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रोज-रोज नहीं लेनी पड़ेगी दवा, साल में सिर्फ 2 इंजेक्शन से कंट्रोल में रहेगा ब्लड प्रेशर? हाइपरटेंशन इलाज में बड़ा बदलाव!

Hypertension Treatment: मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक नई समीक्षा के अनुसार, कई नई लॉन्ग टर्म तक असर करने वाली दवाएं लास्ट स्टेज के क्लिनिकल ट्रायल में हैं. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह हाइपरटेंशन मैनेजमेंट मेंस्ट्रक्चरल बदलाव ला सकता है.

रोज-रोज नहीं लेनी पड़ेगी दवा, साल में सिर्फ 2 इंजेक्शन से कंट्रोल में रहेगा ब्लड प्रेशर? हाइपरटेंशन इलाज में बड़ा बदलाव!
सबसे आगे चल रही दवा जिलेबेसिरन है, जिसे रॉश और अलनीलम फार्मास्यूटिकल्स मिलकर विकसित कर रहे हैं.

BP Control Injection: हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है. यह बिना ज्यादा लक्षण दिखाए हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है. दशकों से इसका इलाज रोजाना ली जाने वाली गोलियों पर निर्भर रहा है. लेकिन, अब एक नई वैज्ञानिक समीक्षा ने उम्मीद जगाई है कि भविष्य में मरीजों को रोज दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, साल में सिर्फ दो इंजेक्शन से ही ब्लड प्रेशर कंट्रोल किया जा सकेगा.

प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक नई समीक्षा के अनुसार, कई नई लॉन्ग टर्म तक असर करने वाली दवाएं लास्ट स्टेज के क्लिनिकल ट्रायल में हैं. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह हाइपरटेंशन मैनेजमेंट मेंस्ट्रक्चरल बदलाव ला सकता है, खासकर तब जब दुनिया भर में ब्लड प्रेशर कंट्रोल रेट अभी भी चिंताजनक रूप से कम हैं.

नई थेरेपी कैसे काम करती है?

सबसे आगे चल रही दवा जिलेबेसिरन है, जिसे रॉश और अलनीलम फार्मास्यूटिकल्स मिलकर विकसित कर रहे हैं. यह दवा छोटे हस्तक्षेप करने वाले आरएनए (siRNA) तकनीक का उपयोग करती है. यह लिवर में बनने वाले angiotensinogen नामक प्रोटीन को दबाती है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने की मुख्य प्रक्रिया में शामिल होता है. एक सबक्यूटेनियस (त्वचा के नीचे) इंजेक्शन 6 महीने तक सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कम रखने में सक्षम पाया गया है. यह फिलहाल फेज-3 ट्रायल में है.

मिड-स्टेज ट्रायल के नतीजे, जिनमें से कुछ न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में भी प्रकाशित हुए, बताते हैं कि यह दवा लंबे समय तक स्थायी और प्रभावी कमी ला सकती है.

इसके अलावा, नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) की दवा ज़िल्टिवेकिमाब (Ziltivekimab) सूजन (Inflammation) से जुड़ी प्रक्रियाओं को निशाना बनाती है, जो हृदय रोग के जोखिम से संबंधित हैं. कुछ अन्य शोध एल्डोस्टीरोन( Aldosterone) हार्मोन के ज्यादा सटीक कंट्रोल पर काम कर रहे हैं, जो शरीर में नमक और पानी के संतुलन को प्रभावित करता है.

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क्या इंजेक्सन सुरक्षित और किफायती होगा?

शुरुआती ट्रायल में इन इंजेक्शनों की सेफ्टी प्रोफाइल संतोषजनक दिखी है. लेकिन, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हाइपरटेंशन जीवनभर रहने वाली बीमारी है, इसलिए लंबे समय के परिणाम और बड़े पैमाने पर सुरक्षा डेटा जरूरी होंगे.

दूसरा बड़ा सवाल लागत का है. लंबी अवधि तक असर करने वाली दवाएं अक्सर महंगी होती हैं. कम और मध्यम आय वाले देशों जैसे भारत में जहां हाइपरटेंशन की दर ज्यादा है, वहां इनकी उपलब्धता और किफायती कीमत एक चुनौती हो सकती है.

डॉक्टरों की राय क्या है?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित राज के अनुसार, "ये दवाएं केवल ब्लड प्रेशर के नंबर कम करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बीमारी के मूल जैविक कारण को निशाना बनाती हैं. अगर दीर्घकालिक डेटा सकारात्मक रहा, तो साल में दो बार इंजेक्शन लेना एक व्यावहारिक विकल्प बन सकता है."

वे कहते हैं कि रोजाना दवा लेना भूल जाना हाइपरटेंशन कंट्रोल में सबसे बड़ी बाधा है. इंजेक्शन थेरेपी इस समस्या को काफी हद तक दूर कर सकती है.

रोज की गोलियां क्यों पड़ती हैं कम?

वर्तमान गाइडलाइंस के अनुसार, मरीजों को ACE इन्हिबिटर्स, एंजियोटेंसिन रिसेप्टर ब्लॉकर्स, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स और ड्यूरेटिक्स (Diuretics) जैसी दवाओं का कॉम्बिनेशन दिया जाता है.

हालांकि क्लिनिकल सेटिंग में ये प्रभावी हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में मरीज अक्सर डायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल जैसी कई समस्याओं से जूझ रहे होते हैं. कई दवाएं एक साथ लेने से पिल फटीग (दवाओं से थकान) और साइड इफेक्ट्स की समस्या बढ़ जाती है. यही वह गैप है जिसे लंबी अवधि के इंजेक्शन भरने की कोशिश कर रहे हैं.

कंट्रोल अब भी कम

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, 140/90 mm Hg या उससे ज्यादा ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंशन माना जाता है. 1.4 अरब से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं और लगभग 44% लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें यह बीमारी है.

भारत में ICMR-INDIAB 2023 अध्ययन के मुताबिक 31.5 करोड़ से ज्यादा लोग हाइपरटेंशन से ग्रस्त हैं. लेकिन, निदान के बाद भी केवल एक छोटा हिस्सा ही अपने ब्लड प्रेशर को सही लेवल पर रख पाता है.

साल में दो इंजेक्शन वाली थेरेपी अभी टेस्ट के दौर में है, लेकिन अगर यह सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो हाइपरटेंशन के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव संभव है. यह न केवल दवा लेने की झंझट कम कर सकती है, बल्कि दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे को भी घटा सकती है.

हालांकि, जब तक ये दवाएं पूरी तरह स्वीकृत नहीं होतीं, तब तक डॉक्टर द्वारा बताई गई रोजाना दवाओं, बैलेंस डाइट, व्यायाम और रेगुलर चेकअप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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