बच्चे को जन्म देने के बाद महिला के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं. इस दौरान कुछ महिलाओं को दांतों में ठंडा-गर्म लगने, मीठा खाने पर दांतों में झनझनाहट या ब्रश करते समय सेंसिटिविटी जैसी समस्या महसूस हो सकती है. नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर मंजू गोयल का कहना है कि दांतों की सेंसिटिविटी को सिर्फ डिलीवरी या कैल्शियम की कमी मान लेना सही नहीं होता है. इसके पीछे मसूड़ों की समस्या, इनेमल को नुकसान और पहले से मौजूद दांतों की समस्या सहित कई कारण हो सकते हैं. यहां जानते हैं बच्चा होने के बाद दांतों में क्यों झनझनाहट होने लगती है?
हार्मोनल बदलाव मसूड़ों को कर सकते हैं प्रभावित
प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन में होने वाले बदलाव मसूड़ों में ब्लड फ्लो और सूजन संबंधी प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं. इसके कारण मसूड़े अधिक संवेदनशील, लाल या सूजे हुए हो सकते हैं. इसे प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस कहा जाता है. डिलीवरी के बाद हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे बदलता है, इसलिए कुछ समय तक मसूड़ों से जुड़ी संवेदनशीलता बनी रह सकती है.
मसूड़ों में सूजन या उनके पीछे हटने की स्थिति में दांत की जड़ का हिस्सा उजागर हो सकता है. दांत की जड़ पर इनेमल नहीं होता, इसलिए ठंडा, गर्म या मीठा खाने-पीने पर झनझनाहट अधिक महसूस हो सकती है.
उल्टी या एसिड रिफ्लक्स
गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी या एसिड रिफ्लक्स की समस्या होने पर पेट का एसिड बार-बार दांतों के संपर्क में आ सकता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर दांतों के इनेमल डैमेज हो सकते हैं, जिससे झनझनाहट बढ़ सकती है. उल्टी के तुरंत बाद ब्रश करने के बजाय पानी से मुंह धोना और कुछ समय बाद ब्रश करना बेहतर होता है, क्योंकि उस समय एसिड के कारण इनेमल अस्थायी रूप से कमजोर हो सकता है.
क्या इसकी वजह कैल्शियम की कमी है?
डॉक्टर मंजू कहती है कि ये सिर्फ एक आम धारणा है कि डिलीवरी के बाद मां के शरीर से कैल्शियम कम होने के कारण दांत संवेदनशील हो जाते हैं. लेकिन सिर्फ दांतों में सेंसिटिविटी होना कैल्शियम की कमी का प्रमाण नहीं है. गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान कैल्शियम की जरूरत और शरीर में उसका नियमन बदलता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि बच्चे के जन्म के बाद हर महिला के दांतों से कैल्शियम निकलने लगता है.
इसलिए बिना जांच के कैल्शियम सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार संतुलित आहार और आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करना अधिक महत्वपूर्ण है.
ओरल हाइजीन पर दें ध्यान
डिलीवरी के बाद नवजात की देखभाल, नींद की कमी और दिनचर्या में बदलाव के कारण कई बार अपनी ओरल हाइजीन पर ध्यान देना मुश्किल हो सकता है. इससे प्लाक जमा होने और मसूड़ों की समस्या का रिस्क बढ़ सकता है. दिन में 2 बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करना और दांतों के बीच की सफाई करना जरूरी है.
डिलीवरी के बाद मां के स्वास्थ्य की देखभाल में ओरल हेल्थ को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लगातार समस्या होने पर गायनेकोलॉजिस्ट के साथ डेंटिस्ट से भी सलाह लेना सही कदम है.
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