प्रोटीन का सेवन सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. कुछ साल पहले तक हमारे घर के खाने में प्रोटीन की बात बहुत कम होती थी. दाल, चावल, रोटी और सब्ज़ी के सामने प्रोटीन छुप सा जाता था. लेकिन पिछले कुछ सालों में मामला पूरी तरह बदल चुका है. अब तो नाश्ते के डिब्बे पर प्रोटीन बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा दिखता है, कॉफी में मिलाया जा रहा है और मेट्रो में जाते लोग शेकर में प्रोटीन मिलाते दिख जाते हैं.
आज प्रोटीन सिर्फ जिम जाने वाले युवाओं का शौक नहीं रहा, बल्कि यह हर आम लोगों का हिस्सा बन चुका है.
मार्केट में क्यों है प्रोटीन का शोर?
मार्केट रिसर्च करने वाली कंपनी IMARC के मुताबिक, भारत में प्रोटीन सप्लीमेंट का बाज़ार 2024 में लगभग 7,461 करोड़ रुपये का था।.2033 तक इसके बढ़कर 13,186 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. व्हे प्रोटीन (Whey Protein) का बाज़ार 2025 में 178.45 मिलियन डॉलर का था, जो 2031 तक 221.98 मिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा.
AS-IT-IS न्यूट्रिशन के फाउंडर हिम्मत जैन कहते हैं कि पहले लोग सिर्फ बॉडी बनाने के लिए प्रोटीन लेते थे. लेकिन अब कामकाजी लोग, महिलाएं और पहली बार फिटनेस की शुरुआत करने वाले लोग भी इसे रोज़ के खाने में शामिल कर रहे हैं.
सिर्फ बड़े शहरों (Tier-1) में ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) में भी इसका क्रेज बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है. क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. लवनीत बत्रा बताती हैं कि छोटे शहरों में प्रोटीन की मांग बड़े शहरों से 200% से भी ज़्यादा रफ्तार से बढ़ रही है. इसका कारण सोशल मीडिया, डॉक्टरों की सलाह और सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता है.

प्रोटीन सेहत के लिए क्यों है जरूरी. (Image NDTV)
क्या हम वाकई पूरा प्रोटीन खा रहे हैं?
एक आम इंसान को दिन भर में लगभग 70 से 80 ग्राम प्रोटीन की ज़रूरत होती है. अगर आप जिम जाते हैं या ज़्यादा मेहनत का काम करते हैं, तो आपको 100 ग्राम या उससे ज़्यादा की ज़रूरत हो सकती है. लेकिन सच्चाई क्या है? डॉ. लवनीत बत्रा के अनुसार, एक औसतन भारतीय रोज़ सिर्फ 40 ग्राम प्रोटीन ही खा पाता है यानी ज़रूरत का सिर्फ आधा. भारत में 70% से 80% लोगों के शरीर में प्रोटीन की कमी है. ऐसा इसलिए नहीं है कि हमारे पास खाने की कमी है. दाल, दूध, पनीर, अंडे, चिकन और सोयाबीन हर जगह मिलते हैं. असली वजह है हमारी भागदौड़ भरी ज़िंदगी, सही समय पर खाना न खाना और खाने की खराब आदतें.
न्यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है कि सप्लीमेंट सिर्फ कमी को पूरा करने के लिए हैं, ये आपके रोज़ के असली खाने का ऑप्शन नहीं हो सकते.
अंडा, पनीर, चिकन या व्हे प्रोटीन?
जब बात प्रोटीन खरीदने की आती है, तो सबसे बड़ा सवाल उठता है किसमें सबसे सस्ता और अच्छा प्रोटीन मिलता है? आइए इसका हिसाब-किताब समझते हैं.
- अंडा (Egg)- 8-10 रुपये के एक अंडे में लगभग 6-7 ग्राम प्रोटीन होता है. यह पचाने में सबसे आसान और शरीर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.
- पनीर (Paneer)- वेजिटेरियन लोगों के लिए पनीर बहुत अच्छा जरिया है. यह धीरे-धीरे पचता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है. यह अंडे से थोड़ा महंगा लेकिन मीट से सस्ता पड़ता है.
- चिकन (Chicken)- अगर आप बल्क में चिकन खरीदते हैं, तो यह अंडे के आसपास ही पड़ता है. लेकिन फ्रेश चिकन कभी-कभी थोड़ा महंगा हो सकता है.
- व्हे प्रोटीन (Whey)- प्रति ग्राम प्रोटीन के हिसाब से व्हे प्रोटीन सबसे महंगा पड़ता है. हालांकि अमूल जैसे ब्रांड्स ने अपना व्हे प्रोटीन बाज़ार में उतारकर इसकी कीमतें कम करने की कोशिश की है (लगभग ₹2.7 प्रति ग्राम), जबकि अन्य ब्रांड्स ₹3.2 से ₹5.4 प्रति ग्राम तक बेचते हैं.
नकली प्रोटीन के नुकसान-
आज के समय में हर चीज में मिलावट देखी जा रही है, नोएडा जैसे शहरों में पुलिस ने ऐसी अवैध फैक्ट्रियां पकड़ी हैं जहां रोज़ सैकड़ों किलो नकली प्रोटीन पाउडर बनाया जा रहा था. बिना जांच वाले इन पाउडरों से लिवर और किडनी को भारी नुकसान पहुंच सकता है.
नकली सप्लीमेंट से कैसे बचें?
- डिब्बे पर 14-अंकों का FSSAI लाइसेंस नंबर ज़रूर चेक करें और उसे FOSCOS पोर्टल पर वेरीफाई करें.
- सप्लीमेंट हमेशा अधिकृत वेबसाइट या दुकान से ही खरीदें.
- बहुत ज़्यादा भारी छूट वाले प्रोटीन पाउडर को खरीदने से बचें, यह नकली हो सकता है.
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