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Alzheimer's Vs Normal Aging: कैसे पहचानें सामान्य भूलने की आदत और अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण?

क्या भूलना सिर्फ बुढ़ापे का असर है या अल्जाइमर का संकेत? न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए सामान्य भूलने की आदत और अल्जाइमर के 7 शुरुआती चेतावनी संकेतों के बीच फर्कण्‍

Alzheimer's Vs Normal Aging: कैसे पहचानें सामान्य भूलने की आदत और अल्जाइमर के शुरुआती लक्षण?
ये 7 संकेत नज़रअंदाज़ न करें
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उम्र बढ़ने के साथ कभी चश्मा रखकर भूल जाना, किसी का नाम अचानक याद न आना या चाबी कहीं छोड़ देना बहुत आम बात है. हम अक्सर इसे "बुढ़ापे का असर" कहकर हंसकर टाल देते हैं. लेकिन बात तब चिंता की बन जाती है जब ये भूलने की आदत रोज का सिरदर्द बन जाए और घर के बुजुर्ग के पूरे बर्ताव को ही बदल दे.

उम्र के साथ थोड़ा बहुत भूलना और अल्जाइमर की शुरुआत, दोनों शुरू में एक जैसे ही दिखते हैं. पर दोनों में जमीन-आसमान का फर्क होता है.

भारत में आज के समय बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है. एक अनुमान के मुताबिक हमारे देश में करीब 88 लाख से ज्यादा बुजुर्ग डिमेंशिया या अल्जाइमर के साए में जी रहे हैं. ऐसे में परिवार के सदस्यों को यह समझना बहुत जरूरी है कि हर भूलने की आदत सिर्फ बुढ़ापा नहीं होती, कई बार यह दिमाग की बीमारी का इशारा होती है.

हाल की बातें एकदम से भूल जाना : उम्रदराज लोगों को कोई पुरानी बात याद करने में थोड़ा वक्त लग सकता है, पर बाद में उन्हें याद आ ही जाता है. लेकिन अगर कोई इंसान अभी पांच मिनट पहले हुई बात भूल जाए, डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट दिमाग से निकल जाए, या एक ही सवाल बार-बार दोहराने लगे तो यह खतरे की घंटी है. इसका मतलब है कि दिमाग नई जानकारी को सेव ही नहीं कर पा रहा है.

रोज के जाने-पहचाने कामों में उलझ जाना : जो माँ सालों से बिना नापे-तौले पूरे घर के लिए स्वादिष्ट खाना बनाती आई हैं, अगर वो अचानक अपनी ही खास रेसिपी भूलने लगें, मसालों में कन्फ्यूज होने लगें, या घर का टीवी रिमोट और वाशिंग मशीन चलाना उनके लिए पहेली बन जाए, तो इसे सामान्य भूलना मत मानिए. अपने रोजमर्रा के काम न कर पाना एक बड़ा संकेत है.

पैसों का हिसाब-किताब बिगड़ने लगना : पैसों की छोटी-मोटी गलती किसी से भी हो सकती है. पर अगर घर का समझदार बुजुर्ग अचानक बिजली या पानी का बिल भरना भूल जाए, बैंक के लेन-देन में भारी गलतियां करने लगे या अचानक से अजीबोगरीब जगह अनाप-शनाप पैसे लुटाने लगे, तो समझ जाइये कि दिमाग की प्लानिंग और निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ रहा है.

जानी-पहचानी गलियों और रास्तों में खो जाना : गाड़ी चलाते या पैदल चलते हुए कभी गलत मोड़ ले लेना आम बात है. पर जिस रास्ते से इंसान 20 साल से आ-जा रहा हो, अपने उस लोकल बाजार का रास्ता भूल जाना, या अपने ही मोहल्ले में भटक जाना बहुत गंभीर बात है. यह सामान्य याददाश्त की कमजोरी बिल्कुल नहीं है.

बातचीत के बीच सही शब्द न मिलना : कभी-कभी किसी का नाम जुबान पर आकर अटक जाना अलग बात है, थोड़ी देर में याद आ ही जाता है. लेकिन अगर बातचीत करते वक्त सही शब्द ही न मिलें, वाक्य अधूरे छूट जाएं या वो बिल्कुल सीधी बात को भी न समझ पाएं, तो यह दिमागी बदलाव का लक्षण हो सकता है.

फैसले लेने में गड़बड़ी और तर्क का खत्म होना : अगर कोई व्यक्ति अचानक बिना सोचे-समझे बड़े फैसले लेने लगे, धूप में मोटे ऊनी कपड़े पहनकर निकल जाए, या ऐसी लापरवाहियां करने लगे जिनसे वो हमेशा बचता था, तो यह साफ इशारा है कि सही और गलत को परखने की ताकत घट रही है.

शौक और मिलने-जुलने से दूरी बना लेना : जो इंसान पहले मोहल्ले के पार्क में बैठना पसंद करता था, पूजा-पाठ या रिश्तेदारों के आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था, वो अचानक अकेला रहने लगे. दरअसल जब दिमाग काम करना कम करता है, तो इंसान को लोगों से बातचीत में झिझक होने लगती है और वो खुद को सबसे काट लेता है.

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

याददाश्त कमजोर होने का मतलब हर बार अल्जाइमर ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार बहुत ज्यादा डिप्रेशन, शरीर में विटामिन B12 की भारी कमी, थायराइड की बीमारी, नींद पूरी न होना या दवाओं के साइड इफेक्ट से भी याददाश्त कमजोर पड़ जाती है.

अच्छी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर समस्याओं का इलाज मुमकिन है.

सीधी सी बात यह है कि अगर बुजुर्ग की दिनचर्या और उनके बात करने के तौर-तरीके में अचानक बड़ा फर्क दिखने लगे, तो उसे बुढ़ापा समझकर नजरअंदाज न करें. सही समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करवाएं ताकि बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके.

लेखक के बारे में 

डॉ. अभिषेक दीक्षित (MBBS, MD, DM Neurology) पारस हेल्थ, गुरुग्राम में कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट एवं स्ट्रोक विशेषज्ञ हैं. उन्हें मिर्गी (Epilepsy), स्ट्रोक, पार्किंसन रोग, अल्जाइमर एवं अन्य डिमेंशिया, माइग्रेन और मूवमेंट डिसऑर्डर्स के निदान व उपचार में विशेष विशेषज्ञता हासिल है. डॉ. दीक्षित साक्ष्य-आधारित (Evidence-Based) चिकित्सा पद्धति और मरीज-केंद्रित देखभाल के लिए जाने जाते हैं तथा न्यूरोलॉजी से जुड़े कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यों में योगदान दे चुके हैं.

FAQs

Q. क्या उम्र बढ़ने पर भूलना सामान्य है?

हां, उम्र के साथ हल्का भूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन रोजमर्रा के कामों में बाधा डालने वाली याददाश्त की समस्या चिंता का विषय हो सकती है.

Q. अल्जाइमर का सबसे पहला लक्षण क्या होता है?

हाल की बातें भूलना, एक ही सवाल बार-बार पूछना और नई जानकारी याद रखने में कठिनाई शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकते हैं.

Q. क्या हर Memory Loss अल्जाइमर की वजह से होता है?

नहीं. विटामिन B12 की कमी, डिप्रेशन, थायराइड, नींद की कमी और कुछ दवाएं भी याददाश्त को प्रभावित कर सकती हैं.

Q. बुजुर्गों को डॉक्टर के पास कब ले जाना चाहिए?

जब भूलने की समस्या रोजमर्रा की दिनचर्या, फैसले लेने या व्यवहार को प्रभावित करने लगे.

Q. क्या अल्जाइमर का इलाज संभव है?

अल्जाइमर का पूर्ण इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन शुरुआती पहचान और उपचार से लक्षणों की प्रगति को धीमा करने में मदद मिल सकती है.

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