World Kidney Day 2026: डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दुनिया भर में सबसे आम क्रॉनिक बीमारियों में शामिल हैं, और दोनों का किडनी की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है. किडनी को शरीर का प्राकृतिक फिल्टर माना जाता है, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है, तरल संतुलन बनाए रखती है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है. लेकिन जब लंबे समय तक ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है, तो किडनी की नाजुक ब्लड वेसल्स धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं और इससे क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का खतरा बढ़ जाता है. 12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता है. आइए जानते हैं कि इन बीमारियों का किडनी पर क्या असर पड़ता है और इससे बचाव क्यों जरूरी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, क्रॉनिक किडनी डिजीज दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित करती है और इसका सीधा संबंध डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसे मेटाबॉलिक विकारों से है. इस बीमारी की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए कई बार किडनी डैमेज का पता काफी देर से चलता है. डॉक्टरों के मुताबिक, ये दोनों बीमारियां किडनी तक खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे रक्त प्रवाह कम हो जाता है और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है.
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फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल फरीदाबाद के यूरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. अनुप गुलाटी के अनुसार, “हाइपरटेंशन और हाई ब्लड शुगर के कारण धमनियों में सूजन (आर्टेराइटिस) हो सकती है, जिससे क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.” इसलिए इन स्थितियों को समझना और समय रहते जांच कराना बहुत जरूरी है.
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से किडनी को क्यों होता है ज्यादा खतरा
किडनी में लाखों छोटे फिल्टरिंग यूनिट होते हैं जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है. ये छोटे-छोटे रक्त वाहिकाओं के नेटवर्क की मदद से खून से गंदगी को फिल्टर करते हैं. जब लंबे समय तक ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है, तो इन रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. वहीं डायबिटीज में बढ़ा हुआ ब्लड शुगर इन वेसल्स की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे वे मोटी और कम प्रभावी हो जाती हैं.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के अनुसार, दुनिया में क्रॉनिक किडनी डिजीज का सबसे बड़ा कारण डायबिटीज है, इसके बाद हाई ब्लड प्रेशर का स्थान आता है. समय के साथ ये स्थितियां किडनी की विषैले पदार्थों को फिल्टर करने और शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने की क्षमता को कम कर देती हैं.
हाई ब्लड प्रेशर में रीनल आर्टरी स्टेनोसिस की भूमिका
डायबिटीज और हाइपरटेंशन के सीधे असर के अलावा, कई बार किडनी की रक्त वाहिकाओं में संकुचन भी हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है. डॉ. अनुप गुलाटी बताते हैं, “रीनल आर्टरी स्टेनोसिस हाई ब्लड प्रेशर का एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला कारण है.”
रीनल आर्टरी स्टेनोसिस में किडनी तक खून पहुंचाने वाली धमनियां संकरी या ब्लॉक हो जाती हैं. इससे किडनी में रक्त प्रवाह कम हो जाता है और शरीर ऐसे हार्मोन रिलीज करने लगता है जो ब्लड प्रेशर को और बढ़ा देते हैं. इस स्थिति का पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एंजियोग्राफी जैसे टेस्ट करते हैं.
डायबिटीज किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाती है

डायबिटीज से होने वाली किडनी की बीमारी को डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है. लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से किडनी के फिल्टरिंग यूनिट्स को नुकसान होने लगता है.
इससे कुछ समस्याएं हो सकती हैं:
• पेशाब में प्रोटीन का रिसाव
• किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होना
• धीरे-धीरे किडनी फंक्शन का कमजोर होना
सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति को क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा हो सकता है.
शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे किडनी की कार्यक्षमता कम होती है, तब ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
• लगातार थकान
• पैरों या टखनों में सूजन
• पेशाब की आदतों में बदलाव
ये भी पढ़ें: किडनी को नेचुरल तरीके से साफ करने के लिए इन 5 ड्रिंक्स का जरूर करें सेवन
हाई ब्लड प्रेशर किडनी को कैसे प्रभावित करता है

हाई ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर अधिक दबाव डालता है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, अनियंत्रित हाइपरटेंशन से किडनी के आसपास की धमनियां संकरी, कमजोर या कठोर हो सकती हैं. इससे-
• किडनी तक खून की सप्लाई कम हो जाती है
• शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करने की क्षमता घट जाती है
• किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है
कई मामलों में किडनी रोग और हाई ब्लड प्रेशर एक दूसरे को और खराब कर देते हैं.
किडनी की बीमारी के संकेत
क्रॉनिक किडनी डिजीज धीरे-धीरे विकसित होती है और कई बार देर से पता चलती है.

इसके सामान्य संकेत हैं:
• पैरों, टखनों या चेहरे में सूजन
• लगातार थकान या कमजोरी
• पेशाब के पैटर्न में बदलाव
• पेशाब में झाग (प्रोटीन रिसाव के कारण)
• हाई ब्लड प्रेशर का नियंत्रित न होना
किडनी की हेल्दी कैसे रखें
विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को सही तरीके से नियंत्रित करके किडनी रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
इसके लिए ये उपाय अपनाएं:
ब्लड शुगर कंट्रोल रखें: स्थिर ग्लूकोज लेवल किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान से बचाता है.
ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें: स्वस्थ सीमा में ब्लड प्रेशर बनाए रखना किडनी के लिए जरूरी है.
नियमित किडनी जांच कराएं: पेशाब में प्रोटीन टेस्ट और क्रिएटिनिन टेस्ट से शुरुआती नुकसान का पता चल सकता है.
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और धूम्रपान से दूरी किडनी और दिल दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद है.
डॉक्टर की सलाह का पालन करें: दवाइयां समय पर लें और नियमित चेक-अप कराते रहें.
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर क्रॉनिक किडनी डिजीज के सबसे बड़े कारणों में शामिल हैं. ये दोनों बीमारियां धीरे-धीरे किडनी की नाजुक रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे किडनी की कार्यक्षमता कम हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि रीनल आर्टरी स्टेनोसिस जैसी स्थितियां अगर समय पर पहचानी न जाएं तो समस्या और गंभीर हो सकती है. इसलिए नियमित जांच, सही लाइफस्टाइल और ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना किडनी की सेहत के लिए बेहद जरूरी है.
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