कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप अपने कमरे में चुपचाप बैठे हों, खिड़की-दरवाजे सब बंद हों, घर में कोई बीड़ी-सिगरेट छूता तक न हो, फिर भी अचानक आपकी नाक में सिगरेट के कड़वे धुएं की गंध भर जाए. आप उठकर इधर-उधर देखते हैं, पर्दों को सूंघते हैं, बाहर झांकते हैं कि कहीं पड़ोस से तो धुआं नहीं आ रहा, मगर वहां कुछ नहीं होता.
पहली-दूसरी बार तो इंसान सोचता है कि शायद मेरा वहम होगा या कहीं दूर से हल्की हवा आ गई होगी. लेकिन जब यह बात बार-बार होने लगे, तो घबराहट होना लाजिमी है. मन में उल्टे-सीधे ख्याल आने लगते हैं कि कहीं मेरी नाक ही खराब हो गई है.
असल में यह कोई वहम नहीं है, बल्कि एक जानी-पहचानी मेडिकल कंडीशन है. आम बोलचाल में इसे गंध का भ्रम कहते हैं और डॉक्टरी भाषा में इसे फैंटोस्मिया (Phantosmia) का नाम दिया गया है.
क्या होता है फैंटोस्मिया
शारदाकेयर- हेल्थसिटी के न्यूरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. आतमप्रीत सिंह बताते हैं कि जब आसपास कोई सिगरेट नहीं पी रहा हो, फिर भी धुएं या जलती हुई किसी चीज की गंध महसूस होती है, तो इसे मेडिकल भाषा में फैंटोस्मिया (Phantosmia) कहा जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को ऐसी गंध महसूस होती है, जो वास्तव में वातावरण में मौजूद नहीं होती.
डॉ. सिंह के मुताबिक, कुछ लोगों को इसमें सिगरेट के धुएं की बदबू आती है, तो कुछ को ऐसा लगता है मानो कहीं रबर जल रहा हो या कोई तीखा केमिकल फैल गया हो. कभी-कभार अगर ऐसा एक-आध सेकंड के लिए हो तो घबराने की कोई बात नहीं होती, क्योंकि यह हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता. लेकिन अगर यह रोज का किस्सा बन जाए या बार-बार होने लगे, तो इसे हल्के में लेकर टालना नहीं चाहिए.
नाक और साइनस की आम परेशानियां
ज़्यादातर मामलों में इस झूठी गंध की जड़ हमारे सिर में नहीं, बल्कि हमारी नाक के अंदर छुपी होती है. हमारी नाक के ऊपरी हिस्से में वो बारीक नसें होती हैं जो गंध को पहचानकर दिमाग तक संदेश भेजती हैं. जब इनमें कोई रुकावट या गड़बड़ी आती है, तो दिमाग को गलत सिग्नल मिलने लगते हैं.
- नाक की पुरानी एलर्जी: धूल-मिट्टी या मौसम बदलने से होने वाली एलर्जी नसों को परेशान कर देती है.
- साइनस का संक्रमण: जिन लोगों को साइनसाइटिस की दिक्कत रहती है, उनके साइनस में बलगम और सूजन जमा हो जाती है, जिससे नसों पर दबाव बनता है.
- वायरल इन्फेक्शन के बाद का असर: कभी तेज जुकाम, फ्लू या वायरल बुखार के बाद भी सूंघने की ताकत कुछ दिनों के लिए अजीब हो जाती है.
- तेज केमिकल और धुआं: अगर आप कभी बहुत तीखे पेंट, थिनर, कीटनाशक या फैक्ट्री के धुएं के सीधे संपर्क में आए हों, तो भी नाक की अंदरूनी सतह छिल सी जाती है और ऐसी गलत गंध आने लगती है.
डॉ. आतमप्रीत सिंह भी यह साफ करते हैं कि नाक की एलर्जी, साइनस में संक्रमण, क्रोनिक साइनसाइटिस और नाक के अंदर सूजन के कारण सूंघने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा तेज धुएं या केमिकल के संपर्क में आने से भी सूंघने की सामान्य प्रक्रिया गड़बड़ा जाती है.
दिमाग और तंत्रिकाओं से जुड़ा मामला : कभी-कभार यह समस्या नाक से आगे बढ़कर सिर और नसों तक भी जुड़ी हो सकती है. अगर नाक पूरी तरह साफ है, फिर भी गंध पीछा नहीं छोड़ रही, तो न्यूरोलॉजिकल कारणों पर गौर करना पड़ता है.
यह भी पढ़ें: 'मैं तो सिर्फ वीकेंड पर ही शराब पीता हूं' जानें क्या हफ्ते में एक बार शराब पीना सेफ है?
माइग्रेन का दौरा : कई लोगों को जब तेज सिरदर्द यानी आधासीसी का दर्द उठने वाला होता है, तो उससे ठीक पहले अजीब-अजीब सी गंध महसूस होती है. इसे माइग्रेन का ऑरा कहते हैं. दर्द ठीक होते ही यह गंध भी अपने आप गायब हो जाती है.
सिर में पुरानी चोट : अगर कभी बाइक से गिरकर या किसी हादसे में सिर के अगले हिस्से में चोट लगी हो, तो गंध महसूस कराने वाली नसों (Olfactory Nerve) को नुकसान पहुंच सकता है. इससे दिमाग में गंध के सिग्नल उलझ जाते हैं.
सीजर या दौरे की शुरुआत : डॉ. आतमप्रीत सिंह समझाते हैं कि दुर्लभ परिस्थितियों में टेम्पोरल लोब सीजर जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के कारण भी ऐसी गंध महसूस हो सकती है. दिमाग का टेम्पोरल लोब वाला हिस्सा गंध की पहचान करता है. जब वहां कोई हल्की असामान्य तरंगे उठती हैं, तो मरीज को अचानक जलने या सिगरेट के धुएं का अहसास हो सकता है. हालांकि, डॉ. सिंह यह भरोसा भी दिलाते हैं कि सिर्फ सिगरेट के धुएं की गंध आने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इंसान को कोई भयंकर न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो ही गई है. इसलिए बिना वजह डरकर पैनिक नहीं होना चाहिए.
कब सीधे डॉक्टर के पास भागना चाहिए
अगर यह गंध हफ्ते में कई बार आ रही है, तो सबसे पहले किसी अच्छे ईएनटी (ENT) यानी कान, नाक और गले के स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए. डॉक्टर एक छोटी सी दूरबीन जैसी लाइट डालकर नाक के भीतर देख लेते हैं कि कहीं कोई मांस तो नहीं बढ़ा हुआ (नेजल पॉलिप) या हड्डी टेढ़ी तो नहीं है.
लेकिन अगर सिगरेट की बदबू आने के साथ-साथ आपको नीचे लिखे लक्षणों में से कुछ भी महसूस हो, तो देर बिल्कुल न करें.
- शरीर के किसी एक हिस्से या हाथ-पैर में अचानक कमजोरी लगना.
- बोलते समय जुबान लड़खड़ाना या सही शब्द न बोल पाना.
- एकदम से कन्फ्यूजन या चक्कर जैसा महसूस होना.
- अचानक बहुत भयंकर सिरदर्द होना जो पहले कभी न हुआ हो.
- आंखों के आगे अंधेरा छाना या दौरा पड़ने जैसी नौबत आना.
डॉ. आतमप्रीत सिंह साफ सलाह देते हैं कि समस्या का सही इलाज करने के लिए उसके मूल कारण को पकड़ना सबसे ज्यादा जरूरी है. इसलिए अगर आपको लगातार यह बदबू आ रही है, तो केमिस्ट की दुकान से खुद कोई भी ड्रॉप या दवा लेने की गलती न करें. सीधे किसी माहिर डॉक्टर से मिले और सही जांच करवाएं.
घर पर क्या ख्याल रखें
जब तक आप डॉक्टर को नहीं दिखा रहे, तब तक कुछ छोटी बातों से नाक को आराम दे सकते हैं. दिन में एक-दो बार सादे गुनगुने पानी की भाप लें. अगर कमरा बहुत सूखा रहता है, तो कमरे में नमी बनाकर रखें. नाक में उंगली डालने या जोर से बार-बार नाक साफ करने से बचें ताकि अंदरूनी झिल्ली पर खरोंच न आए. खूब पानी पिएं ताकि शरीर अंदर से हाइड्रेट रहे.
अगर बिना किसी स्रोत के बार-बार सिगरेट या जलने जैसी गंध महसूस हो रही है, तो इसकी जांच करवाना जरूरी है. समय पर कारण पता चलने से सही इलाज संभव हो सकता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं