गेहूं की रोटी हमारे रोज के खाने का हिस्सा है, लेकिन अब बाजरा, ज्वार और रागी जैसे पुराने अनाज भी फिर से थाली में जगह बना रहे हैं. इन्हीं में से एक है रागी, जिसे कई जगह मडुआ और नाचनी भी कहा जाता है. फाइबर और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की वजह से इसे पौष्टिक अनाज माना जाता है. लेकिन क्या गेहूं की रोटी की जगह रोज रागी की रोटी खाना सच में फायदेमंद है? और डायबिटीज या वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह कितना सही विकल्प है? आइए समझते हैं.
रागी में ऐसा क्या खास है जो इसे सुपरफूड बनाता है
सफेद आटे या रिफाइंड गेहूं की तुलना में रागी में भरपूर मात्रा में फाइबर और कैल्शियम पाए जाते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम, आयरन और कई तरह के विटामिन्स पाए जाते हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि ये पूरी तरह से ग्लूटेन फ्री होता है. आजकल बहुत से लोगों को गेहूं खाने से पेट फूलने या ब्लोटिंग की दिक्कत होने लगती है, जिसे कई बार लोग समझ ही नहीं पाते. रागी इस मामले में पेट के लिए बहुत हल्का और पचने में आसान साबित होता है.
कैल्शियम के लिए रागी क्यों माना जाता है अच्छा विकल्प?
बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की सेहत पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है. ऐसे में डाइट में कैल्शियम वाली चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है. ज्यादातर लोग इसके लिए महंगी कैल्शियम की गोलियां खाने लगते हैं. इसकी बजाए अगर आप अपने आहार में रागी का आटा शामिल करते हैं तो यह कई तरह के फायदे दे सकता है.
- 100 ग्राम रागी में करीब 340 मिलीग्राम के आसपास कैल्शियम पाया जाता है, जो किसी भी दूसरे अनाज के मुकाबले कई गुना ज्यादा है.
- अगर आप दूध कम पीते हैं या आपको दूध हजम नहीं होता, तो ऐसे लोगों के लिए रागी कैल्शियम का एक विकल्प हो सकता है.
- कैल्शियम की मौजूदगी की वजह से रागी को हड्डियों के लिए फायदेमंद डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है.
वजन घटाने वालों के लिए रागी कैसे फायदेमंद हो सकती है?
अगर आप पेट की लटकती चर्बी और बढ़ते वजन से परेशान होकर तरह-तरह की डाइटिंग ट्राय करके थक चुके हैं, तो रागी को आजमा कर देखें.
- रागी में अच्छी मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है. जब आप दोपहर में दो रागी की रोटी खा लेते हैं, तो ये पेट में जाकर धीरे-धीरे पचती है.
- इससे लंबे समय तक पेट भरा-भरा महसूस होता है और बार-बार कुछ चटपटा या मीठा खाने की क्रेविंग नहीं होती.
- इसमें ट्रिप्टोफैन नाम का अमीनो एसिड होता है, जो भूख को कंट्रोल करने में मदद करता है.
डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतरीन विकल्प क्या है?
डायबिटीज में अक्सर इस बात को लेकर कन्फ्यूजन रहता है कि रोज की डाइट में कौन-सा अनाज शामिल किया जाए. गेहूं और चावल का ग्लाइसेमिक रागी के मुकाबले ज्यादा होता है, जिससे खाते ही खून में ग्लूकोज तेजी से घुलने लगता है.
कितनी रागी की रोटी खा सकते हैं?
रागी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. इसके रेशे ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर देते हैं, जिससे इंसुलिन का लेवल एकदम से नहीं बढ़ता. शुगर के मरीज हफ्ते में चार से पांच दिन तक दोपहर में रागी की रोटी खाते हैं तो यह शुगर लेवल को काबू करने में मददगार हो सकता है.
दिल की सेहत और खून की कमी होगी दूर
रागी को संतुलित डाइट में शामिल करना दिल की सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद हो सकता है.
बैड कोलेस्ट्रॉल पर लगाम: इसमें मौजूद फाइबर खून की नलियों में जमे बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मददगार है.
एनीमिया से राहत: जिन महिलाओं या किशोरियों में हीमोग्लोबिन की कमी रहती है, उनके लिए रागी का आयरन बहुत फायदेमंद है. अगर इसे हरी सब्जियों के साथ खाया जाए, तो आयरन बहुत तेजी से शरीर में अब्जॉर्ब होता है.
एक्सपर्ट की राय
इस बारे में नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित सफदरजंग अस्पताल में यूनानी विभाग के पूर्व प्रमुख (Ex Head of Unani Department) डॉ. सैयद अहमद खान (Dr. Syed Ahmed Khan) बताते हैं-
डॉ. सैयद अहमद खान आगे समझाते हैं कि जिन लोगों को लंबे समय से कब्ज की शिकायत रहती है या जिनका मेटाबॉलिज्म बेहद सुस्त हो चुका है, उनके लिए रागी किसी दवा से कम नहीं है. हालांकि, वो ये सलाह भी देते हैं कि इसे एकदम से तीनों वक्त खाने की गलती न करें. शुरुआत में इसे दिन में एक बार, वो भी दोपहर के खाने में शामिल करना सबसे बेहतर रहता है. साथ ही जिन लोगों को किडनी स्टोन की गंभीर दिक्कत हो, उन्हें डॉक्टर से पूछकर ही इसकी मात्रा तय करनी चाहिए क्योंकि इसमें कैल्शियम और ऑक्सालेट की मात्रा अच्छी होती है.
रागी की रोटी बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
कई महिलाओं की शिकायत होती है कि रागी का आटा गूंथते वक्त बिखर जाता है और रोटी गोल या पतली नहीं बनती. इसकी वजह ये है कि इसमें गेहूं की तरह ग्लूटेन यानी चिपचिपापन नहीं होता.
- आटा हमेशा गुनगुने या हल्के गर्म पानी से गूंथें, इससे आटा थोड़ा नरम और बंधा हुआ रहेगा.
- रोटी को सीधे बेलन से बेलने के बजाय चकले पर थोड़ा सूखा आटा छिड़क कर हाथ की हथेलियों से थपथपाकर बड़ा करें.
- अगर फिर भी बेलने में परेशानी आए, तो शुरुआत में 70 परसेंट रागी के आटे में 30 परसेंट गेहूं का आटा मिला सकते हैं.
- रोटी को तवे पर अच्छी तरह धीमी आंच पर सेकें और ऊपर से थोड़ा सा देसी घी जरूर लगाएं, जिससे इसका सूखापन खत्म हो जाए और पेट में गैस न बने.
किन लोगों को संभलकर खाना चाहिए
हर अच्छी चीज की भी एक सीमा होती है. अगर आप जरूरत से ज्यादा रागी खाने लगेंगे और दिनभर में पानी कम पिएंगे, तो ये पेट में भारीपन या कब्ज भी पैदा कर सकता है. इसलिए जब भी रागी की रोटी खाएं, दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. रात के समय भारी अनाज खाने से बचें, दोपहर का लंच रागी की रोटी खाने के लिए सबसे मुफीद समय माना जाता है.
ध्यान रखें रागी कोई जादुई अनाज नहीं है, लेकिन संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में इसे गेहूं, बाजरा और ज्वार जैसे दूसरे अनाजों के साथ शामिल किया जा सकता है.
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