पड़ोसी देश बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप बेकाबू होता दिख रहा है. स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटों में 2,249 नए मरीज सामने आए हैं, जो इस साल एक दिन में मिलने वाला सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसी दौरान इस मच्छर जनित बीमारी से 7 लोगों ने अपनी जान गंवा दी.
ताजा रिपोर्ट के बाद इस साल बांग्लादेश में डेंगू मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 1,23,948 पर पहुंच गई है, जबकि जान गंवाने वालों का आंकड़ा 384 हो चुका है. राहत की बात बस इतनी है कि अब तक 1,17,400 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं. यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (UNB) के अनुसार, नई मौतों में ढाका नॉर्थ और मायमनसिंह में दो-दो, जबकि ढाका साउथ, खुलना और राजशाही में एक-एक मौत दर्ज की गई.
आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात भी सामने आई है कि कुल मौतों में महिलाओं की हिस्सेदारी 52.8 प्रतिशत और पुरुषों की 47.2 प्रतिशत रही है.
अस्पताल पहुंचने में देरी बन रही मौत की मुख्य वजह
ढाका के शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसोसिएट प्रोफेसर एच.एम. नजरुल अहसान के अनुसार, मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी के चलते मौतों की संख्या भी तेजी से चढ़ी है. इसके पीछे वायरस का गंभीर स्ट्रेन, मरीजों की पुरानी बीमारियां और इलाज में देरी मुख्य वजहें हैं.
वहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन का मानना है कि हालात संभालने के लिए प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी हेल्थकेयर सिस्टम के बीच तालमेल मजबूत करना बेहद जरूरी है ताकि गंभीर मरीजों को समय रहते वेंटिलेटर या आईसीयू सपोर्ट मिल सके. इससे पहले पशुधन राज्य मंत्री सुल्तान सलाहुद्दीन टुकू ने भी आगाह किया था कि ढाका समेत अन्य जिलों में आने वाले हफ्तों में खतरा और गहरा सकता है.
भारत में नवंबर का महीना और डेंगू का खतरा
अक्सर लोग सोचते हैं कि दिवाली के बाद और नवंबर की शुरुआत में मौसम ठंडा होते ही डेंगू का डर खत्म हो जाता है, जबकि हकीकत इसके उलट है. भारत के मैदानी इलाकों में अक्टूबर के अंत और नवंबर के शुरुआती पखवाड़े में दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है.
यह तापमान एडीज मच्छरों के पनपने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है. जब तक कड़ाके की ठंड नहीं पड़ती, तब तक डेंगू फैलाने वाले मच्छर सक्रिय रहते हैं.
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नवंबर में डेंगू से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
मौसम के इस बदलाव के दौर में जरा सी लापरवाही प्लेटलेट्स तेजी से गिरा सकती है. ऐसे में इन बातों पर खास ध्यान दें.
- गमलों की प्लेट और कूलरों को सुखाएं. बारिश भले ही थम गई हो, लेकिन बालकनी में रखे गमलों की तश्तरियों, छत पर पड़े कबाड़ या बंद पड़े कूलरों में रुका पानी मच्छरों की ब्रीडिंग का सबसे बड़ा अड्डा बनता है. इन्हें हफ्ते में दो बार पूरी तरह सुखाएं.
- दिन के वक्त पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें. डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर आमतौर पर सुबह सूरज निकलने के बाद और शाम ढलने से ठीक पहले एक्टिव रहता है. ऐसे समय में बाहर निकलते वक्त हाथ-पैर पूरी तरह ढककर रखें.
- मॉस्किटो रिपेलेंट का नियमित इस्तेमाल. घर के अंदर और बाहर जाते समय मच्छर भगाने वाली क्रीम, पैच या रोल-ऑन का इस्तेमाल करें. शाम होते ही घर की खिड़कियां-दरवाजे बंद कर दें या जालीदार दरवाजों का उपयोग करें.
- हाइड्रेशन और शुरुआती लक्षणों पर नजर. तेज बुखार, आंखों के पीछे असहनीय दर्द, बदन टूटना या उल्टी जैसा महसूस होना डेंगू के लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में दिन भर में नारियल पानी, ओआरएस और सादा गुनगुना पानी पीते रहें ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो.
बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी पेनकिलर जैसे ब्रूफेन या एस्पिरिन न लें, क्योंकि ये प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं. तेज बुखार आते ही तुरंत सीबीसी टेस्ट कराएं और डॉक्टर से संपर्क करें.
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