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ईडी ने जमीन और क्रिप्टो धोखाधड़ी मामले में ₹10.86 करोड़ की संपत्ति को किया कुर्क

जांच एजेंसी के मुताबिक, ठगी की रकम को छिपाने के लिए आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा नेटवर्क तैयार किया था. पैसे पहले तीसरे पक्ष के बैंक खातों में जमा कराए गए और बाद में उन्हें नकद में निकाल लिया गया.

ईडी ने जमीन और क्रिप्टो धोखाधड़ी मामले में ₹10.86 करोड़ की संपत्ति को किया कुर्क
  • प्रवर्तन निदेशालय ने ₹10.86 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अस्थायी रूप से कुर्क किया है
  • कुर्क की गई संपत्तियों में ₹6.06 करोड़ की जमीन और फ्लैट तथा ₹4.79 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी शामिल है
  • जांच में आरोपियों ने जमीन और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर लोगों से ₹26.54 करोड़ की ठगी की है
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चंडीगढ़:

प्रवर्तन निदेशालय ने जमीन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई करते हुए करीब ₹10.86 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है. यह कार्रवाई ईडी चंडीगढ़ ने की है और इसमें आरोपी संदीप यादव तथा उसके सहयोगियों की चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं. ईडी ने यह कदम PMLA के तहत उठाया है.

ईडी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में ₹6.06 करोड़ मूल्य के फ्लैट और जमीन के अलावा ₹4.79 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी भी शामिल है. यह क्रिप्टोकरेंसी रामफी टोकन (Ramfi Token) के रूप में एक क्रिप्टो वॉलेट में रखी गई थी, जिसे अब फ्रीज कर दिया गया है. जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरी संपत्ति अपराध की कमाई से खरीदी गई थी.

मामले की शुरुआत हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी, जिसमें संदीप यादव, मनोज यादव और अन्य लोगों पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए थे. इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आम लोगों को जमीन दिलाने और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर मोटे मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की.

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने करीब 20 लोगों से प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी की. इसके अलावा, लोगों को क्रिप्टो निवेश में असामान्य रूप से ज्यादा रिटर्न का वादा किया गया. इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए आरोपियों ने करीब ₹26.54 करोड़ की अवैध कमाई की, जिसे बाद में रियल एस्टेट और क्रिप्टोकरेंसी में खपाया गया.

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जांच एजेंसी के मुताबिक, ठगी की रकम को छिपाने के लिए आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा नेटवर्क तैयार किया था. पैसे पहले तीसरे पक्ष के बैंक खातों में जमा कराए गए और बाद में उन्हें नकद में निकाल लिया गया. अधिकतर लेन-देन कैश में किया गया ताकि पैसों की ट्रेल को छिपाया जा सके और जांच एजेंसियों से बचा जा सके.

ईडी का यह भी कहना है कि संदीप यादव और उसके सहयोगी आदतन अपराधी हैं और इनके खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले और एफआईआर दर्ज हैं. इससे पहले की गई कार्रवाई में ईडी ने 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से करीब ₹17 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी और विभिन्न बैंक खातों में जमा ₹46 लाख की राशि बरामद कर उसे फ्रीज किया गया था.

प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है. पैसों के पूरे नेटवर्क और इस धोखाधड़ी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

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