सूर्य ग्रहण को सनातन धर्म में विशेष धार्मिक घटना माना जाता है. ग्रहण के दौरान कई नियमों का पालन करने की परंपरा है. इन्हीं में एक नियम है कि ग्रहण और सूतक काल में देवी-देवताओं की मूर्तियों को नहीं छूना चाहिए. आखिर इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है और मंदिरों के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार इससे जुड़ी अहम बातें.
क्यों नहीं छूनी चाहिए भगवान की मूर्ति
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. ऐसे समय में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और अन्य धार्मिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. ऐसी मान्यता है कि मंदिरों में स्थापित मूर्तियों में दिव्य ऊर्जा का वास होता है, इसलिए ग्रहण के समय उन्हें स्पर्श करना उचित नहीं माना जाता है.
सूतक काल में क्यों बंद रहते हैं मंदिर
शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इस दौरान नियमित पूजा-अर्चना भी रोक दी जाती है. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की सफाई की जाती है. गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया जाता है और फिर विधि-विधान से पूजा शुरू होती है.
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ग्रहण के बाद क्या करना चाहिए
उन्होंने आगे बताया कि ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करना, घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है. इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर भगवान की पूजा करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें.
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण कब लगेगा
कौशल पांडेय ने बताया कि 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा. हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और सामान्य धार्मिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी.
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