Do Chips Affect Memory: आजकल पैकेट वाले स्नैक्स हमारी आदत बन चुके हैं. ऑफिस में भूख लगी तो चिप्स, चाय के साथ बिस्किट, या जल्दी में इंस्टेंट नूडल्स, ये सब अब आम बात है. न सिर्फ बड़े बल्कि बच्चे भी इनके आदि हो रहे हैं. कई लोगों को लगता है कि कभी-कभार ऐसे स्नैक्स खाने से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन नई रिसर्च कुछ और ही कहानी बता रही है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी के मुताबिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स, जैसे चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेट वाले स्नैक्स, दिमाग की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं. रिसर्च में पाया गया कि रोजाना ज्यादा मात्रा में ऐसे फूड्स खाने से याददाश्त कमजोर होने, ध्यान कम होने और यहां तक कि डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ सकता है. यानी आपकी छोटी-छोटी खाने की आदतें भविष्य में दिमाग की सेहत तय कर सकती हैं.
क्या होते हैं अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स वे होते हैं जिन्हें फैक्ट्री में कई तरह की प्रोसेसिंग के बाद तैयार किया जाता है. इनमें स्वाद बढ़ाने के लिए ज्यादा नमक, शुगर, प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं.
चिप्स, पैकेट वाले बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, शुगरी सीरियल्स, प्रोसेस्ड मीट और सॉफ्ट ड्रिंक्स इसके बड़े उदाहरण हैं. ये खाने में स्वादिष्ट जरूर लगते हैं, लेकिन शरीर और दिमाग दोनों पर धीरे-धीरे असर डाल सकते हैं.
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स्टडी में क्या सामने आया?
नई स्टडी के मुताबिक जिन लोगों की डाइट में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स ज्यादा थे, उनमें याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होने का खतरा ज्यादा देखा गया. रिसर्च में यह भी सामने आया कि अगर किसी व्यक्ति की रोज की डाइट में सिर्फ 10% हिस्सा भी ऐसे फूड्स का हो, जो लगभग एक पैकेट चिप्स के बराबर माना गया, तो डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खतरा धीरे-धीरे बढ़ता गया, यानी जितना ज्यादा जंक फूड, उतना ज्यादा रिस्क. ये स्टडी मोनाश यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स द्वारा की गई थी. यह स्टडी जर्नल अल्जाइमर्स एंड डिमेंशिया: डायग्नोसिस, असेसमेंट एंड डिजीज मॉनिटरिंग में प्रकाशित हुई है.

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दिमाग पर कैसे पड़ता है असर?
शोधकर्ताओं का मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, जिसका असर दिमाग पर भी पड़ता है. इनमें जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं और अनहेल्दी फैट्स ज्यादा होते हैं.
स्टडी में ऐसे लोगों में ध्यान लगाने में परेशानी, फोकस कम होना और मानसिक प्रतिक्रिया धीमी होने जैसे संकेत भी मिले. शुरुआत में ये बदलाव छोटे लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकते हैं.
सिर्फ फल-सब्जियां खाना काफी नहीं
रिसर्च की एक खास बात यह भी रही कि कुछ लोग हेल्दी चीजें खाने के बावजूद अगर रेगुलर रूप से पैकेट वाले स्नैक्स खा रहे थे, तब भी उनमें खतरा देखा गया. इसका मतलब यह है कि सिर्फ फल और सब्जियां खाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जंक और प्रोसेस्ड फूड्स की मात्रा कम करना भी जरूरी है. यानी क्या खा रहे हैं के साथ क्या नहीं खा रहे यह भी उतना ही अहम है.
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कैसे करें बेहतर विकल्प?
एक्सपर्ट का कहना है कि पूरी तरह जंक फूड छोड़ना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन इसकी मात्रा कम की जा सकती है. चिप्स की जगह फल, तले हुए स्नैक्स की जगह ड्राई फ्रूट्स और इंस्टेंट फूड्स की जगह घर का ताजा खाना बेहतर विकल्प हो सकते हैं. छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय में शरीर और दिमाग दोनों को फायदा पहुंचा सकते हैं.
आज की आदतें तय करेंगी कल की सेहत
दिमाग की सेहत अचानक खराब नहीं होती, बल्कि यह रोज की आदतों से धीरे-धीरे प्रभावित होती है. एक पैकेट चिप्स उस समय नुकसानदायक नहीं लगता, लेकिन सालों तक बनी ऐसी आदतें भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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