ष्य मांसपेशियां मजबूत करना, ताकत बढ़ाना या शरीर की बनावट में सुधार करना है, तो सिर्फ कोलेजन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि कोलेजन बेकार है. यह त्वचा, बाल, जोड़ों, टेंडन और आंत की अंदरूनी परत को सहारा देने में मददगार हो सकता है. यानी अगर आपका मकसद इन चीजों की देखभाल है, तो कोलेजन उपयोगी हो सकता है.
रोज के खाने से कौन-कौन से प्रोटीन मिलते हैं?
दाल, राजमा, छोले और दूसरी फलियां रोज की प्रोटीन जरूरत पूरी करने के लिए अच्छे ऑप्शन हैं. लेकिन अगर गोल मांसपेशियां मजबूत बनाना है, तो अंडे, मछली, टोफू, मांस और एडामेमे जैसे प्रोटीन स्रोत ज्यादा बेहतर माने जाते हैं. अगर आपका गोल त्वचा और बालों की देखभाल के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी है, तो सिर्फ कोलेजन पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित प्रोटीन वाला भोजन लेना बेहतर है. कोलेजन को जरूरत के हिसाब से शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे रोज के मुख्य प्रोटीन स्रोत की जगह नहीं लेना चाहिए.
यानी, सिर्फ यह गिनना काफी नहीं कि आप दिनभर में कितना प्रोटीन ले रहे हैं. इससे भी ज्यादा जरूरी यह समझना है कि आप किस तरह का प्रोटीन खा रहे हैं और वह आपके शरीर के किस काम में मदद करता है.
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