हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी. हरियाली तीज का पर्व सावन मास की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. हरियाली तीज का व्रत हर साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया का रखा जाता है. यह व्रत सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती है, जबकि कुंवारी कन्याएं यह व्रत अच्छा पति पाने के लिए करती हैं. इस दिन प्रदोष काल और सुबह के शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती की पूजा करें. सुहागिनें अखंड सौभाग्य के लिए सोलह श्रृंगार कर मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजा करती हैं. अगर, आप भी हरियाली तीज पर व्रत रख रही हैं, तो चलिए आपको बताते हैं पूजा करने का शुभ मुहूर्त और कथा का महत्व क्या है.
पूजा का शुभ मुहूर्त
- प्रातः काल मुहूर्त- सूर्योदय के बाद सुबह 06:00 बजे से
- प्रदोष काल मुहूर्त- सूर्यास्त के बाद शाम का समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है
- शुभ संयोग- इस दिन रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग का संयोग है
हरियाली तीज पूजन सामग्री
- श्रृंगार का सामान- सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, महावर, काजल और आभूषण
- भगवान के लिए वस्त्र- माता पार्वती के लिए चुनरी और भगवान शिव के लिए वस्त्र
- प्राकृतिक वस्तुएं- गीली काली मिट्टी या बालू (शिव-पार्वती मूर्ति हेतु), बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, और केले का पत्ता
- भोग सामग्री- पंचामृत, मौसमी फल और ठेकुआ या घेवर जैसी मिठाइयां
व्रत कथा और महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. 108वें जन्म में सावन शुक्ल तृतीया के दिन उनकी तपस्या पूरी हुई. सावन शुक्ल तृतीया के दिन ही शिव जी ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था. इस दिन शिव-पार्वती के पुनर्मिलन और उनकी कथा को सुनने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है. यह पर्व प्रकृति के श्रृंगार (हरियाली) और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक माना गया है.
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