सोमवार से शुक्रवार तक एकदम संजीदा ज़िंदगी, दफ्तर का काम, सही समय पर उठना और पानी खूब पीना. फिर जैसे ही शुक्रवार की शाम ढलती है, मूड बदल जाता है. दिमाग में बस एक ही ख्याल आता है कि भाई अब तो दो दिन की छुट्टी है, थोड़ा एंजॉय तो बनता ही है. फिर क्या, शनिवार और रविवार को महफिल जमती है और गिलास दर गिलास दौर चलने लगता है.
अक्सर लोग इस बात पर अपनी पीठ थपथपाते हैं कि देखो हम तो रोज-रोज नहीं पीते, सिर्फ वीकेंड पर ही तो थोड़ी बहुत पार्टी करते हैं. अगर आप भी यही सोचते हैं कि हफ्ते भर संयम रखने से वीकेंड की यह भारी पार्टी छिप जाएगी, तो थोड़ा ठहरिए. मेडिकल भाषा में इसे वीकेंड अल्कोहलिक या बिंज ड्रिंकिंग (Binge Drinking) कहा जाता है. देखने में यह एक नॉर्मल लाइफस्टाइल लगती है, पर हकीकत में यह शरीर के अंदर से धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है.
वीकेंड अल्कोहलिक असल में कौन है
सीधे और आसान शब्दों में कहें तो वीकेंड अल्कोहलिक वो इंसान है जो सोमवार से गुरुवार तक शायद शराब को हाथ भी न लगाए. मगर जैसे ही फ्राइडे नाइट आती है, उसका खुद पर से कंट्रोल खत्म होने लगता है.
शारदाकेयर – हेल्थसिटी के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. विनीत कुमार गुप्ता बताते हैं कि वीकेंड अल्कोहलिक उन लोगों को कहा जाता है जो सप्ताह के दिनों में शराब नहीं पीते, लेकिन हर शुक्रवार, शनिवार या रविवार को बहुत ज्यादा शराब पी जाते हैं. डॉ. गुप्ता साफ कहते हैं कि इसे सिर्फ एक सोशल आदत या पार्टी कल्चर समझ लेना बहुत भारी भूल है. कम समय में ढेर सारी शराब शरीर में उड़ेलना सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा है.
एक बार में कितना पीना बिंज ड्रिंकिंग माना जाता है?
डॉक्टरों के अनुसार कम समय में कई पैग या ड्रिंक लेना बिंज ड्रिंकिंग की श्रेणी में आ सकता है. अगर हर वीकेंड आप खुद पर कंट्रोल खो देते हैं या अगली सुबह पछताना पड़ता है, तो यह सामान्य सोशल ड्रिंकिंग नहीं हो सकती.
सिर्फ वीकेंड पर पीने वालों में दिख सकता है 'हॉलिडे हार्ट सिंड्रोम'
डॉ. भास्कर नंदी बताते हैं कि अचानक ज्यादा शराब पीने से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है. इस स्थिति को हॉलिडे हार्ट सिंड्रोम कहा जाता है.
इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे पहचानें
अक्सर लोगों को यह मुगालता रहता है कि जब तक कोई इंसान रोज़ सुबह उठकर न पिए, तब तक वो शराबी नहीं कहलाता. यह सोच सरासर गलत है. अगर आपमें नीचे दिए गए लक्षण दिखते हैं, तो समझ लीजिए कि मामला हाथ से निकल रहा है.
- पूरे हफ्ते बस शनिवार और रविवार का इंतज़ार इसलिए करना ताकि जमकर ड्रिंक की जा सके.
- महफिल में बैठने के बाद यह तय न कर पाना कि कितने पैग पर रुकना है.
- एक बार शुरू होने के बाद चार-पाँच या उससे भी ज़्यादा ड्रिंक गटक लेना.
- पार्टी की अगली सुबह उठकर यह याद न रहना कि रात को क्या-क्या हुआ था, जिसे मेडिकल में ब्लैकआउट कहते हैं.
- रविवार की भारी हैंगओवर वाली सुबह सिर पकड़कर बैठना, पछताना कि अब कभी नहीं पिऊंगा, पर अगले शुक्रवार फिर वही दोहराना.
- पार्टी या वीकेंड बिना शराब के एकदम फीका और अधूरा सा लगना.
- अगली सुबह भयंकर थकान, चिड़चिड़ापन और दिन भर बिस्तर से न उठ पाने की नौबत आना.
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आरजी हॉस्पिटल्स, दिल्ली के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट कंसल्टेंट डॉ. पीयूष विश्वकर्मा इस बारे में आगाह करते हैं कि ऐसा इंसान बाहर से देखने में एकदम नार्मल और कंट्रोल में लग सकता है. लेकिन असल में यह आदत धीरे-धीरे पूरी लत में तब्दील हो जाती है. चार-पाँच ड्रिंक एक ही बैठक में ले लेना और फिर अगली सुबह पछतावे के बाद भी हर हफ्ते वही चक्र चलाना, यह साफ दिखाता है कि शरीर शराब पर निर्भर होने लगा है.
शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है
बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर पांच दिन शरीर को आराम दे दिया, तो लिवर दो दिन की मार आसानी से झेल लेगा. असलियत इससे बिल्कुल उलट है. जब आप दो दिनों के अंदर अचानक भारी मात्रा में अल्कोहल शरीर में डालते हैं, तो अंदरूनी अंगों के लिए नुकसानदायक है.
लिवर पर दोहरा हमला : लिवर शरीर की वो फैक्ट्री है जो ज़हर को बाहर निकालती है. जब आप कम समय में ज्यादा शराब पीते हैं, तो लिवर उस मात्रा को प्रोसेस नहीं कर पाता. नतीजा यह होता है कि लिवर की कोशिकाओं में सूजन आ जाती है जिसे फैटी लिवर कहते हैं. अगर यह सिलसिला महीनों और सालों तक चलता रहे, तो आगे चलकर यह लिवर सिरोसिस जैसी जानलेवा बीमारी में बदल जाता है जहां लिवर स्थायी रूप से सिकुड़ जाता है.
दिल की धड़कन और हॉलिडे हार्ट सिंड्रोम : वीकेंड पर अचानक ज्यादा पीने से दिल पर सीधा असर पड़ता है. सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और एंडोस्कोपी के डायरेक्टर और हेड, एयर कमोडोर (डॉ.) भास्कर नंदी बताते हैं कि अचानक भारी मात्रा में शराब पीने से 'हॉलिडे हार्ट सिंड्रोम' का खतरा बढ़ जाता है. इसमें दिल की धड़कन अचानक असामान्य रूप से तेज़ या अनियमित होने लगती है. साथ ही ब्लड प्रेशर अचानक बहुत ऊपर चढ़ जाता है, जिससे दिल के दौरे और स्ट्रोक की संभावना भी बढ़ सकती है.
नींद और दिमाग का तालमेल बिगड़ना : अक्सर लोग कहते हैं कि दो घूंट पीकर नींद अच्छी आती है. यह सबसे बड़ा वहम है. शराब पीने से आप बेहोशी जैसी नींद में तो चले जाते हैं, लेकिन शरीर को जो गहरी नींद (REM स्लीप) चाहिए होती है, वो गायब हो जाती है. यही वजह है कि अगली सुबह इंसान और ज्यादा थका हुआ महसूस करता है.
मानसिक सेहत पर बुरा असर : डॉ. भास्कर नंदी और डॉ. पीयूष विश्वकर्मा दोनों इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बिंज ड्रिंकिंग से मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है. जब नशा उतरता है, तो दिमाग में डोपामाइन का स्तर गिर जाता है. इससे एंग्जायटी, घबराहट और डिप्रेशन घेरने लगता है. इसे आम बोलचाल में 'हैंग्जायटी' भी कहते हैं. आदमी को बेवजह डर सताने लगता है और गुस्सा जल्दी आता है.
सड़क हादसे और झगड़े का जोखिम : वीकेंड पर ज्यादा पीने का खतरा सिर्फ बीमारियों तक सीमित नहीं रहता. जब सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है, तो रोड एक्सीडेंट, झगड़े और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
इस आदत से बाहर कैसे निकलें
अगर आपको लग रहा है कि आपकी वीकेंड पार्टी अब इस दायरे में आ चुकी है, तो अभी से संभलना मुमकिन है. इसके लिए ज़िंदगी में कुछ छोटे मगर जरूरी बदलाव करने होंगे.
अपनी सीमा पहले से तय करें: जब भी पार्टी में जाएं, पहले से मन बना लें कि आज एक या दो ड्रिंक से ज्यादा नहीं छूना है.
पानी का सहारा लें: हर एक पैग या ड्रिंक के बीच कम से कम एक बड़ा गिलास सादा पानी या नींबू पानी पिएं. इससे शरीर डिहाइड्रेट नहीं होगा और आप जल्दी-जल्दी ग्लास नहीं भरेंगे.
वीकेंड पर नए शौक तलाशें: अपने शनिवार और रविवार को सिर्फ बार या पब तक सीमित न रखें. आउटडोर स्पोर्ट्स, ट्रेकिंग, जिम, या परिवार के साथ कहीं घूमने का प्लान बनाएं.
दोस्तों का दबाव नकारें: अगर आपके दोस्त जबरदस्ती और पैग बनाने का दबाव डालते हैं, तो साफ़ मना करना सीखिए.
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से मिलें: अगर कोशिश करने के बावजूद आप वीकेंड पर शराब से खुद को नहीं रोक पा रहे हैं, तो इसमें शर्म की कोई बात नहीं है. डॉ. विनीत कुमार गुप्ता और डॉ. पीयूष विश्वकर्मा सलाह देते हैं कि अगर शराब की यह तलब कंट्रोल से बाहर जा रही हो, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ या काउंसलर की मदद लें.
सबसे बड़ी समस्या यह है कि वीकेंड अल्कोहलिक खुद को शराबी मानता ही नहीं. उसे लगता है कि वह सिर्फ दो दिन पार्टी कर रहा है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अगर हर हफ्ते यही पैटर्न दोहराया जा रहा है, तो यह धीरे-धीरे लिवर, दिल, नींद और मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है. इसलिए वीकेंड की पार्टी को आदत बनने से पहले पहचानना जरूरी है.
एक्सपर्ट के बारे में :
डॉ. विनीत कुमार गुप्ता : सीनियर कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, शारदाकेयर-हेल्थसिटी. डॉ. गुप्ता पाचन तंत्र, लिवर रोगों और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं के निदान व उपचार में विशेषज्ञ हैं.
एयर कमोडोर (डॉ.) भास्कर नंदी : डायरेक्टर एवं हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और एंडोस्कोपी, सर्वोदय हॉस्पिटल, फरीदाबाद. उन्हें लिवर, पाचन तंत्र और एंडोस्कोपिक प्रक्रियाओं के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है.
डॉ. पीयूष विश्वकर्मा : कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं लिवर ट्रांसप्लांट, आरजी हॉस्पिटल्स, दिल्ली. डॉ. विश्वकर्मा लिवर रोगों, पाचन संबंधी विकारों और लिवर ट्रांसप्लांट से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ हैं.
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