सूर्य ग्रहण को लेकर भारत में धार्मिक मान्यताएं काफी प्रचलित हैं. ऐसी मान्यता है कि ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है. इस दौरान कुछ काम करने की मनाही होती है. जबकि मंत्र जाप, ध्यान और दान जैसे कार्यों को शुभ माना जाता है. हालांकि, कल 12 अगस्त 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. आइएआचार्य मदन मोहन से जानते हैं कि सूर्य ग्रहण से कितने घंटे पहले सूतक लगता है.
सूर्य ग्रहण से कितने घंटे पहले लगता है सूतक (Why Is Eclipse Considered Important)
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, सूर्य ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होताा है और ग्रहण समाप्त होने तक रहता है. लेकिन सूतक की मान्यता आमतौर पर उन्हीं स्थानों पर मानी जाती है जहां ग्रहण दिखाई देता है. 12 अगस्त का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.
ग्रहण से पहले सूतक में क्या करें: मदन मोहन (What To Do During Eclipse)
आचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले लोग सूतक या ग्रहण के दौरान भगवान का ध्यान, मंत्र जाप और पूजा-पाठ कर सकते हैं. जरूरतमंद लोगों को दाान करना भी शुभ माना जाता है. इस दौरान मनन को शांत रखने और सकारात्मक विचारों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है.
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किन कामों से बचने की है मान्यता
उन्होंने बताया कि ग्रहण के दौरान गुस्सा करने, बेवजह विवाद करने और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए. कई परिवारों में इस दौरान भोजन से जुड़े कुछ पारंपरिक नियम भी माने जाते हैं. हालांकि, भारत में इस ग्रहण की दृश्यता न होने के कारण यहां सूतक संबंधी नियम लागू नहीं होंगे.
भारत में क्यों नहीं माना जाएगा सूतक (Why Sutak will not be observed in India)
आचार्य मदन मोहन ने आगे बताया कि 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कई क्षेत्रों में आंशिक ग्रहण दिखेगा. भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल नहीं मना जाएगा.
ग्रहण को क्यों माना जाता है खास
ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान और सफलता से जोड़ा जाता है. जबकि चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है. इसलिए ग्रहण को ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना माना जाता है.
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