ड्राई फ्रूट्स का जब भी जिक्र होता है सबसे पहला नाम किशमिश का आता है. इसे कई तरह से डाइट में शामिल किया जा सकता है. जैसे खीर, हलवा या किसी भी मीठी चीज़ में. लेकिन जब बाजार में दुकान पर खड़े होकर काली किशमिश (Black Raisins) और गोल्डन किशमिश (Golden Raisins) को देखते हैं, तो अक्सर कन्फ्यूजन हो जाता है कि इनमें से कौन सी खरीदें. दिखने के रंग के अलावा क्या इनके फायदों में भी कोई बड़ा अंतर होता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
क्या है काली और पीली किशमिश में असली फर्क?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि ये दोनों ही अंगूरों से बनती हैं, लेकिन दोनों को सुखाने का तरीका और अंगूर की वैरायटी अलग-अलग होती है. पीली यानि गोल्डन किशमिश को आमतौर पर हरी या पीले रंग के अंगूरों से बनाया जाता है और इन्हें जल्दी सुखाने या इनका रंग सुनहरा बनाए रखने के लिए हल्की प्रॉसेसिंग से गुजारा जाता है. वहीं दूसरी ओर, काली किशमिश काले या गहरे नीले रंग के अंगूरों से तैयार होती है. इन्हें धूप में प्राकृतिक तरीके से सुखाया जाता है, जिस वजह से इनका रंग गहरा काला या भूरा हो जाता है और इनमें कोई कृत्रिम चीज़ नहीं मिलाई जाती.
स्वाद की बात करें तो सुनहरी किशमिश खाने में थोड़ी ज्यादा मीठी और नरम होती है. इसका टेक्सचर सॉफ्ट होता है इसलिए बच्चों को या बेकिंग की चीज़ों में यह बहुत पसंद आती है. इसके मुकाबले काली किशमिश का स्वाद थोड़ा गहरा और खट्टा-मीठा होता है, और यह थोड़ी ज्यादा च्यूइंग यानी चबाने वाली होती है.

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सेहत के लिए कौन सी किशमिश है ज्यादा फायदेमंद?
पोषक तत्वों की अगर बात करें तो दोनों ही सेहत का खजाना हैं, क्योंकि दोनों में ही भरपूर मात्रा में फाइबर, नेचुरल शुगर, पोटैशियम और विटामिन्स पाए जाते हैं. हालांकि, रंग और सुखाने के तरीके की वजह से थोड़ा बहुत फर्क जरूर आ जाता है.
काली किशमिश के फायदे-
काली किशमिश को आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा सोर्स माना जाता है. जिन लोगों के शरीर में खून की कमी रहती है या जो अक्सर थकान महसूस करते हैं, उनके लिए काली किशमिश खाना बेहद फायदेमंद माना गया है. इसके अलावा, इसमें मौजूद तत्व पेट को साफ रखने और कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
गोल्डन किशमिश के फायदे-
गोल्डन किशमिश में भी कई तरह के खनिज और विटामिन्स होते हैं. यह पचने में हल्की और तुरंत एनर्जी देने वाली होती है. अगर आपको हल्की फुल्की थकान है और एनर्जी चाहिए, तो गोल्डन किशमिश एक अच्छा ऑप्शन है. हालांकि, एंटीऑक्सीडेंट और आयरन के मामले में काली किशमिश थोड़ी आगे निकल जाती है.
कैसे करें किशमिश का सेवन-
काली हो या गोल्डन अगर आप इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाते हैं, तो इनका असर दोगुना हो जाता है. भीगने के बाद इनकी तासीर और पचने का तरीका शरीर के लिए बहुत आसान हो जाता है.
किशमिश खाते समय किन बातों का रखें ध्यान-
कोई भी चीज़ कितनी भी हेल्दी क्यों न हो, उसका हद से ज्यादा सेवन नुकसान भी दे सकता है. किशमिश में नेचुरल शुगर बहुत ज्यादा होती है, इसलिए अगर आप शुगर के मरीज हैं या वजन घटाने की सोच रहे हैं, तो मुट्ठीभर से ज्यादा किशमिश न खाएं.
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