Climate Change And Stroke: वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन के विशेषज्ञों के अनुसार, बदलता मौसम दिमाग की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है. बहुत ज्यादा तापमान, नमी में अचानक बदलाव, और धूल-रेत के तूफान, स्ट्रोक होने की संभावना को बढ़ा देते हैं. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ स्ट्रोक में छपे एक बयान में बताया गया है कि ज्यादा गर्मी सर्दी, तापमान में उतार-चढ़ाव, नमी और धूल के तूफ़ान जैसे पर्यावरणीय बदलाव स्ट्रोक के मामले बढ़ा रहे हैं.

बदलता मौसम स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ाता है?
न्यूजीलैंड के ओटागो यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर और वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गनाइजेशन की बोर्ड मेंबर अन्ना रांटा इस अध्ययन की मुख्य और वरिष्ठ लेखिका हैं.
उन्होंने समझाया:
- बहुत गर्मी से शरीर में पानी की कमी होती है, जिससे खून गाढ़ा हो जाता है और रक्त वाहिकाएं ब्लॉक होने का खतरा बढ़ता है.
- नमी और एयर प्रेशर में बदलाव ब्लड प्रेशर बढ़ा देते हैं, जो स्ट्रोक का बड़ा कारण है.
- जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान, नमी और वायुदाब में तेज बदलाव अब ज्यादा देखने को मिल रहे हैं.
स्टडी में किन लोगों को ज्यादा खतरा पाया गया?
बुजुर्ग, खुले में काम करने वाले लोग और मध्यम आय वाले देशों के लोग इन पर्यावरणीय कारणों से स्ट्रोक के ज्यादा खतरे में रहते हैं.
कई मौसम समस्याएं एक साथ हों तो खतरा और बढ़ता है
अगर बहुत गर्मी के साथ सूखा हो जाए, या ठंड के साथ नमी और तेज हवा हो, तो स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.
हवा का प्रदूषण भी बड़ा कारण
रांटा ने बताया:
- दुनिया में 20% से ज्यादा स्ट्रोक हवा के प्रदूषण की वजह से होते हैं.
- जंगलों में आग, रेत और धूल के तूफ़ान, इनकी संख्या जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही है.
- हवा में मौजूद छोटे–छोटे कण फेफड़ों के रास्ते खून में पहुँचकर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे स्ट्रोक हो सकता है.

Photo Credit: AI
ठंड और तापमान में बदलाव ज्यादा असर डालते हैं
स्टडी में पाया गया:
- तेज ठंड, अचानक तापमान बदलना और बहुत गर्मी तीनों ही स्ट्रोक बढ़ाते हैं.
- अभी भी ठंड का असर सबसे ज़्यादा है, लेकिन गर्मी का खतरा लगातार बढ़ रहा है.
विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी?
- प्रदूषण कम करने के लिए साफ ऊर्जा और पौधों पर आधारित भोजन को बढ़ावा दिया जाए.
- लोगों को बताया जाए कि मौसम उनकी सेहत को कैसे प्रभावित करता है.
- अस्पतालों में मौसम अलर्ट लगाए जाएं.
- मौसम विभाग, डॉक्टर और शहर योजनाकार मिलकर ऐसी योजनाएं बनाएं जिससे लोगों की जान बचाई जा सके.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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