क्या कभी ऐसा होता है कि सामने रखी चीज का नाम याद नहीं आता, किसी से बात करते हुए अचानक शब्द भूल जाते हैं या किसी काम पर ध्यान लगाने में मुश्किल होती है? अगर ऐसा कभी-कभार हो तो यह सामान्य थकान या तनाव का असर हो सकता है. लेकिन जब भूलने, ध्यान न लगने और मानसिक रूप से उलझन महसूस होने जैसी समस्याएं बार-बार होने लगें और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञ इसे आमतौर पर ब्रेन फॉग (Brain Fog) के रूप में देखते हैं.
ब्रेन फॉग कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि कई तरह की स्थितियों से जुड़ा एक लक्षण है. इसमें व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है कि दिमाग पहले की तरह तेजी से काम नहीं कर रहा है. नींद की कमी, लंबे समय तक तनाव, मानसिक थकान, कुछ दवाएं, पोषण की कमी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं इसके पीछे कारण हो सकती हैं.
डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमैन – मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS), मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के अनुसार, मानसिक थकान को केवल उम्र बढ़ने या ज्यादा काम करने का नतीजा मानकर छोड़ना सही नहीं है. “कभी-कभार किसी का नाम या कोई शब्द याद न आना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि भूलने की समस्या बार-बार होने लगे, ध्यान केंद्रित करने में लगातार परेशानी हो या व्यक्ति के रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो इसके कारण की जांच जरूरी है. ब्रेन फॉग खुद कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर या मस्तिष्क से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है.”
ब्रेन फॉग के 7 आम लक्षण
1. छोटी-छोटी बातें भूलना : ब्रेन फॉग में व्यक्ति को हाल में हुई बातचीत, रखी हुई चीज या जरूरी काम याद रखने में परेशानी हो सकती है. बार-बार एक ही बात पूछना या जरूरी चीजें भूलना इसका हिस्सा हो सकता है.
2. ध्यान लगाने में परेशानी : किसी किताब, रिपोर्ट, बातचीत या ऑफिस के काम पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है. व्यक्ति का ध्यान बार-बार दूसरी चीजों की ओर जाने लगता है.
3. सही शब्द खोजने में दिक्कत : बात करते समय सामान्य शब्द याद न आना या वाक्य पूरा करने में परेशानी होना भी ब्रेन फॉग का अनुभव हो सकता है. व्यक्ति को लग सकता है कि शब्द दिमाग में है, लेकिन वह तुरंत याद नहीं आ रहा.
4. काम पूरा करने में सामान्य से ज्यादा समय लगना : ऐसे काम जिन्हें पहले आसानी से पूरा कर लिया जाता था, उनमें ज्यादा समय लग सकता है. निर्देश समझने या एक साथ कई काम संभालने में भी परेशानी हो सकती है.
5. मानसिक रूप से ‘भारीपन' महसूस होना : कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि उनका दिमाग साफ तरीके से काम नहीं कर रहा है. सोचने, निर्णय लेने या किसी समस्या का समाधान निकालने में सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है.
6. बार-बार चीजें इधर-उधर रखना : चाबी, मोबाइल, चश्मा या दूसरी जरूरी चीजें कहां रखी हैं, यह बार-बार भूलना भी ध्यान और स्मृति से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. हालांकि कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है.
7. मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन : लंबे समय तक मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में परेशानी होने पर व्यक्ति जल्दी थक सकता है. इसके साथ चिड़चिड़ापन, बेचैनी या काम में रुचि कम होने जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं.
क्यों होता है ब्रेन फॉग?
डॉ. प्रवीण गुप्ता के मुताबिक, ब्रेन फॉग के पीछे एक ही कारण नहीं होता.
खासकर अगर व्यक्ति को लंबे समय से पर्याप्त नींद नहीं मिल रही है, तो याददाश्त और एकाग्रता पर इसका असर पड़ सकता है. इसी तरह लगातार तनाव भी मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है.
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर भूलने या ध्यान न लगाने की समस्या लगातार बढ़ रही है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं या इसके साथ बोलने में परेशानी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, अचानक भ्रम, चलने में दिक्कत या तेज सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए.
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन फॉग को हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए. पर्याप्त नींद, संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव को नियंत्रित करना मददगार हो सकता है. वहीं, अगर लक्षण बने रहते हैं या बढ़ते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराकर सही कारण का पता लगाना सबसे जरूरी कदम है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं