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मह‍िलाओं के ल‍िए खास: ब्रेस्ट सैगिंग की असली वजह और बचाव के सही तरीके, डॉक्‍टर ने द‍िए FAQs के जवाब

ब्रेस्ट सैगिंग (Breast Ptosis) यानी स्तनों का ढीला होना उम्र बढ़ने के साथ होने वाला एक सामान्य बदलाव है. लेकिन कई महिलाएं इसे बीमारी या अपनी गलती समझ बैठती हैं. क्या ब्रेस्टफीडिंग, वजन कम करना या गलत ब्रा पहनना इसका कारण है? ब्रेस्ट सर्जन डॉ. तृप्ति सेन बता रही हैं कि ब्रेस्ट सैगिंग की असली वजहें क्या हैं और इसे धीमा करने के लिए क्या किया जा सकता है.

Medically Reviewed By: Dr Tapti Sen
मह‍िलाओं के ल‍िए खास: ब्रेस्ट सैगिंग की असली वजह और बचाव के सही तरीके, डॉक्‍टर ने द‍िए FAQs के जवाब
क्या गलत ब्रा पहनने से दर्द हो सकता है
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उम्र के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, और यह एकदम कुदरती बात है. लेकिन जब बात महिलाओं के शरीर की आती है, तो ब्रेस्ट का ढीला होना या नीचे की तरफ लटकना अक्सर उनके मन में एक अजीब सी झिझक, शर्म और चिंता पैदा कर देता है. आईने के सामने खड़े होकर कई महिलाएं यह सोचने लगती हैं कि आखिर उनसे ऐसी क्या गलती हो गई कि ब्रेस्ट की शेप बिगड़ने लगी.

बाज़ार में भी इस डर का खूब फायदा उठाया जाता है. कोई जादुई तेल बेचने का दावा करता है, तो कोई ऐसी महंगी क्रीम का प्रचार करता है जिससे सब कुछ रातों-रात पहले जैसा टाइट हो जाएगा. मगर सच तो यह है कि इंटरनेट पर फैले आधे से ज्यादा नुस्खे सिर्फ और सिर्फ भ्रामक होते हैं. अगर आप भी इस समस्या को लेकर परेशान हैं, तो सबसे पहले शर्म छोड़िए और इसके पीछे का मेडिकल साइंस समझिए.

ब्रेस्ट सैगिंग असल में क्या है?

डॉक्टरी ज़ुबान में स्तनों के लटकने या ढीले पड़ने को ब्रेस्ट टोसिस (Breast Ptosis) कहा जाता है. कोलकाता के आरजी हॉस्पिटल्स की सीनियर कंसल्टेंट और ब्रेस्ट सर्जन डॉ. तृप्ति सेन साफ बताती हैं कि ब्रेस्ट सैगिंग उम्र बढ़ने के साथ होने वाला एक बिल्कुल सामान्य शारीरिक बदलाव है.

डॉ. सेन के मुताबिक, स्तनों का आकार और उनका कसाव कई चीज़ों पर निर्भर करता है. इसमें त्वचा का लचीलापन, जेनेटिक्स यानी परिवार के जीन्स, हार्मोन में आने वाले उतार-चढ़ाव और शरीर में फैट का बंटवारा शामिल है. सबसे जरूरी बात यह समझना है कि ब्रेस्ट का लटकना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे हर बार पूरी तरह से रोक पाना नामुमकिन होता है. इसलिए इसे कोई बीमारी या अपनी कोई कमी मान लेना सबसे बड़ी भूल है.

ब्रेस्ट ढीले होने की मुख्य वजहें?

अक्सर महिलाएं ब्रेस्ट ढीले होने का सारा दोष बच्चे को दूध पिलाने पर मढ़ देती हैं. लेकिन हकीकत कुछ और ही है. आइए जानते हैं कि असल में वो कौन से कारण हैं जिनकी वजह से यह बदलाव आता है.

कोलेजन और इलास्टिन की कमी: हमारी त्वचा को जवां और कसा हुआ रखने के लिए शरीर में दो तरह के प्रोटीन होते हैं - कोलेजन और इलास्टिन. डॉ. तृप्ति सेन समझाती हैं कि उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में इन दोनों प्रोटीन की मात्रा कम होने लगती है. जैसे-जैसे त्वचा का लचीलापन घटता है, ब्रेस्ट को सहारा देने वाले अंदरूनी टिशूज़ कमजोर पड़ जाते हैं और गुरुत्वाकर्षण की वजह से वो नीचे झुकने लगते हैं.
प्रेगनेंसी के दौरान बदलाव: गर्भावस्था के दौरान हार्मोन की वजह से स्तनों का साइज काफी बढ़ जाता है. डिलीवरी के बाद जब ब्रेस्ट का साइज वापस घटता है, तो वहां की त्वचा खिंच चुकी होती है. डॉ. सेन साफ करती हैं कि केवल ब्रेस्टफीडिंग यानी दूध पिलाने को इसका सीधा कारण मानना सही नहीं है. असली असर प्रेगनेंसी के दौरान त्वचा के खिंचने से पड़ता है.
वजन का बार-बार घटना और बढ़ना: बहुत जल्दी-जल्दी वजन घटाना या बढ़ाना भी त्वचा के ढीलेपन का बड़ा कारण है. जब आप अचानक वजन कम करते हैं, तो फैट तो गायब हो जाता है लेकिन त्वचा लटक जाती है.
जेनेटिक्स और पारिवारिक इतिहास: आपकी मां या नानी के ब्रेस्ट की बनावट कैसी थी, इसका असर भी आपके शरीर पर दिखता है.
स्मोकिंग यानी धूम्रपान: सिगरेट पीने से खून का दौरा धीमा होता है और त्वचा में मौजूद इलास्टिन तेजी से टूटने लगता है, जिससे स्किन समय से पहले बूढ़ी होने लगती है.

क्या ब्रेस्ट को लटकने से रोका जा सकता है?

यह सवाल हर महिला के दिमाग में होता है कि क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे ब्रेस्ट हमेशा टाइट रहें. इसका सीधा और ईमानदार जवाब है - नहीं, कुदरती उम्र को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता. लेकिन कुछ अच्छी आदतों से आप त्वचा और मांसपेशियों को काफी हद तक मजबूत बनाए रख सकते हैं.

डॉ. तृप्ति सेन के अनुसार, वैज्ञानिक रूप से ऐसा कोई अचूक नुस्खा नहीं है जो सैगिंग को सौ फीसदी रोक दे, लेकिन कुछ बुनियादी बातों का ध्यान जरूर रखा जा सकता है.

प्रोटीन से भरपूर संतुलित खानपान: अपनी डाइट में अंडा, पनीर, दालें, सोयाबीन और हरी सब्जियां शामिल करें. प्रोटीन से शरीर को नए टिशू बनाने में मदद मिलती है.
वजन को स्थिर रखें: बार-बार क्रैश डाइट करके वजन घटाने और फिर मोटे होने से बचें. अपने वजन को सामान्य बनाए रखने की कोशिश करें.
छाती की कसरत: पुश-अप्स और चेस्ट प्रेस जैसी एक्सरसाइज ब्रेस्ट के ठीक पीछे मौजूद पेक्टोरल मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं. हालांकि डॉ. सेन यह भी स्पष्ट करती हैं कि कसरत से केवल नीचे की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, यह ब्रेस्ट की ढीली त्वचा या अंदरूनी ग्रंथियों को सीधे तौर पर पहले जैसा नहीं कर सकती.
सही ब्रा पहनकर वर्कआउट करना: जब भी आप दौड़ें, कूदें या जिम जाएं, तो हमेशा अच्छी सपोर्ट वाली स्पोर्ट्स ब्रा पहनें ताकि स्तनों के लिगामेंट्स पर बेवजह खिंचाव न पड़े.
सनस्क्रीन का इस्तेमाल और बीड़ी-सिगरेट से दूरी: अगर आप धूप में जा रहे हैं तो डीप-नेक कपड़ों में छाती की त्वचा पर भी सनस्क्रीन लगाएं, ताकि सूरज की यूवी किरणें त्वचा को नुकसान न पहुंचाएं. साथ ही धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें.

क्रीम और तेल के दावों की सच्चाई : बाज़ार में मिलने वाले तेल, लोशन और मसाज से क्या ब्रेस्ट फिर से टाइट हो सकते हैं? डॉ. तृप्ति सेन इस पर बिल्कुल साफ़ राय देती हैं. वो बताती हैं कि ऐसा कोई भी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि कोई भी क्रीम, तेल या मालिश ब्रेस्ट के लटकने को हमेशा के लिए ठीक कर सकती है. तेल लगाने से सिर्फ ऊपर की स्किन में नमी आ सकती है, लेकिन अंदरूनी कसावट वापस नहीं आती. इसलिए महंगे विज्ञापनों के झांसे में आकर पैसे बर्बाद करने से बचें.

क्या गलत ब्रा पहनने से दर्द हो सकता है?

स्तनों में दर्द की शिकायत भी बहुत आम है, जिसे मेडिकल भाषा में मास्टाल्जिया (Mastalgia) कहते हैं. यह दर्द कई कारणों से हो सकता है, जैसे पीरियड्स आने से पहले हार्मोनल बदलाव, प्रेगनेंसी या कुछ खास दवाइयों का असर. लेकिन कई बार इसकी सीधी वजह आपकी ब्रा होती है.

डॉ. तृप्ति सेन बताती हैं कि गलत साइज की ब्रा पहनना या ऐसी ब्रा पहनना जो सही सहारा न देती हो, ब्रेस्ट में तेज दर्द, भारीपन और बेचैनी पैदा कर सकता है.

जब ब्रा बहुत टाइट हो: अगर ब्रा का साइज छोटा है, तो उसके पट्टे (स्ट्रैप्स), अंडरवायर या निचला इलास्टिक बैंड त्वचा और अंदर के टिशूज़ को दबाने लगता है. इससे छाती के आसपास दर्द, लाल निशान, खुजली और कंधों व पीठ में जकड़न होने लगती है.
जब ब्रा बहुत ढीली हो: अगर ब्रा ढीली है, तो चलने, सीढ़ियां चढ़ने या भागदौड़ करने पर ब्रेस्ट को जरूरी सहारा नहीं मिलता. इससे खिंचाव पैदा होता है और दर्द बढ़ जाता है.
भारी स्तनों वाली महिलाओं की परेशानी: जिन महिलाओं के ब्रेस्ट का साइज बड़ा होता है, अगर वो सही सपोर्ट वाली ब्रा न पहनें, तो उनके कंधों, गर्दन और कमर के ऊपरी हिस्से में लगातार तेज दर्द रहने लगता है.

सही ब्रा कैसे चुनें?

डॉक्टर सलाह देती हैं कि ब्रा का चुनाव करते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखें.

  • ब्रा का निचला बैंड शरीर पर एकदम सपाट बैठना चाहिए, न बहुत ज्यादा टाइट हो और न ही पीठ पर ऊपर की तरफ चढ़े.
  • कप्स का साइज ऐसा हो जिसमें ब्रेस्ट आराम से समा जाएं, ऊपर या साइड से बाहर न छलकें.
  • कंधे के पट्टे इतने कसे न हों कि त्वचा में गड्ढा बना दें.
  • अगर आपका वजन घट गया है या बढ़ गया है, तो पुरानी ब्रा के भरोसे न रहें, अपना नाप दोबारा चेक करवाएं.

डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है?

हर बदलाव सामान्य नहीं होता. डॉ. तृप्ति सेन चेतावनी देती हैं कि अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कुछ भी नया दिखे, तो तुरंत किसी ब्रेस्ट सर्जन या विशेषज्ञ को दिखाएं.

  1. अचानक दोनों स्तनों के साइज या शेप में बड़ा अंतर आ जाना.
  2. ब्रेस्ट में कोई नई गांठ या सख्त हिस्सा महसूस होना.
  3. त्वचा का अंदर की तरफ धंसना या संतरे के छिलके जैसा सिकुड़ जाना.
  4. निप्पल का अचानक अंदर की तरफ मुड़ जाना या उससे कोई अजीब सा पानी या खून जैसा डिस्चार्ज निकलना.
  5. दर्द लगातार बना रहना और किसी एक ही जगह पर चुभते रहना.

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हर महिला के शरीर की बनावट, उभार और कसावट एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती है. इंटरनेट की तस्वीरों को देखकर अपने शरीर की तुलना करना छोड़िए. प्राकृतिक बदलावों से डरने की जरूरत नहीं है, बस अच्छी जीवनशैली अपनाएं और कोई भी गंभीर लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लेने में देर न करें.

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