Food Habbit: आजकल ज़्यादातर लोगों की दिनचर्या कुछ ऐसी बन गई है जो धीरे-धीरे शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को जन्म दे रही है. इसकी शुरुआत होती है सुबह के नाश्ते से. अधिकतर लोग ब्रेकफास्ट में पोहा, इडली, डोसा जैसे खाद्य पदार्थ लेते हैं, जो मुख्य रूप से सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं. इस तरह का भोजन शरीर में जाते ही जल्दी पचकर ग्लूकोज में बदल जाते हैं. जैसे ही ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, पैंक्रियाज इंसुलिन रिलीज करता है ताकि ग्लूकोज को कंट्रोल किया जा सके.
एक सामान्य और मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ इंसान में यह ग्लूकोज लगभग दो घंटे में नॉर्मल लेवल पर आ जाता है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति को मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन है या वो प्री-डायबिटिक या डायबिटिक है, तो ये प्रोसेस और ज्यादा समय लेती है. लेकिन असल में परेशानी तब ज्यादा बढ़ जाती है जब इंसुलिन नीचे भी नहीं आता और हम दोबारा शरीर में शुगर डाल देते हैं.
ऑफिस पहुँचते ही मिड-मॉर्निंग स्नैक के नाम पर चाय पी जाती है, वो भी शक्कर या गुड़ के साथ. चाहे आप सफेद शक्कर डालें या गुड़, आखिर में वो शुगर ही है. इसके साथ बिस्किट या रस्क भी खा लिए जाते हैं, जो फिर से सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं. इससे पैंक्रियाज को और ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है और इंसुलिन लेवल और ऊपर चला जाता है.
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इसके बाद दो घंटे में लंच का समय आ जाता है. आमतौर पर लंच में कढ़ी-चावल, राजमा-चावल या कोई और हाई-कार्ब मील होता है. इंसुलिन लेवल अभी भी हाई होता है और दोबारा ग्लूकोज लोड डाल दिया जाता है. फिर शाम को स्नैक्स के नाम पर समोसा, मैगी, चाय-बिस्किट का दौर शुरू हो जाता है.
दिन भर में सुबह से शाम तक शरीर में इंसुलिन लगातार हाई रहता है. घर जाकर डिनर में भी रोटी, दाल और थोड़ा-सा प्रोटीन लिया जाता है, लेकिन कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा फिर से ज्यादा होती है. नतीजा यह कि इंसान एलिवेटेड इंसुलिन लेवल के साथ सोने चला जाता है.
यही प्रोसेस हर रोज चलती रहती है, ये शरीर इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता खोने लगता है. पैंक्रियाज लगातार ज्यादा इंसुलिन बनाता है और धीरे-धीरे क्रॉनिकली हाई इंसुलिन लेवल बन जाता है. यही स्थिति आगे चलकर इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, थकान और टाइप-2 डायबिटीज़ जैसी समस्याओं की जड़ बनती है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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