जब भी हम अपने घर के किचन में मसालों का डिब्बा खोलते हैं, तो सबसे पहले हमारी नजर जिस चीज पर पड़ती है, वह हरी इलायची यानी छोटी इलायची है. चाय हो, मीठी खीर हो या फिर कोई शानदार पुलाव, इस छोटे से मसाले की खुशबू और स्वाद खाने का मज़ा पूरी तरह बदल देते हैं. वैसे तो पूरे भारत में इलायची खूब खाई और पसंद की जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं भारत के किस शहर को इलायची शहर के नाम से जाना जाता है?
क्या है इस शहर का खास नाम?
कर्नाटक के इस खास शहर का नाम हावेरी है. स्थानीय लोग और आसपास के इलाके इसे प्यार से 'एलाक्कमपिन नाडु' कहते हैं, जिसका मतलब है 'इलायची की खुशबू की धरती.' यहां की स्थानीय कन्नड़ भाषा में 'यलाक्की' का मतलब इलायची होता है और 'कम्पू' का मतलब खुशबू या महक होता है. पीढ़ियों से इस शहर की पहचान इलायची के साथ इतनी गहरी जुड़ी हुई है कि यह प्यारा सा उपनाम आज भी बहुत मशहूर है.

जब खेती नहीं, तो फिर क्यों पड़ा यह नाम?
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि जब यहां बड़े पैमाने पर इलायची की खेती नहीं होती, तो फिर इसे ऐसा नाम क्यों मिला? असल बात यह है कि इस नाम के पीछे कोई बहुत बड़ी खेती या खेत नहीं, बल्कि यहां की पुरानी परंपराएं और संस्कृति है. यहां पारंपरिक रूप से बनने वाले इलायची के हार बहुत मशहूर रहे हैं. इसके अलावा, यहां की ब्यादगी लाल मिर्च और इलायची की संस्कृति ने मिलकर इस शहर को पूरे इलाके में एक अलग पहचान दिलाई है.
अगर बात करें असली पैदावार की, तो भारत में इलायची मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के ठंडे और नमी वाले इलाकों में उगाई जाती है खास तौर पर केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुडगु, चिक्कमगलुरु और शिमोगा जैसे जिलों में, लेकिन हावेरी का नाता खेती से ज्यादा वहां के लोगों के प्यार और पुरानी जीवनशैली से जुड़ा है.
कैसे करें इलायची का सेवन?
आप इलायची को कई तरह से डाइट में शामिल कर सकते हैं. इसकी चाय बनाकर पी सकते हैं. रात में इसका पानी पी सकते हैं. इसके लिए आपको रात में 2 इलायची को एक गिलास पानी में उबाल लेना है फिर इसे चाय की तरह रात को सोने से पहले पी लेना है.
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