शुगर होने के बाद सबसे बड़ी टेंशन यही होती है कि थाली में क्या रखें और क्या छोड़ें. हम भारतीयों की आदत ऐसी है कि बिना रोटी के खाना पूरा ही नहीं लगता. ऐसे में जब कोई डॉक्टर या दोस्त बोल देता है कि "अब रोटी खाना बंद कर दो," तो मन उदास होने लगता है, लेकिन अब आपको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है. बस आपको यह समझना होगा कि आपके पेट में किस अनाज का आटा जा रहा है. आइए जानते हैं ऐसी 4 रोटियों के बारे में, जिन्हें आप अपनी रोज की खुराक में शामिल कर सकते हैं.
जो की रोटी:
जौ का आटा शुगर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें 'बीटा-ग्लूकेन' नाम का एक खास फाइबर होता है. यह पेट में जाकर खाने को धीरे-धीरे पचाता है, जिससे खून में शुगर अचानक से नहीं भागती, अगर आप हफ्ते में 2 से 3 दिन भी जौ की रोटी खाते हैं, तो खाने के तुरंत बाद बढ़ने वाले शुगर लेवल को आसानी से संभाल सकते हैं.
चोकर वाली गेहूं की रोटी:
अगर आपको सिर्फ गेहूं की रोटी ही भाती है, तो आपको इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है. बस एक छोटा सा बदलाव करें, आटा छानते वक्त उसका चोकर बाहर न निकालें. साधारण बारीक पिसे आटे की जगह चोकर मिला आटा इस्तेमाल करने से शरीर को भरपूर फाइबर मिलता है, जो पेट को दुरुस्त रखता है और शुगर को काबू में रखने में मदद करता है.
बाजरा, ज्वार और रागी:
आजकल मिलेट्स यानी मोटे अनाज काफी चर्चा में हैं. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स आम गेहूं या मैदे से काफी कम होता है. इसका सीधा मतलब यह है कि इसे खाने के बाद आपका ब्लड शुगर एकदम से ऊपर नहीं जाएगा, बल्कि धीरे-धीरे एनर्जी मिलेगी.
बेसन की रोटी:
चना दाल से बनने वाला बेसन प्रोटीन और फाइबर दोनों से भरपूर होता है. अगर आप सिर्फ बेसन की रोटी नहीं बना पा रहे हैं, तो अपने सामान्य आटे में थोड़ा सा बेसन मिलाकर गूंध लें. यह न केवल रोटी का स्वाद बढ़ा देता है, बल्कि दोपहर के खाने के बाद आने वाली सुस्ती और शुगर स्पाइक को भी रोक लेता है.
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